उत्तर प्रदेश GCC नीति 2024: ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर की पात्रता, प्रोत्साहन और आवेदन
उत्तर प्रदेश ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर नीति-2024 बहुराष्ट्रीय और भारतीय कंपनियों के अपने कैप्टिव सेंटर यूपी में लगाने पर ज़मीन, पूँजी, किराये, वेतन और भर्ती से जुड़े प्रोत्साहनों का प्रावधान करती है। यह नीति 7 मई 2025 को अधिसूचित हुई और इसे लागू करने के लिए इन्वेस्ट यूपी नोडल एजेंसी है।

- नीति 7 मई 2025 को अधिसूचित हुई; इन्वेस्ट यूपी नोडल एजेंसी है
- दो श्रेणियाँ: लेवल-1 GCC (₹15 करोड़ या 100 कर्मचारी) और एडवांस्ड GCC (₹50 करोड़ या 300 कर्मचारी); नोएडा-गाजियाबाद में सीमा ऊँची
- पात्र पूँजी निवेश पर 25% पूँजीगत सब्सिडी, नियमावली के अनुसार अधिकतम ₹10 करोड़ (लेवल-1) और ₹25 करोड़ (एडवांस्ड) प्रति वर्ष
- किराया, बैंडविड्थ, क्लाउड और बिजली खर्च पर 5 वर्ष तक 20% ऑपरेशनल सब्सिडी
- पेरोल सब्सिडी, प्रति फ्रेशर ₹20,000 भर्ती सहायता और EPF प्रतिपूर्ति का भी प्रावधान
उत्तर प्रदेश ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर नीति-2024 (UP GCC Policy 2024) उन कंपनियों के लिए है जो यूपी में ऐसा सेंटर खोलना चाहती हैं जो सिर्फ़ अपनी मूल कंपनी को आईटी, रिसर्च, फाइनेंस या एचआर जैसी सेवाएँ दे। नीति 7 मई 2025 को अधिसूचित हुई [2] और जनवरी 2026 में इसकी नियमावली-2025 को कैबिनेट की मंज़ूरी मिली [6]। सबसे काम की बात: ज़मीन, किराये, वेतन, भर्ती और प्रशिक्षण, लगभग हर बड़े खर्च पर प्रोत्साहन का प्रावधान है, जो केंद्र सरकार की योजनाओं के साथ भी लिए जा सकते हैं [1][3]।
GCC क्या होता है
नीति के अनुसार ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (Global Capability Centre) किसी बहुराष्ट्रीय कंपनी (MNC) या भारतीय कंपनी का ग्लोबल इन-हाउस सेंटर या ऑफशोर यूनिट है, जिसका पूरा स्वामित्व और संचालन मूल कंपनी के पास हो और जो उसी को आईटी, आरएंडडी, फाइनेंस, एचआर और बैक-ऑफिस जैसी विशेष सेवाएँ दे [1][4]।
दूसरों के लिए सेवा देने वाली कंपनियाँ इसमें GCC नहीं मानी जातीं। ये चार श्रेणियाँ बाहर हैं [1]:
- टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, ऑपरेशंस या डिजिटल सेवाएँ देने वाले सर्विस प्रोवाइडर और इंटीग्रेटर
- आउटसोर्सिंग या कॉन्ट्रैक्ट स्टाफ देकर कमाई करने वाली स्टाफिंग कंपनियाँ
- भारत और आसपास के देशों में उत्पाद या सॉफ्टवेयर बेचने वाली केवल बिक्री इकाइयाँ
- प्रोफेशनल सर्विसेज़ कंपनियाँ
एक नज़र में
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| नीति का नाम | उत्तर प्रदेश ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर नीति-2024 |
| अधिसूचना | 7 मई 2025, औद्योगिक विकास अनुभाग-6 [2] |
| प्रभावी तिथि | 07.05.2025 [3] |
| अवधि | प्रभावी तिथि से 5 वर्ष, जब तक पहले संशोधित न हो [1] |
| नोडल एजेंसी | इन्वेस्ट यूपी (Invest UP) [1] |
| श्रेणियाँ | लेवल-1 GCC और एडवांस्ड GCC [4] |
| पूँजीगत सब्सिडी | 25%, अधिकतम ₹10 करोड़ / ₹25 करोड़ प्रति वर्ष [3] |
| ऑपरेशनल सब्सिडी | 20%, 5 वर्ष तक [4] |
| आवेदन | इन्वेस्ट यूपी पोर्टल (निवेश मित्र) या ईमेल [3] |
किसके लिए है
कंपनी, साझेदारी फर्म (LLP सहित), सोसाइटी, ट्रस्ट, सहकारी संस्था या प्रोप्राइटरशिप, कोई भी यूपी में GCC लगाकर पात्र इकाई बन सकती है। जिन इकाइयों में सरकार की हिस्सेदारी 50% या उससे अधिक है, वे पात्र नहीं हैं [1]।
नीति में दो श्रेणियाँ हैं। किसी श्रेणी में आने के लिए पूँजी निवेश या रोज़गार, दोनों में से कोई एक शर्त पूरी करनी होती है [4]:
| श्रेणी | क्षेत्र | न्यूनतम पूँजी निवेश | या न्यूनतम कर्मचारी |
|---|---|---|---|
| लेवल-1 GCC | गौतम बुद्ध नगर व गाजियाबाद | ₹20 करोड़ | 200 |
| लेवल-1 GCC | शेष उत्तर प्रदेश | ₹15 करोड़ | 100 |
| एडवांस्ड GCC | गौतम बुद्ध नगर व गाजियाबाद | ₹75 करोड़ | 500 |
| एडवांस्ड GCC | शेष उत्तर प्रदेश | ₹50 करोड़ | 300 |
यूपी में चल रही इकाई भी विस्तार (Expansion) पर पात्र है, यदि ग्रॉस ब्लॉक में कम से कम 25% या कर्मचारियों में 25% अथवा 100 (जो अधिक हो) की बढ़ोतरी हो [1][3]।
पात्र निवेश अवधि (Eligible Investment Period) लेवल-1 के लिए 3 वर्ष और एडवांस्ड के लिए 5 वर्ष है, या वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने तक, जो भी पहले हो [1]।
क्या-क्या प्रोत्साहन मिलते हैं
ज़मीन और स्टांप ड्यूटी
- फ्रंट-एंड भूमि सब्सिडी (Land Subsidy): राज्य के विकास प्राधिकरणों या सरकारी एजेंसियों से ली गई ज़मीन पर गौतम बुद्ध नगर व गाजियाबाद में 30%, शेष पश्चिमांचल और मध्यांचल में 40%, तथा पूर्वांचल और बुंदेलखंड में 50% का प्रावधान है। किराये या को-वर्किंग स्पेस पर यह लागू नहीं है [3]।
- स्टांप ड्यूटी (Stamp Duty): प्रोजेक्ट के लिए ज़मीन, ऑफिस स्पेस या भवन की खरीद या लीज़ पर 100% छूट या प्रतिपूर्ति। छूट बैंक गारंटी के बदले मिलती है, जबकि प्रतिपूर्ति वाणिज्यिक संचालन शुरू होने के बाद होती है [3]।
पूँजी, ब्याज और संचालन खर्च
| प्रोत्साहन | प्रावधान | सीमा |
|---|---|---|
| पूँजीगत सब्सिडी (Capital Subsidy) | पात्र पूँजी निवेश का 25%, 7 बराबर वार्षिक किस्तों में | ₹10 करोड़ प्रति वर्ष (लेवल-1), ₹25 करोड़ प्रति वर्ष (एडवांस्ड) [3] |
| ब्याज सब्सिडी (Interest Subsidy) | टर्म लोन पर 5% सालाना या वास्तविक ब्याज, जो कम हो, 5 वर्ष तक | ₹1 करोड़ प्रति वर्ष [3] |
| ऑपरेशनल सब्सिडी (Opex Subsidy) | लीज़ किराया, बैंडविड्थ, डेटा सेंटर/क्लाउड और बिजली खर्च का 20%, 5 वर्ष तक | ₹40 करोड़ प्रति वर्ष (लेवल-1), ₹80 करोड़ प्रति वर्ष (एडवांस्ड) [3][4] |
इन्वेस्ट यूपी के नीति पेज पर पूँजीगत सब्सिडी की सीमा ₹10 करोड़ और ₹25 करोड़ लिखी है, जबकि मार्च 2026 में जारी नियमावली में यही राशि प्रति वर्ष की सीमा के रूप में दी गई है [3][4]।
लीज़ किराये की गणना अधिकतम ₹50 प्रति वर्ग फुट (कारपेट एरिया) प्रति माह तक होती है, प्लग-एंड-प्ले और को-वर्किंग स्पेस सहित। क्लाउड/डेटा सेंटर सेवाएँ यूपी GSTIN वाले प्रदाताओं से लेनी होती हैं [1][3]।
वेतन, भर्ती और EPF
पेरोल सब्सिडी (Payroll Subsidy) उन ऑन-रोल कर्मचारियों पर है जिन्होंने कम से कम एक वर्ष लगातार काम किया हो और जिनका वार्षिक नेट वेतन ₹1 लाख से अधिक हो; वेतन की गणना बेसिक और महँगाई भत्ते के आधार पर होती है [3]:
| वर्ष | गौतम बुद्ध नगर व गाजियाबाद | शेष उत्तर प्रदेश |
|---|---|---|
| पहला | 35%, अधिकतम ₹5 लाख प्रति कर्मचारी | 50%, अधिकतम ₹7 लाख |
| दूसरा | 30%, अधिकतम ₹4 लाख | 40%, अधिकतम ₹6 लाख |
| तीसरा | 25%, अधिकतम ₹3 लाख | 30%, अधिकतम ₹5 लाख |
| चौथा | लागू नहीं | 25%, अधिकतम ₹4 लाख |
| इकाई की वार्षिक सीमा | ₹10 करोड़ (लेवल-1), ₹20 करोड़ (एडवांस्ड) | ₹12 करोड़ (लेवल-1), ₹25 करोड़ (एडवांस्ड) |
- भर्ती सब्सिडी (Recruitment Subsidy): यूपी के मूल निवासी ऐसे फ्रेशर पर ₹20,000, जिसकी यह पहली नौकरी हो और जिसने यूपी के किसी संस्थान से स्नातक या परास्नातक किया हो। कर्मचारी का एक वर्ष लगातार काम करना और इकाई का साल में कम से कम 30 ऐसे फ्रेशर रखना ज़रूरी है। सीमा ₹5 करोड़ प्रति इकाई, वाणिज्यिक संचालन से 5 वर्ष तक [3]।
- EPF प्रतिपूर्ति: नियोक्ता के EPF अंशदान की ₹2,000 प्रति कर्मचारी प्रति माह की दर से प्रतिपूर्ति, अधिकतम ₹1 करोड़ प्रति वर्ष, 3 वर्ष तक [3]।
टैलेंट, रिसर्च और पेटेंट
- इंटर्नशिप: इंटर्नशिप के अवसर तैयार करने की लागत का 50%, अधिकतम ₹5,000 प्रति छात्र प्रति माह; साल में अधिकतम 50 इंटर्न, हर इंटर्नशिप कम से कम दो महीने की और कार्यस्थल पर, 3 वर्ष तक [3]।
- कौशल विकास (Skill Development): प्रशिक्षण कार्यक्रम खर्च का 50% या ₹50,000 प्रति कर्मचारी कोर्स फीस; साल में 500 कर्मचारियों तक, अधिकतम ₹50 लाख प्रति वर्ष, 3 वर्ष तक [3]।
- स्टार्टअप सहयोग: आइडिएशन या प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट खर्च का 50%, अधिकतम ₹50 लाख प्रति वर्ष, 5 वर्ष तक [3]।
- पेटेंट (IPR): पेटेंट फाइलिंग फीस की 100% प्रतिपूर्ति, घरेलू पर ₹5 लाख और अंतरराष्ट्रीय पर ₹10 लाख तक; नीति अवधि में दो बार, साल में एक बार [3]।
बड़े प्रोजेक्ट के लिए विशेष पैकेज
कम से कम 1,500 कर्मचारी, ₹250 करोड़ से अधिक पूँजी निवेश (ज़मीन छोड़कर), कम से कम ₹50 करोड़ FDI, या फॉर्च्यून ग्लोबल 500/फॉर्च्यून इंडिया 500 की मूल कंपनी के साथ 1,000 कर्मचारी, इनमें से कोई शर्त पूरी करने वाले GCC के लिए केस-टू-केस विशेष पैकेज का प्रावधान है, जिसे कैबिनेट मंज़ूरी देती है [1][4]।
नीति में 24x7 संचालन (सभी शिफ्ट में महिलाओं सहित) और निरीक्षणों में राहत जैसी गैर-वित्तीय सुविधाओं का भी उल्लेख है [1][3][5]।
आवेदन कैसे करें
- ऑनलाइन आवेदन: इन्वेस्ट यूपी के पोर्टल निवेश मित्र पर तय फॉर्म भरें या ईमेल से आवेदन करें। घोषणाएँ अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता से डिजिटल रूप से सत्यापित हों [3]।
- दस्तावेज़: विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) जिसमें समय-सीमा और पूँजी खर्च का ब्योरा हो, निवेश आशय पत्र और बोर्ड प्रस्ताव, ज़मीन के स्वामित्व या पंजीकृत लीज़ का प्रमाण, PAN, GST, CIN और EPF पंजीकरण, पिछले तीन वर्षों के ऑडिटेड वित्तीय विवरण (जहाँ लागू हो), तथा नियमावली के अनुलग्नक प्रारूप 1 से 5 [3]।
- प्रारंभिक जाँच: TSG आवेदन की नीति से अनुरूपता जाँचता है और जाँच पूरी होने के 30 दिन के भीतर इन्वेस्ट यूपी के CEO की ओर से एक्नॉलेजमेंट सर्टिफिकेट जारी होता है [3]।
- विस्तृत मूल्यांकन: इन्वेस्ट यूपी की पॉलिसी इम्प्लीमेंटेशन यूनिट (PIU) पात्रता जाँचती है, फिर इवैल्यूएशन कमेटी संस्तुति के साथ फ़ाइल आगे भेजती है [3]।
- मंज़ूरी: लेवल-1 इकाइयों के लिए एम्पावर्ड कमेटी और फिर उद्योग विभाग के मंत्री; एडवांस्ड और केस-टू-केस इकाइयों के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली हाई-लेवल एम्पावर्ड कमेटी और फिर कैबिनेट [3]।
- दावा और भुगतान: वितरण सालाना होता है; निवेश और खर्च के आँकड़े CA से प्रमाणित कराने होते हैं, जिनका सत्यापन इन्वेस्ट यूपी के पैनल वाले CA करते हैं [3]।
नीति और नियमावली के दस्तावेज़ इन्वेस्ट यूपी के GCC नीति पेज पर उपलब्ध हैं; हेल्पडेस्क नंबर +91 522 6923000 है [4]।
ध्यान रखने वाली बातें
- पात्र पूँजी निवेश की गणना: 07.05.2025 के बाद किया गया निवेश ही गिना जाता है। अगर निवेश इससे पहले शुरू हुआ हो, तो कम से कम 80% निवेश इस तारीख के बाद होना चाहिए। भूमि सब्सिडी लेने पर ज़मीन की लागत और किराये/को-वर्किंग स्पेस में चलने पर ज़मीन-भवन की लागत पूँजी निवेश में नहीं जुड़ती [3]।
- समय-सीमा: पात्र निवेश अवधि के भीतर वाणिज्यिक संचालन शुरू करना ज़रूरी है [3]।
- रिकॉर्ड व्यवस्थित रखें: किराये की रसीदें, यूपी GSTIN वाले बिल, वेतन और डोमिसाइल प्रमाण तथा EPF चालान दावे के समय माँगे जाते हैं। तिमाही रोज़गार रिपोर्ट और सालाना ऑडिटेड वित्तीय विवरण भी देने होते हैं [3]।
- एक नीति, एक पैकेज: इस नीति के प्रोत्साहन लेने वाली इकाई राज्य की किसी अन्य नीति के प्रोत्साहन नहीं ले सकती, पर भारत सरकार की योजनाओं के लाभ साथ में लिए जा सकते हैं [1][3]।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या कोई आईटी सर्विस कंपनी इस नीति का लाभ ले सकती है?
अगर वह दूसरे क्लाइंट्स के लिए सेवाएँ देती है, तो नहीं। नीति केवल उन कैप्टिव सेंटर्स के लिए है जो पूरी तरह मूल कंपनी के स्वामित्व में हों और उसी को सेवाएँ दें [1]।
क्या किराये या को-वर्किंग स्पेस में GCC खोलने पर भी लाभ है?
हाँ, ऑपरेशनल सब्सिडी में लीज़ किराये पर 20% प्रतिपूर्ति का प्रावधान है। भूमि सब्सिडी ऐसे स्पेस पर लागू नहीं होती [3]।
नोएडा-गाजियाबाद और बाकी यूपी में क्या फ़र्क़ है?
गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद में श्रेणी की निवेश और रोज़गार सीमा ऊँची है, जबकि शेष प्रदेश में भूमि सब्सिडी 40–50% है और पेरोल सब्सिडी चार वर्ष तक ऊँची दरों पर है [3][4]।
प्रोत्साहन का भुगतान कब होता है?
वितरण सालाना होता है। पूँजीगत सब्सिडी वाणिज्यिक संचालन शुरू होने के बाद 7 वार्षिक किस्तों में दी जाती है [3]।
स्रोत
- [1] Uttar Pradesh Global Capability Centres Policy 2024 (अंग्रेज़ी पाठ, "Draft" अंकित) — Invest UP, 05.06.2025
- [2] उत्तर प्रदेश ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर नीति-2024 अधिसूचना, संख्या-38/2025/935/77-6-2025/01 (जी0सी0सी0)/2024 — औद्योगिक विकास अनुभाग-6, उत्तर प्रदेश शासन, 07.05.2025
- [3] Rules-2025 for the Implementation of UP GCC Policy 2024 (SOP) — Invest UP, 14.03.2026
- [4] UP GCC Policy, 2024 — Invest UP, देखा गया 20.10.2026
- [5] Unlocking Uttar Pradesh's Potential: Global Capability Centres — Invest UP, जून 2025
- [6] UP Cabinet Clears GCC Rules-2025 — Free Press Journal, 06.01.2026
यह गाइड आधिकारिक दस्तावेज़ों के आधार पर तैयार की गई है; हर तथ्य का स्रोत लेख के अंत में दिया गया है। नीतियाँ समय-समय पर बदलती हैं, इसलिए आवेदन से पहले नवीनतम आधिकारिक अधिसूचना ज़रूर देखें। किसी त्रुटि की सूचना [email protected] पर "सुधार" विषय के साथ दें।