यूपी औद्योगिक निवेश एवं रोज़गार प्रोत्साहन नीति 2022: सब्सिडी, श्रेणियाँ और LoC
उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोज़गार प्रोत्साहन नीति 2022 ₹50 करोड़ से अधिक पूँजी निवेश वाली औद्योगिक परियोजनाओं के लिए राज्य की मुख्य प्रोत्साहन नीति है, जो 4 नवंबर 2022 से प्रभावी है। इसमें निवेशक पूँजीगत सब्सिडी, नेट SGST प्रतिपूर्ति और PLI टॉप-अप में से एक विकल्प चुनते हैं, और आवेदन निवेश मित्र पोर्टल के ज़रिए OIMS पर होता है।

- नीति 4 नवंबर 2022 से प्रभावी, अवधि 5 वर्ष (जब तक संशोधित या निरस्त न हो)
- चार श्रेणियाँ: लार्ज (₹50–200 करोड़), मेगा, सुपर मेगा और अल्ट्रा मेगा (₹3,000 करोड़ या अधिक)
- तीन में से एक विकल्प: पूँजीगत सब्सिडी (ECI का 10% से 30%), 100% नेट SGST प्रतिपूर्ति या PLI पर 30% टॉप-अप
- बुंदेलखंड और पूर्वांचल में सबसे ऊँची दरें और 100% स्टांप शुल्क छूट
- आवेदन निवेश मित्र के ज़रिए OIMS पर; प्रक्रिया का पहला चरण लेटर ऑफ कम्फर्ट (LoC) है, जो वाणिज्यिक संचालन से पहले का चरण है
उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोज़गार प्रोत्साहन नीति 2022 (Industrial Investment & Employment Promotion Policy, IIEPP-2022) बड़े औद्योगिक निवेश के लिए राज्य की मुख्य "अम्ब्रेला" नीति है। इसमें प्रोत्साहन की राशि दो बातों से तय होती है: परियोजना कितनी बड़ी है और किस क्षेत्र में लग रही है। सबसे ज़रूरी बात यह है कि प्रोत्साहन की प्रक्रिया लेटर ऑफ कम्फर्ट (Letter of Comfort, LoC) से शुरू होती है, जिसे इन्वेस्ट यूपी वाणिज्यिक संचालन से पहले का चरण बताता है, और LoC की स्वीकृति नीति की अवधि के भीतर होनी ज़रूरी है [2][4]।
एक नज़र में
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| प्रभावी तिथि | 4 नवंबर 2022 [2] |
| अवधि | प्रभावी तिथि से 5 वर्ष (3 नवंबर 2027 तक), जब तक नीति संशोधित या निरस्त न हो [1][2] |
| किसके लिए | ₹50 करोड़ से अधिक पूँजी निवेश वाली नई, विस्तार (Expansion) या विविधीकरण (Diversification) परियोजनाएँ [1] |
| निवेश श्रेणियाँ | लार्ज, मेगा, सुपर मेगा, अल्ट्रा मेगा [1] |
| प्रोत्साहन विकल्प | पूँजीगत सब्सिडी, नेट SGST प्रतिपूर्ति, PLI टॉप-अप (तीनों में से एक) [1] |
| स्टांप शुल्क छूट | 50% से 100%, क्षेत्र के अनुसार [1][3] |
| नोडल एजेंसी | इन्वेस्ट यूपी (Invest UP) [2][3] |
| आवेदन | निवेश मित्र पोर्टल से OIMS (Online Incentive Management System) पर [4][5] |
| हेल्पडेस्क | +91 522 6923000 (सोमवार–शनिवार, सुबह 9:30 से शाम 6:00) [3] |
किसके लिए है
नीति उन औद्योगिक इकाइयों के लिए है जिनका पूँजी निवेश ₹50 करोड़ से अधिक है। इससे छोटी इकाइयों (MSME) को राज्य की MSME नीति के तहत प्रोत्साहन दिए जाते हैं [1]। निवेश के आधार पर चार श्रेणियाँ बनाई गई हैं, और हर श्रेणी के लिए "पात्र निवेश अवधि" (Eligible Investment Period) तय है, जिसके भीतर किया गया निवेश ही गिना जाता है [2]:
| श्रेणी | पूँजी निवेश | पात्र निवेश अवधि |
|---|---|---|
| लार्ज (Large) | ₹50 करोड़ से अधिक, ₹200 करोड़ से कम | 4 वर्ष |
| मेगा (Mega) | ₹200 करोड़ से ₹500 करोड़ से कम | 5 वर्ष |
| सुपर मेगा (Super Mega) | ₹500 करोड़ से ₹3,000 करोड़ से कम | 7 वर्ष |
| अल्ट्रा मेगा (Ultra Mega) | ₹3,000 करोड़ या अधिक | 9 वर्ष |
विस्तार परियोजना वह मानी जाती है जिसमें मौजूदा इकाई नए पूँजी निवेश से अपना ग्रॉस ब्लॉक कम से कम 25% बढ़ाए। विविधीकरण में इकाई को बिलकुल अलग उत्पाद बनाना होता है, केवल मौजूदा उत्पाद का नया रूप नहीं [1]। विस्तार या विविधीकरण में केवल अतिरिक्त (Incremental) निवेश और टर्नओवर पर ही लाभ की गणना होती है [1]।
क्षेत्रीय अंतर: कहाँ कितना लाभ
नीति राज्य को प्रोत्साहन के लिहाज़ से तीन स्तरों में बाँटती है। बुंदेलखंड और पूर्वांचल में दरें सबसे ऊँची हैं, फिर मध्यांचल और पश्चिमांचल (गौतम बुद्ध नगर और ग़ाज़ियाबाद को छोड़कर), और तीसरे स्तर पर गौतम बुद्ध नगर व ग़ाज़ियाबाद [1]। यही क्रम स्टांप शुल्क छूट में भी है [1][3]:
| क्षेत्र | स्टांप शुल्क छूट |
|---|---|
| बुंदेलखंड और पूर्वांचल | 100% |
| मध्यांचल और पश्चिमांचल (गौतम बुद्ध नगर व ग़ाज़ियाबाद छोड़कर) | 75% |
| गौतम बुद्ध नगर और ग़ाज़ियाबाद | 50% |
स्टांप शुल्क छूट की प्रक्रिया अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग अलग से अधिसूचित करता है [2]।
क्या-क्या प्रोत्साहन मिलते हैं
निवेश प्रोत्साहन सब्सिडी (Investment Promotion Subsidy) के तीन विकल्प हैं, जो एक-दूसरे के साथ नहीं जुड़ते। निवेशक को इनमें से एक चुनना होता है। LoC की स्वीकृति से पहले विकल्प बदलने का एक अतिरिक्त मौक़ा मिलता है [1][2]।
विकल्प 1: पूँजीगत सब्सिडी (Capital Subsidy)
यह पात्र पूँजी निवेश (Eligible Capital Investment, ECI) के प्रतिशत के रूप में तय है और सालाना किस्तों में दी जाती है [2]:
| श्रेणी | गौ.बु. नगर व ग़ाज़ियाबाद | मध्यांचल व पश्चिमांचल | बुंदेलखंड व पूर्वांचल | किस्तें | वार्षिक सीमा |
|---|---|---|---|---|---|
| लार्ज | 10% | 12% | 15% | 10 वर्ष | ₹5 करोड़ |
| मेगा | 18% | 20% | 22% | 12 वर्ष | ₹10 करोड़ (बूस्टर सहित ₹15 करोड़) |
| सुपर मेगा | 20% | 22% | 25% | 15 वर्ष | ₹50 करोड़ (बूस्टर सहित ₹75 करोड़) |
| अल्ट्रा मेगा | 22% | 25% | 30% | 20 वर्ष | ₹150 करोड़ (बूस्टर सहित ₹210 करोड़) |
सालाना राशि क्षमता उपयोग (Capacity Utilisation) से जुड़ी है। पहले वर्ष 40% और बाद के वर्षों में 75% क्षमता उपयोग पर पूरी किस्त का प्रावधान है। इससे कम उपयोग पर किस्त उसी अनुपात में घटती है, और 10% या उससे कम उपयोग पर उस वर्ष किस्त नहीं बनती [2]।
मेगा और उससे बड़ी परियोजनाओं के लिए तीन "बूस्टर" हैं, हर एक ECI का 2%, 3% या 4% [2]:
- रोज़गार बूस्टर: न्यूनतम रोज़गार (मेगा 300, सुपर मेगा 600, अल्ट्रा मेगा 1,500) पूरा करने पर 2%, इसके दोगुने पर 3% और तिगुने पर 4%। न्यूनतम रोज़गार संख्या के कम से कम 75% के बराबर महिला कर्मचारी रखने वाली इकाइयाँ भी इन स्तरों के लिए पात्र हैं।
- निर्यात बूस्टर: वास्तविक उत्पादन का कम से कम 25%, 50% या 75% निर्यात करने पर।
- इकोसिस्टम बूस्टर: कच्चे माल और अन्य इनपुट की कुल ख़रीद का कम से कम 40%, 60% या 75% हिस्सा उत्तर प्रदेश के निर्माताओं से लेने पर।
विकल्प 2: नेट SGST प्रतिपूर्ति (Net SGST Reimbursement)
इसमें राज्य के खाते में जमा नेट SGST की 100% प्रतिपूर्ति का प्रावधान है, तय अवधि और ECI से जुड़ी सीमाओं के भीतर [2]। दावा तिमाही आधार पर किया जाता है [2]।
| श्रेणी | अवधि | गौ.बु. नगर व ग़ाज़ियाबाद (वार्षिक / कुल सीमा) | मध्यांचल व पश्चिमांचल | बुंदेलखंड व पूर्वांचल |
|---|---|---|---|---|
| लार्ज | 6 वर्ष | 16% / 80% | 18% / 90% | 20% / 100% |
| मेगा | 12 वर्ष | 7% / 80% | 17% / 200% | 25% / 300% |
| सुपर मेगा | 14 वर्ष | 6% / 80% | 14% / 200% | 21% / 300% |
| अल्ट्रा मेगा | 16 वर्ष | 5% / 80% | 13% / 200% | 19% / 300% |
(सभी सीमाएँ ECI के प्रतिशत में)
विकल्प 3: PLI टॉप-अप
केंद्र सरकार की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (PLI) के तहत मिलने वाले प्रोत्साहन पर राज्य की ओर से 30% टॉप-अप का प्रावधान है। इसका दावा केंद्र से PLI राशि मिलने के बाद किया जाता है। केंद्र और राज्य की कुल सब्सिडी ECI के 100% तक सीमित है [2]।
अन्य प्रावधान
- अनुसंधान एवं विकास (R&D): स्टैंडअलोन R&D इकाइयों (न्यूनतम ₹20 करोड़ की परियोजना) को ख़र्च का 25% (अधिकतम ₹10 करोड़), और इन-हाउस R&D से जुड़े पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क व GI पंजीकरण ख़र्च का 50% (अधिकतम ₹1 करोड़) [2][3]।
- फ़ास्ट-ट्रैक भूमि आवंटन: सुपर मेगा और उससे बड़ी परियोजनाएँ, कुछ शर्तें पूरी करने वाली मेगा परियोजनाएँ और बहुमत सरकारी हिस्सेदारी वाले लार्ज या उससे बड़े औद्योगिक उपक्रम इसके लिए पात्र हैं [3]।
- केस-टू-केस पैकेज: विशेष महत्व की परियोजनाओं के लिए अनुकूलित पैकेज का प्रावधान है, जिन परियोजना प्रकारों को कैबिनेट मंज़ूरी देती है [3]।
फ्रंट-एंड लैंड सब्सिडी के बारे में
IIEPP-2022 के तीन विकल्पों में फ्रंट-एंड लैंड सब्सिडी (Front-end Land Subsidy) शामिल नहीं है [1][2]। भूमि पर फ्रंट-एंड सब्सिडी का प्रावधान अलग नीति, "उत्तर प्रदेश FDI, FCI, फॉर्च्यून ग्लोबल-500 और फॉर्च्यून इंडिया-500 निवेश प्रोत्साहन नीति 2023" में है, जो ₹100 करोड़ से अधिक पूँजी निवेश वाली पात्र परियोजनाओं के लिए है [7]। राज्य की दो नीतियों के प्रोत्साहन एक साथ नहीं लिए जा सकते, इसलिए अपनी परियोजना के लिए उपयुक्त नीति पहले चुन लेना बेहतर है [2][7]।
आवेदन कैसे करें
- निवेश मित्र पोर्टल पर उद्यमी (Entrepreneur) के रूप में लॉग-इन करें। यहीं से OIMS पर आवेदन फ़ॉर्म खुलता है [4][5][8]।
- OIMS पर LoC के लिए आवेदन करें; इन्वेस्ट यूपी इसे वाणिज्यिक संचालन से पहले की प्रक्रिया बताता है। इसके साथ चार्टर्ड अकाउंटेंट से प्रमाणित DPR, निवेश का ब्योरा, वित्त के स्रोत, स्व-घोषणा, कंपनी के दस्तावेज़ और निदेशकों का KYC लगता है [2][5]।
- आवेदन की समीक्षा के बाद पावती प्रमाणपत्र (Acknowledgement Certificate) जारी होता है। इसके बाद आवेदन मूल्यांकन समिति के पास जाता है [4]।
- लार्ज परियोजनाओं में संस्तुति अधिकृत समिति (Empowered Committee) करती है और स्वीकृति उद्योग मंत्री देते हैं। मेगा और बड़ी परियोजनाओं में संस्तुति मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय अधिकृत समिति (HLEC) करती है और स्वीकृति कैबिनेट देती है [2]।
- स्वीकृति के बाद LoC जारी होता है [4]।
- वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने की तारीख़ (DCCO) से 90 दिन के भीतर OIMS पर पूँजी घोषणा (Capital Declaration, Part-A) करें। पैनल में शामिल CA/CMA/CE सत्यापन करते हैं, फिर मूल्यांकन समिति की समीक्षा के बाद ECI को मंज़ूरी मिलती है [4]।
- इसके बाद पूँजीगत सब्सिडी या SGST का दावा (Part-B) करें। स्वीकृति के बाद राशि इन्वेस्ट यूपी के खाते से जारी होती है [4]।
इन्वेस्ट यूपी के "How to Apply" पेज पर आवेदन की हैंडबुक, चेकलिस्ट और प्रोत्साहन कैलकुलेटर उपलब्ध हैं। तकनीकी सहायता के लिए हेल्पलाइन +91-95197 06186 और +91-95197 06187 है [4]।
ध्यान रखने वाली बातें
- पात्र पूँजी निवेश में भूमि और भवन को मिलाकर कुल पूँजी निवेश के अधिकतम 30% तक ही गिना जाता है। पट्टे की भूमि पर पट्टा प्रोत्साहन अवधि के बाद कम से कम 3 साल और बचा होना चाहिए [2]।
- चरणबद्ध परियोजनाओं में आवेदन पहले चरण का वाणिज्यिक संचालन शुरू होने से पहले करना होता है [2]।
- LoC मिलने के 6 महीने के भीतर किसी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक को छोड़कर) या पात्र वित्तीय संस्था का तैयार किया अप्रेज़ल नोट जमा करना होता है [2]।
- हर वित्त वर्ष ख़त्म होने के 6 महीने के भीतर इकाई का ऑडिटेड लेखा-विवरण और बैलेंस शीट जमा करना ज़रूरी है [2]।
- केंद्र सरकार की योजनाओं के प्रोत्साहन इस नीति के साथ लिए जा सकते हैं [2]।
इन्वेस्ट यूपी की फ़रवरी 2026 की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, IIEPP-2022 के तहत तब तक ₹1.11 लाख करोड़ के 85 प्रस्ताव स्वीकृत हो चुके थे [6]।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या ₹50 करोड़ से कम निवेश वाली इकाई इस नीति में आवेदन कर सकती है?
नहीं, यह नीति ₹50 करोड़ से अधिक निवेश वाली परियोजनाओं के लिए है। छोटी इकाइयों के लिए राज्य की MSME नीति में प्रोत्साहन का प्रावधान है [1]।
क्या पूँजीगत सब्सिडी और SGST प्रतिपूर्ति दोनों साथ मिल सकती हैं?
नहीं। तीनों विकल्प एक-दूसरे के साथ नहीं जुड़ते और एक ही चुनना होता है। LoC की स्वीकृति से पहले विकल्प बदलने का एक मौक़ा मिलता है [1][2]।
LoC का आवेदन कब करना चाहिए?
इन्वेस्ट यूपी LoC को वाणिज्यिक संचालन से पहले की प्रक्रिया बताता है, और चरणबद्ध परियोजनाओं में आवेदन पहले चरण का वाणिज्यिक संचालन शुरू होने से पहले करना होता है। पूँजी घोषणा और सब्सिडी दावा, दोनों LoC जारी होने के बाद ही OIMS पर किए जाते हैं [2][4]।
नीति कब तक लागू है?
नीति 4 नवंबर 2022 से 5 वर्ष के लिए प्रभावी है, जब तक इसे संशोधित या निरस्त न किया जाए। LoC की स्वीकृति इसी अवधि के भीतर होनी ज़रूरी है [2]।
स्रोत
- [1] Uttar Pradesh Industrial Investment & Employment Promotion Policy 2022 — Invest UP, 2022
- [2] Guidelines and Implementation Procedures for Fiscal Incentives under IIEPP-2022 — Invest UP, 14 अप्रैल 2023
- [3] Uttar Pradesh Industrial Investment & Employment Promotion Policy 2022 (नीति पेज) — Invest UP, अद्यतन 27 मई 2026
- [4] How to Apply — Invest UP, अद्यतन 29 मई 2026
- [5] Handbook: OIMS User Guide — Invest UP, मई 2026
- [6] Press Release on Letters of Comfort — Invest UP, फ़रवरी 2026
- [7] UP FDI, FCI, Fortune Global-500 & Fortune India-500 Investment Promotion Policy 2023 — Invest UP, नवंबर 2023
- [8] निवेश मित्र — उत्तर प्रदेश सरकार का सिंगल विंडो पोर्टल
यह गाइड आधिकारिक दस्तावेज़ों के आधार पर तैयार की गई है; हर तथ्य का स्रोत लेख के अंत में दिया गया है। नीतियाँ समय-समय पर बदलती हैं, इसलिए आवेदन से पहले नवीनतम आधिकारिक अधिसूचना ज़रूर देखें। किसी त्रुटि की सूचना [email protected] पर "सुधार" विषय के साथ दें।