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उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर नीति 2026: पात्रता, सब्सिडी, प्रोत्साहन और आवेदन की पूरी जानकारी

UP Corporate News डेस्क • • 10 मिनट

उत्तर प्रदेश सरकार ने डेटा सेंटर नीति 2021 (प्रथम संशोधन 2022) की जगह उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर नीति 2026 लागू की है, जो अधिसूचना की तारीख से 5 वर्ष तक प्रभावी है। इस गाइड में नीति की श्रेणियाँ, ब्याज व पूँजीगत सब्सिडी, भूमि और स्टाम्प ड्यूटी छूट तथा निवेश मित्र पोर्टल पर आवेदन की प्रक्रिया बताई गई है।

उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर नीति 2026: पात्रता, सब्सिडी, प्रोत्साहन और आवेदन की पूरी जानकारी
मुख्य बिंदु
  • 9 जुलाई 2026 के शासनादेश से अधिसूचित नई नीति, अवधि 5 वर्ष; 2021 की नीति (प्रथम संशोधन 2022) निरस्त
  • लक्ष्य: 2 GW से अधिक अतिरिक्त डेटा सेंटर क्षमता और ₹2 लाख करोड़ से अधिक निवेश
  • डेटा सेंटर पार्क को ब्याज पर 60% सब्सिडी, अधिकतम ₹50 करोड़; डेटा सेंटर यूनिट को 7% पूँजीगत सब्सिडी, अधिकतम ₹20 करोड़
  • भूमि पर 25% (मध्यांचल, पश्चिमांचल) से 50% (बुंदेलखंड, पूर्वांचल) तक सब्सिडी और सरकारी भूमि की पहली खरीद/लीज़ पर 100% स्टाम्प ड्यूटी छूट
  • आवेदन निवेश मित्र पोर्टल पर; नोडल एजेंसी यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPLC)

उत्तर प्रदेश में डेटा सेंटर लगाने वाले निवेशकों के लिए अब उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर नीति 2026 लागू है। इसने 2021 में आई पहली डेटा सेंटर नीति और उसके 2022 के संशोधन की जगह ली है [1]। सबसे काम की बात यह है कि नई नीति में बड़े पार्क, मध्यम आकार की यूनिट और छोटे एज डेटा सेंटर (Edge Data Centre) के लिए अलग-अलग प्रोत्साहन हैं। साथ ही AI कंप्यूटिंग और ग्रीन संचालन पर अतिरिक्त "बूस्टर" लाभ भी दिए गए हैं [1][2]।

एक नज़र में

बिंदुजानकारी
नीति का नामउत्तर प्रदेश डेटा सेंटर नीति 2026 (UP Data Centre Policy 2026) [1]
जारी करने वाला विभागआईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग, उत्तर प्रदेश शासन [1]
शासनादेशसं. 536/78-2-2026/E-105226, दिनांक 09.07.2026 [1]
प्रभावी तिथि और अवधिअधिसूचना की तारीख से 5 वर्ष, या संशोधन/निरस्त होने तक [1]
पुरानी नीतिडेटा सेंटर नीति 2021 (प्रथम संशोधन 2022) निरस्त [1]
लक्ष्य2 GW से अधिक अतिरिक्त क्षमता, ₹2 लाख करोड़ से अधिक निवेश [1]
ग्रीन लक्ष्य2030 तक नए डेटा सेंटरों में 50% अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) का उपयोग [2]
नोडल एजेंसीयूपी इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPLC) [1]
आवेदन पोर्टलनिवेश मित्र (Nivesh Mitra) [1][5]

पिछली नीति से अब तक

UPLC के आँकड़ों के अनुसार 2021 की नीति के तहत जून 2025 तक ₹21,342.90 करोड़ का निवेश आकर्षित हुआ और 644 मेगावाट डेटा सेंटर क्षमता दर्ज हुई। सूचीबद्ध 8 में से 7 परियोजनाएँ, कुल 133 मेगावाट क्षमता के साथ, व्यावसायिक संचालन में आ चुकी हैं [3]। नई नीति इसी आधार को AI-रेडी और हरित (Green) डेटा सेंटरों की दिशा में आगे ले जाती है [2]।

2021 की नीति में लेटर ऑफ़ कम्फ़र्ट (LoC) पा चुकी जो इकाइयाँ प्रोत्साहन ले रही हैं, उन्हें मौजूदा शासनादेशों के अनुसार स्वीकार्य लाभ मिलते रहने का प्रावधान है। जो इकाइयाँ अभी संचालन की शर्तें पूरी नहीं कर पाई हैं, उन्हें समय-विस्तार पर विचार हो सकता है, लेकिन यह विस्तार 3 वर्ष से अधिक नहीं होगा [1]।

किसके लिए है

नीति में चार श्रेणियाँ हैं। एक निवेशक एक से अधिक श्रेणी में पात्र हो, तब भी लाभ केवल एक ही श्रेणी में लिया जा सकता है [1]।

श्रेणीन्यूनतम शर्त
डेटा सेंटर पार्क (Data Centre Park)कुल लोड क्षमता कम से कम 40 MW [1][2]
डेटा सेंटर यूनिट (Data Centre Unit)कुल लोड 2 MW से अधिक और 40 MW से कम [1][2]
एज डेटा सेंटर (Edge Data Centre)एक ही प्रस्ताव में कम से कम 10 एज सेंटर, हर एक कम से कम 50 kW, कुल लोड कम से कम 2 MW [1][2]
सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस (CoE)एम्पावर्ड कमेटी की स्वीकृति से वित्तीय सहायता [1]

सब्सिडी की गणना पात्र स्थायी पूँजी निवेश (Eligible Fixed Capital Investment - EFCI) पर होती है। इसमें भूमि और भवन का मूल्य, भूमि विकास, बाहरी सड़क-सीवर जैसी ट्रंक इन्फ्रास्ट्रक्चर, कार्यशील पूँजी, पुराने या लीज़ पर लिए उपकरण और GST जैसे कर शामिल नहीं हैं [1]। व्यावसायिक संचालन की तारीख (DCCO) वह मानी जाती है, जब किसी बाहरी ग्राहक को कोलोकेशन, होस्टिंग या क्लाउड जैसी सेवा का पहला कर-मान्य बिल जारी हो [1]।

क्या-क्या प्रोत्साहन / लाभ मिलते हैं

डेटा सेंटर पार्क

  • ब्याज सब्सिडी (Interest Subsidy): पात्र बैंक/वित्तीय संस्था से EFCI के लिए लिए गए टर्म लोन के वार्षिक ब्याज का 60%, पहले 7 वर्षों तक। वार्षिक सीमा ₹10 करोड़ और प्रति पार्क कुल सीमा ₹50 करोड़ है [1]।
  • दोहरी ग्रिड बिजली सब्सिडी (Dual Grid Power Subsidy): दो ग्रिड में से कम लागत वाली ग्रिड का खर्च आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग वहन करेगा। यह सुविधा पहले 8 पार्क या 2 GW अतिरिक्त क्षमता, जो भी पहले हो, तक है [1]।
  • AI कंप्यूट बूस्टर: कम से कम 700 FP64-ग्रेड AI कंप्यूट यूनिट लगाने पर ब्याज सब्सिडी की कुल सीमा में ₹10 करोड़ और वार्षिक सीमा में ₹2 करोड़ की बढ़ोतरी का प्रावधान है [1]।
  • ग्रीन बूस्टर: शीर्ष दो स्तर के ग्रीन सर्टिफ़िकेशन, बेहतर PUE (Power Usage Effectiveness) और अक्षय ऊर्जा के हिस्से के आधार पर अतिरिक्त सीमा मिलती है। यह बढ़ोतरी अधिकतम ₹10 करोड़ कुल और ₹2 करोड़ वार्षिक तक हो सकती है [1]।

डेटा सेंटर यूनिट

  • पूँजीगत सब्सिडी (Capital Subsidy): भूमि-भवन को छोड़कर EFCI का 7%, अधिकतम ₹20 करोड़। भुगतान 10 वर्षों में होगा और वार्षिक सीमा ₹2 करोड़ है [1]।
  • बिजली शुल्क छूट (Electricity Duty Exemption): व्यावसायिक संचालन से 10 वर्ष तक 100% छूट [1]।
  • AI कंप्यूट बूस्टर: कम से कम 350 FP64-ग्रेड यूनिट लगाने पर कुल सीमा में ₹5 करोड़ और वार्षिक सीमा में ₹0.5 करोड़ की बढ़ोतरी [1]।
  • ग्रीन बूस्टर: अधिकतम ₹5 करोड़ कुल और ₹0.5 करोड़ वार्षिक बढ़ोतरी [1]।

एज डेटा सेंटर और CoE

  • एज डेटा सेंटरों को ग्रीन बूस्टर छोड़कर डेटा सेंटर यूनिट वाले सभी प्रोत्साहन मिलते हैं [1]।
  • इंटरनेट लागत सब्सिडी: बैंडविड्थ, लीज़्ड लाइन या फ़ाइबर के खर्च का 25%, प्रति एज यूनिट अधिकतम ₹2.5 लाख प्रति वर्ष, व्यावसायिक संचालन के पहले 3 वर्षों तक [1]।
  • सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस: परियोजना लागत का अधिकतम 50% राज्य सरकार वहन करेगी, जिसकी सीमा ₹10 करोड़ है [1]।

पार्क, यूनिट और एज डेटा सेंटर के लिए साझा लाभ

प्रोत्साहनप्रावधान
भूमि सब्सिडी (Land Subsidy)राज्य एजेंसियों से भूमि लेने पर प्रचलित सेक्टर दर में मध्यांचल व पश्चिमांचल में 25%, बुंदेलखंड व पूर्वांचल में 50% [1]
स्टाम्प ड्यूटी (Stamp Duty)सरकारी प्राधिकरण से पहली खरीद/लीज़ पर 100% और पार्क से यूनिट को दूसरे हस्तांतरण पर 50% छूट। यह बैंक गारंटी के बदले मिलती है, जो व्यावसायिक संचालन पर लौटाई जाती है [1]
ट्रांसमिशन/व्हीलिंग शुल्ककमीशनिंग से 25 वर्ष तक: राज्य के भीतर खरीद पर 50%, राज्य में ही उत्पादित अक्षय ऊर्जा पर 75% और अंतर-राज्यीय खरीद में राज्य के ट्रांसमिशन हिस्से पर 100% छूट [1]
Tier III/IV बूस्टरसर्टिफ़िकेशन खर्च की एकमुश्त भरपाई: Tier III पर 25%, Tier IV पर 50% [1]

गैर-वित्तीय सुविधाएँ

  • डेटा सेंटर उद्योग को आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (ESMA) के तहत आवश्यक सेवा का दर्जा [1]।
  • 3.0 का बेस FAR बिना शुल्क और 1.0 अतिरिक्त FAR शुल्क देकर। DG सेट के लिए सर्विस FAR 40% तक [1]।
  • पार्क से बाहर की डेटा सेंटर यूनिटों के लिए ओपन एक्सेस से बिजली खरीद, और पार्कों के लिए UPERC के नियमों के अनुसार वितरण लाइसेंस का विकल्प [1]।
  • दो समर्पित फ़ीडर की व्यवस्था होने पर 24x7 बिजली आपूर्ति [1]।
  • सात श्रम एवं प्रतिष्ठान कानूनों में स्व-प्रमाणन (Self-certification), 24x7 संचालन और ज़रूरी सुरक्षा उपायों के साथ महिलाओं की तीनों पालियों में नियुक्ति [1]।

500 MW से अधिक क्षमता वाली परियोजनाओं के लिए राज्य कैबिनेट की मंज़ूरी से केस-दर-केस विशेष पैकेज का प्रावधान भी है [1]।

आवेदन कैसे करें

  • निवेश मित्र पोर्टल पर पंजीकरण करें और सभी अनिवार्य दस्तावेज़ों के साथ निवेश प्रस्ताव रिपोर्ट (Investment Proposal Report - IPR) जमा करें। सभी दस्तावेज़ जमा होने पर ही आवेदन पूरा माना जाता है [1][5]।
  • नोडल एजेंसी के अधीन गठित पॉलिसी मैनेजमेंट यूनिट (PMU) प्रस्ताव पर अपनी सिफ़ारिश देती है। सिफ़ारिश मिलने के 30 दिन के भीतर नोडल एजेंसी स्वीकृति पत्र (Acknowledgement Letter) जारी करती है [1]।
  • ₹200 करोड़ तक की परियोजना को अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव (आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स) की अध्यक्षता वाली पॉलिसी इम्प्लीमेंटेशन यूनिट (PIU) मंज़ूरी देती है। इससे बड़ी परियोजनाएँ PIU और एम्पावर्ड कमेटी की सिफ़ारिश के बाद राज्य कैबिनेट के पास जाती हैं [1]।
  • मंज़ूरी के बाद नोडल एजेंसी लेटर ऑफ़ कम्फ़र्ट (LoC) जारी करती है। इसमें निवेश, प्रोत्साहन और शर्तें दर्ज होती हैं [1]।
  • LoC मिलने के 3 वर्ष के भीतर व्यावसायिक संचालन शुरू करना होता है। 200 MW की प्रतिबद्धता वाले प्रस्तावों को 2 वर्ष अतिरिक्त मिलते हैं [1]।
  • प्रोत्साहन का दावा तब किया जा सकता है, जब पार्क में 40 MW, यूनिट में 2 MW से अधिक, या एज सेंटरों में कम से कम 10 यूनिटों में कुल 2 MW क्षमता व्यावसायिक संचालन में आ जाए [1]।

नीति के कार्यान्वयन दिशानिर्देश (Implementation Guidelines) अक्टूबर 2026 में जारी किए गए हैं। ये UPLC और Invest UP की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं [2][4]। जानकारी के लिए UPLC (10-अशोक मार्ग, लखनऊ, ईमेल [email protected]) से संपर्क किया जा सकता है [1]। Invest UP की हेल्पलाइन +91 522 6923000 (सोमवार से शनिवार, सुबह 9:30 से शाम 6 बजे) भी उपलब्ध है [2]।

ध्यान रखने वाली बातें

  • परियोजना कई चरणों में बन सकती है, लेकिन सभी प्रस्तावित चरणों की जानकारी IPR जमा करते समय ही देनी होती है [1]।
  • ब्याज सब्सिडी केवल अनुसूचित बैंकों और RBI द्वारा विनियमित व अनुमोदित वित्तीय संस्थाओं के टर्म लोन पर लागू है [1]।
  • केंद्र और राज्य के प्रोत्साहन अलग-अलग पात्र घटकों पर एक साथ लिए जा सकते हैं, बशर्ते कुल प्रोत्साहन स्थायी पूँजी निवेश के 100% से अधिक न हो [1]।
  • ग्रीन बूस्टर का पूरा लाभ लेने के लिए डिज़ाइन के समय से ही कम PUE और अधिक अक्षय ऊर्जा की योजना बनाना फ़ायदेमंद है [1]।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या 2021 की डेटा सेंटर नीति अब भी लागू है?

नहीं। 2026 की नीति लागू होते ही 2021 की नीति (प्रथम संशोधन 2022) निरस्त हो गई है। हालाँकि पुरानी नीति के LoC धारकों के स्वीकार्य लाभ शासनादेशों के अनुसार जारी रहने का प्रावधान है [1]।

नई नीति कब तक मान्य है?

यह अधिसूचना जारी होने की तारीख से 5 वर्ष तक, या सरकार द्वारा संशोधित/निरस्त किए जाने तक प्रभावी है। इसका शासनादेश 9 जुलाई 2026 का है [1]।

छोटे डेटा सेंटर, जैसे 1 MW, को लाभ मिल सकता है?

अकेली यूनिट के लिए 2 MW से अधिक क्षमता ज़रूरी है। छोटे सेंटर एज डेटा सेंटर श्रेणी में पात्र हो सकते हैं, यदि एक ही प्रस्ताव में कम से कम 10 सेंटर (हर एक 50 kW या अधिक) हों और कुल लोड 2 MW हो [1]।

बिना LoC के संचालन शुरू कर चुके डेटा सेंटर को कुछ मिलेगा?

नीति के अनुसार जिन डेटा सेंटरों ने 2021 की नीति में LoC लिए बिना व्यावसायिक संचालन शुरू कर दिया है, वे आवेदन करके स्वीकृति पत्र मिलने पर गैर-वित्तीय प्रोत्साहनों का लाभ ले सकते हैं [1]।

स्रोत

मुख्य आधिकारिक स्रोत: उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर नीति 2026 — आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग, उत्तर प्रदेश शासन (Invest UP) — मूल दस्तावेज़ देखें
यह गाइड आधिकारिक दस्तावेज़ों के आधार पर तैयार की गई है; हर तथ्य का स्रोत लेख के अंत में दिया गया है। नीतियाँ समय-समय पर बदलती हैं, इसलिए आवेदन से पहले नवीनतम आधिकारिक अधिसूचना ज़रूर देखें। किसी त्रुटि की सूचना [email protected] पर "सुधार" विषय के साथ दें।

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