उत्तर प्रदेश EV नीति 2022: निर्माताओं को सब्सिडी, रोड टैक्स छूट और आवेदन की पूरी जानकारी
उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण एवं गतिशीलता नीति 2022 में EV, बैटरी और कंपोनेंट बनाने वाली इकाइयों के लिए पूँजीगत सब्सिडी, स्टांप शुल्क प्रतिपूर्ति और कौशल विकास सहायता का प्रावधान है। नीति 14 अक्टूबर 2022 से 13 अक्टूबर 2027 तक प्रभावी है, और शुद्ध इलेक्ट्रिक वाहनों पर पंजीकरण शुल्क व रोड टैक्स छूट की अवधि 13 अक्टूबर 2027 तक बढ़ाई गई है।

- नीति 14 अक्टूबर 2022 से 13 अक्टूबर 2027 तक प्रभावी, उद्योग प्रोत्साहन की नोडल एजेंसी Invest UP
- इंटीग्रेटेड EV और अल्ट्रा मेगा बैटरी परियोजनाओं को 30% पूँजीगत सब्सिडी, अधिकतम ₹1,000 करोड़ प्रति परियोजना
- MSME इकाइयों को 10% पूँजीगत सब्सिडी, अधिकतम ₹5 करोड़; बड़ी इकाइयों को 18%, अधिकतम ₹90 करोड़
- शुद्ध इलेक्ट्रिक वाहनों पर पंजीकरण शुल्क व रोड टैक्स छूट की वैधता 13 अक्टूबर 2027 तक बढ़ाई गई
- निर्माता इकाइयाँ निवेश मित्र पोर्टल से और वाहन खरीदार upevsubsidy.in से आवेदन करते हैं
उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण एवं गतिशीलता नीति 2022 (UP EV Manufacturing and Mobility Policy 2022) राज्य को इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी और उनके पुर्ज़ों के निर्माण का केंद्र बनाने के लिए लाई गई है। इसमें फ़ैक्टरी लगाने वालों, चार्जिंग स्टेशन लगाने वालों और वाहन खरीदारों, तीनों के लिए प्रावधान हैं। निवेशकों के लिए सबसे अहम बात यह है कि नीति 13 अक्टूबर 2027 तक प्रभावी है और लाभ "पहले आओ, पहले पाओ" के आधार पर दिए जाते हैं, इसलिए समय पर आवेदन मायने रखता है [1][3]।
एक नज़र में
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| नीति का नाम | उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण एवं गतिशीलता नीति 2022 |
| शासनादेश | संख्या 41/2022/2596/77-6-2022-1(M)/2022, दिनांक 14.10.2022 [4] |
| प्रभावी अवधि | 14 अक्टूबर 2022 से 13 अक्टूबर 2027 (या संशोधन होने तक) [3] |
| प्रशासनिक विभाग | अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग [2] |
| नोडल एजेंसी (उद्योग व चार्जिंग) | Invest UP [3] |
| खरीद प्रोत्साहन की नोडल एजेंसी | परिवहन विभाग [2] |
| अधिकतम पूँजीगत सब्सिडी | स्थायी पूँजी निवेश (FCI) का 30%, अधिकतम ₹1,000 करोड़ प्रति परियोजना [1] |
| सालाना सीमा | सभी श्रेणियों में पूँजीगत सब्सिडी पर ₹50 करोड़ की वार्षिक सीमा [2] |
| रोड टैक्स छूट की ताज़ा स्थिति | शुद्ध इलेक्ट्रिक (Pure EV) वाहनों के लिए 13 अक्टूबर 2027 तक [6][7] |
किसके लिए है
नीति में इलेक्ट्रिक वाहन की परिभाषा व्यापक है। इसमें बैटरी, अल्ट्रा-कैपेसिटर या फ़्यूल सेल से चलने वाली इलेक्ट्रिक मोटर वाले सभी वाहन आते हैं, जैसे दोपहिया, तिपहिया, चारपहिया, BEV, PHEV और FCEV। बैटरी की परिभाषा में Li-ion, NiMH, लेड-एसिड, अल्ट्रा-कैपेसिटर और फ़्यूल सेल जैसे सभी ऊर्जा भंडारण सिस्टम शामिल हैं। EV पुर्ज़ों (EV Components) में बैटरी व सेल, बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS), ट्रैक्शन मोटर, ऑन-बोर्ड चार्जर जैसे उपकरण गिनाए गए हैं [2]।
निर्माण इकाइयों को निवेश के आधार पर इन श्रेणियों में बाँटा गया है [1][2]:
- इंटीग्रेटेड EV परियोजना: EV निर्माण, बैटरी, कंपोनेंट या टेस्टिंग/R&D में से कम से कम दो गतिविधियाँ, और ₹3,000 करोड़ या अधिक का स्थायी पूँजी निवेश।
- अल्ट्रा मेगा बैटरी परियोजना: ₹1,500 करोड़ या अधिक निवेश और कम से कम 1 GWh क्षमता।
- मेगा EV परियोजना: ₹500 करोड़ या अधिक निवेश।
- मेगा EV बैटरी परियोजना: ₹300 करोड़ या अधिक निवेश।
- बड़ी (Large) परियोजनाएँ: MSME की सीमा से ऊपर, पर मेगा श्रेणी से नीचे।
- MSME परियोजनाएँ: भारत सरकार के MSME वर्गीकरण के अनुसार।
वही परियोजनाएँ पात्र हैं जिनका वाणिज्यिक उत्पादन नीति लागू होने के बाद शुरू हुआ हो [2]। जिन परियोजनाओं में निवेश 14.10.2022 से पहले शुरू हो गया था, उनके लिए कुल पूँजी निवेश का कम से कम 80% इस तिथि के बाद होना ज़रूरी है [3]।
क्या-क्या प्रोत्साहन / लाभ मिलते हैं
पूँजीगत सब्सिडी (Capital Subsidy)
| श्रेणी | सब्सिडी (FCI का) | अधिकतम राशि | भुगतान अवधि |
|---|---|---|---|
| पहली 2 इंटीग्रेटेड EV परियोजनाएँ | 30% | ₹1,000 करोड़ | 20 वर्ष |
| पहली 2 अल्ट्रा मेगा बैटरी परियोजनाएँ | 30% | ₹1,000 करोड़ | 20 वर्ष |
| पहली 5 मेगा EV परियोजनाएँ | 20% | ₹500 करोड़ | 10 वर्ष |
| पहली 5 मेगा EV बैटरी परियोजनाएँ | 20% | ₹500 करोड़ | 10 वर्ष |
| बड़ी EV/बैटरी परियोजनाएँ | 18% | ₹90 करोड़ | 10 वर्ष |
| MSME परियोजनाएँ | 10% | ₹5 करोड़ | 2 वर्ष |
सब्सिडी बराबर सालाना किस्तों में दी जाती है और यह क्षमता उपयोग से जुड़ी है। इसे "ग्रॉस कैपेसिटी यूटिलाइज़ेशन मल्टीपल" (GCM) कहा गया है: पहले वर्ष में स्थापित क्षमता का कम से कम 40% उपयोग होने पर पूरी किस्त, और बाद के वर्षों में 75% या अधिक उपयोग पर पूरी किस्त का प्रावधान है। कम उपयोग पर किस्त अनुपात में घटती है [1][2]।
निवेश पूरा करने के लिए भी अवधि तय है: MSME के लिए 3 वर्ष, बड़ी इकाई के लिए 4 वर्ष, मेगा के लिए 5 वर्ष और अल्ट्रा मेगा/इंटीग्रेटेड के लिए 7 वर्ष [2]।
अन्य प्रोत्साहन
- स्टांप शुल्क प्रतिपूर्ति (Stamp Duty Reimbursement): इंटीग्रेटेड और अल्ट्रा मेगा परियोजनाओं को पूरे प्रदेश में 100%। मेगा, बड़ी और MSME परियोजनाओं को पूर्वांचल व बुंदेलखंड में 100%, मध्यांचल व पश्चिमांचल में 75% (गाज़ियाबाद व गौतम बुद्ध नगर को छोड़कर), और गाज़ियाबाद व गौतम बुद्ध नगर में 50% [1]।
- गुणवत्ता प्रमाणन (Quality Certification): बड़ी और MSME इकाइयों को शुल्क का 50%, अधिकतम ₹10 लाख प्रति इकाई [1]।
- पेटेंट सहायता: बड़ी और MSME इकाइयों को लागत का 75%, घरेलू पेटेंट पर अधिकतम ₹50,000 और अंतरराष्ट्रीय पेटेंट पर अधिकतम ₹2 लाख [1]।
- कौशल विकास: बड़ी और MSME इकाइयों को पहले 50 कर्मचारियों के लिए प्रति कर्मचारी ₹5,000 प्रति वर्ष स्टाइपेंड प्रतिपूर्ति [1]।
किसी भी परियोजना को मिलने वाले कुल वित्तीय प्रोत्साहन स्थायी पूँजी निवेश के 100% से अधिक नहीं हो सकते [2]।
चार्जिंग और स्वैपिंग स्टेशन
चार्जिंग स्टेशन (न्यूनतम ₹25 लाख निवेश) को 20% पूँजीगत सब्सिडी, अधिकतम ₹10 लाख प्रति इकाई, पहले 2,000 स्टेशनों के लिए; और बैटरी स्वैपिंग स्टेशन (न्यूनतम ₹15 लाख निवेश) को 20%, अधिकतम ₹5 लाख, पहले 1,000 स्टेशनों के लिए प्रावधान है। एक निवेशक अधिकतम 100 स्टेशनों पर यह लाभ ले सकता है [1][3]।
खरीदारों के लिए: रोड टैक्स और पंजीकरण शुल्क छूट
मूल नीति में राज्य में खरीदे और पंजीकृत EV पर पहले 3 वर्ष तक पंजीकरण शुल्क और रोड टैक्स में 100% छूट का प्रावधान था, और चौथे-पाँचवें वर्ष में यह छूट राज्य में बने, खरीदे और पंजीकृत वाहनों के लिए रखी गई थी [1][8]। परिवहन विभाग के EV पोर्टल पर दर्ज 5 नवंबर 2025 की अधिसूचना के अनुसार शुद्ध इलेक्ट्रिक (Pure EV) वाहनों के लिए यह व्यवस्था 13 अक्टूबर 2027 तक बढ़ा दी गई है [6][7]। यह छूट वाहन पंजीकरण के समय डीलर पॉइंट पर ही दी जाती है [4]।
खरीदारों के लिए: एकमुश्त खरीद सब्सिडी
नीति लागू होने पर पहले वर्ष (14.10.2022 से 13.10.2023) के लिए "अर्ली बर्ड" खरीद सब्सिडी घोषित की गई थी [2][5]:
| वाहन श्रेणी | सब्सिडी | अधिकतम प्रति वाहन | वाहनों की सीमा |
|---|---|---|---|
| दोपहिया | एक्स-फ़ैक्टरी कीमत का 15% | ₹5,000 | पहले 2 लाख |
| तिपहिया | 15% | ₹12,000 | पहले 50,000 |
| चारपहिया | 15% | ₹1 लाख | पहले 25,000 |
| ई-बस (गैर-सरकारी) | 15% | ₹20 लाख | पहली 400 |
| ई-गुड्स कैरियर | 10% | ₹1 लाख | पहले 1,000 |
(तिपहिया के आँकड़े नीति दस्तावेज़ में दिए गए हैं [1]; 14 जुलाई 2023 के शासनादेश की तालिका में तिपहिया शामिल नहीं है [5]।) इसके बाद Invest UP पर 16 जुलाई 2024 का "सब्सिडी योजना में संशोधन" और 22 अगस्त 2024 का "खरीद प्रोत्साहन विस्तार" शासनादेश दर्ज है [1]। खरीद सब्सिडी की वर्तमान पात्रता अवधि और शर्तों की पुष्टि upevsubsidy.in या संबंधित RTO से करना बेहतर है।
आवेदन कैसे करें
निर्माण इकाइयों के लिए
- निवेश मित्र पोर्टल पर पंजीकरण करके यूनिक ID प्राप्त करें [3]।
- निर्धारित प्रारूप (Annexure-2) में लेटर ऑफ़ कम्फ़र्ट (LoC) के लिए आवेदन करें, साथ में CA प्रमाणित DPR, निवेश व वित्तपोषण विवरण और कंपनी दस्तावेज़ लगाएँ [3]।
- MSME आवेदनों की जाँच ज़िला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र करता है, जिसके बाद आवेदन मंडलायुक्त की अध्यक्षता वाली स्वीकृति समिति के पास जाता है; बड़ी, मेगा और इंटीग्रेटेड परियोजनाओं की जाँच Invest UP की नीति कार्यान्वयन इकाई (PIU) करती है [3]।
- LoC मिलने के छह महीने के भीतर बैंक अप्रेज़ल नोट जमा करें [3]।
- वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने के 90 कार्य दिवसों के भीतर पूँजीगत सब्सिडी का पहला चरण क्लेम करें; स्टांप शुल्क, गुणवत्ता प्रमाणन और पेटेंट प्रतिपूर्ति भी इसी अवधि में क्लेम होती है [3]।
वाहन खरीदारों के लिए
- upevsubsidy.in पर लॉगिन बनाकर वाहन पंजीकरण संख्या दर्ज करें [9]।
- वाहन पंजीकरण के समय डीलर के माध्यम से दी गई वही फ़ोटो व हस्ताक्षर, तथा अपने नाम के खाते का कैंसिल चेक या पासबुक अपलोड करें [9]।
- ई-बस को छोड़कर सभी आवेदनों का निस्तारण और भुगतान संबंधित RTO कार्यालय से होता है [4]।
ध्यान रखने वाली बातें
- सभी प्रोत्साहन LoC या स्वीकृति पत्र जारी होने के क्रम में "पहले आओ, पहले पाओ" आधार पर दिए जाते हैं, इसलिए परियोजना की तैयारी जल्दी शुरू करना फ़ायदेमंद है [3]।
- इस नीति के लाभ के साथ राज्य की किसी दूसरी योजना का लाभ नहीं जोड़ा जा सकता; केंद्र सरकार से मिलने वाला प्रोत्साहन पात्र पूँजी निवेश से घटाया जाता है [3]।
- प्रोत्साहन वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने के बाद ही दिए जाते हैं, इसलिए क्षमता उपयोग (GCM) की योजना शुरू से बनाएँ [3]।
- खरीदार अपनी श्रेणी (व्यक्तिगत या एग्रीगेटर/फ़्लीट ऑपरेटर) सोच-समझकर चुनें। पोर्टल के अनुसार जमा करने के बाद सामान्यतः सुधार नहीं होता; गलती से एग्रीगेटर/फ़्लीट श्रेणी चुन लेने पर ₹100 के नॉन-ज्यूडिशियल स्टांप पेपर पर शपथ-पत्र देकर सुधार की व्यवस्था है [4]।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या EV पुर्ज़े बनाने वाली इकाइयाँ भी इस नीति के दायरे में हैं?
हाँ, नीति में बैटरी व सेल, BMS, ट्रैक्शन मोटर जैसे EV कंपोनेंट परिभाषित हैं, और इंटीग्रेटेड परियोजना में कंपोनेंट निर्माण एक पात्र गतिविधि है। अपनी इकाई की सटीक श्रेणी के लिए Invest UP से परामर्श लेना उपयोगी रहेगा [2]।
नीति कब तक लागू है?
दिशा-निर्देशों के अनुसार नीति 14.10.2022 से 13.10.2027 तक, या संशोधन होने तक, प्रभावी है [3]।
MSME इकाई को अधिकतम कितनी पूँजीगत सब्सिडी का प्रावधान है?
MSME परियोजनाओं के लिए स्थायी पूँजी निवेश का 10%, अधिकतम ₹5 करोड़, दो वर्षों में बराबर किस्तों में [1][2]।
क्या अब भी EV खरीदने पर रोड टैक्स माफ़ है?
परिवहन विभाग की 5 नवंबर 2025 की अधिसूचना के अनुसार शुद्ध इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए छूट की अवधि 13 अक्टूबर 2027 तक बढ़ाई गई है। वाहन खरीदते समय डीलर से अपने मॉडल पर इसकी पुष्टि कर लें [6][7]।
सब्सिडी का पैसा कैसे आता है?
खरीद सब्सिडी सत्यापन के बाद सीधे खरीदार के बैंक खाते में भेजी जाती है; निर्माण इकाइयों की सब्सिडी वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने के बाद ऑनलाइन इंसेंटिव मैनेजमेंट सिंगल-विंडो सिस्टम के ज़रिए जारी होती है [2][5]।
स्रोत
- [1] Uttar Pradesh Electric Vehicle Manufacturing and Mobility Policy 2022 — Invest UP, पेज अपडेट 2 जून 2026
- [2] UP EV Manufacturing and Mobility Policy 2022 (नीति दस्तावेज़, अंग्रेज़ी) — Invest UP, 2022
- [3] विनिर्माण इकाइयों व चार्जिंग सेवा प्रदाताओं के लिए प्रोत्साहन दिशा-निर्देश — Invest UP, 3 मई 2023
- [4] UP EV Subsidy Portal — परिवहन विभाग, उत्तर प्रदेश, अक्टूबर 2026
- [5] शासनादेश संख्या 92/2023/2014/तीस-3-2023 (खरीद प्रोत्साहन) — परिवहन विभाग, 14 जुलाई 2023
- [6] Pure EV वाहनों के पंजीकरण की वैधता 13 अक्टूबर 2027 तक बढ़ाने की अधिसूचना — परिवहन विभाग, 5 नवंबर 2025
- [7] UP grants 100% exemption on registration fees, road tax for EV purchases till October 2027 — The Statesman, नवंबर 2025
- [8] FAQs — UP EV Subsidy Portal, परिवहन विभाग
- [9] How To Apply (आवेदन प्रक्रिया) — UP EV Subsidy Portal, परिवहन विभाग
यह गाइड आधिकारिक दस्तावेज़ों के आधार पर तैयार की गई है; हर तथ्य का स्रोत लेख के अंत में दिया गया है। नीतियाँ समय-समय पर बदलती हैं, इसलिए आवेदन से पहले नवीनतम आधिकारिक अधिसूचना ज़रूर देखें। किसी त्रुटि की सूचना [email protected] पर "सुधार" विषय के साथ दें।