उत्तर प्रदेश सेमीकंडक्टर नीति 2024: पात्रता, सब्सिडी, ज़मीन-बिजली छूट और आवेदन
उत्तर प्रदेश सेमीकंडक्टर नीति 2024 उन चिप फैब, डिस्प्ले फैब और ATMP/OSAT परियोजनाओं के लिए है जो केंद्र के इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) की योजनाओं में चुनी गई हैं। इसमें केंद्र की मंज़ूर पूँजीगत सहायता का 50% अतिरिक्त, ज़मीन पर छूट, बिजली शुल्क में छूट और कौशल विकास सहायता जैसे प्रावधान हैं।

- नीति 19 जनवरी 2024 को अधिसूचित हुई और 18 जनवरी 2029 तक, यानी पाँच साल के लिए लागू है
- ISM में चुनी गई परियोजना को केंद्र की मंज़ूर पूँजीगत सब्सिडी का 50% राज्य की ओर से अतिरिक्त देने का प्रावधान
- कंपाउंड सेमीकंडक्टर, सेंसर फैब और ATMP/OSAT इकाइयों को राज्य एजेंसियों से ली गई पहली 200 एकड़ ज़मीन पर 75% छूट
- 10 साल तक बिजली शुल्क (Electricity Duty) में 100% छूट और ज़मीन पर स्टांप ड्यूटी में 100% छूट
- आवेदन निवेश मित्र पोर्टल से; नोडल एजेंसी यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPLC)
उत्तर प्रदेश सेमीकंडक्टर नीति 2024 राज्य में चिप बनाने, डिस्प्ले बनाने और चिप की असेंबली-टेस्टिंग-पैकेजिंग करने वाली बड़ी इकाइयों को आकर्षित करने के लिए बनाई गई है [1]। इसकी सबसे अहम बात यह है कि यह केंद्र सरकार के इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के साथ जुड़कर चलती है: जो परियोजना ISM की योजना में चुनी जाती है, उसे केंद्र की मंज़ूर पूँजीगत सहायता के ऊपर राज्य की ओर से 50% अतिरिक्त सहायता का प्रावधान है [1][2]।
एक नज़र में
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| नीति का नाम | उत्तर प्रदेश सेमीकंडक्टर नीति 2024 (UP Semiconductor Policy 2024) [1] |
| अधिसूचना | शासनादेश संख्या 142/78-1-2024-14/2024, दिनांक 19 जनवरी 2024 [1] |
| अवधि | 19 जनवरी 2024 से 18 जनवरी 2029 तक (पाँच साल) [4] |
| विभाग | आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग, उत्तर प्रदेश [1] |
| नोडल एजेंसी | यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPLC) [1][4] |
| मुख्य लाभ | केंद्र की मंज़ूर पूँजीगत सब्सिडी का 50% अतिरिक्त [1] |
| कुल सीमा | केंद्र और राज्य समेत सभी स्रोतों से मिले प्रोत्साहन पात्र परियोजना लागत के 100% से ज़्यादा नहीं [1] |
| आवेदन | निवेश मित्र पोर्टल (niveshmitra.up.nic.in) [3][4] |
| प्रस्तावित निवेश | UPLC के अनुसार 5 आवेदनों में ₹32,652 करोड़ का प्रस्तावित निवेश [3] |
नीति का ताज़ा स्टेटस
28 फ़रवरी 2024 को प्रोत्साहनों के क्रियान्वयन के दिशानिर्देश जारी हुए [4]। 5 जून 2026 की ख़बरों के अनुसार राज्य मंत्रिपरिषद ने नीति में संशोधनों को मंज़ूरी दी है, जिनका उद्देश्य इसे और निवेशक-अनुकूल बनाना और ISM से बेहतर तालमेल बताया गया है [8]। संशोधित प्रावधानों के आधिकारिक पाठ के लिए UPLC के नीति पेज पर नवीनतम शासनादेश देखें [3]। इस गाइड के आँकड़े मूल नीति दस्तावेज़ और शासनादेशों पर आधारित हैं।
किसके लिए है
यह नीति उन्हीं परियोजनाओं के लिए है जो इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन की इन योजनाओं में चुनी गई हों [1]:
- सेमीकंडक्टर फैब (Semiconductor Fab) लगाने की योजना
- डिस्प्ले फैब (Display Fab) लगाने की योजना
- कंपाउंड सेमीकंडक्टर / सिलिकॉन फोटोनिक्स / सेंसर फैब और चिप असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग व पैकेजिंग (ATMP/OSAT) इकाइयों की योजना
- भारत सरकार की ऐसी कोई अन्य मिलती-जुलती योजना जो संशोधित या प्रस्तावित की जाए
कुछ अहम शर्तें:
- आवेदक भारत में पंजीकृत विधिक इकाई (Legal Entity) होना चाहिए [4]।
- डिज़ाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) वाली या केवल चिप डिज़ाइन (Fabless) से जुड़ी परियोजनाएँ इस नीति में पात्र नहीं हैं; ऐसी परियोजनाएँ यूपी आईटी/आईटीईएस नीति 2022 के तहत आवेदन कर सकती हैं [1]।
- कंपनी को पूरी परियोजना का वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने के बाद कम से कम तीन साल तक उत्पादन जारी रखने का वचन-पत्र (Undertaking) देना होता है [1][4]।
- नीति के तहत निवेश अधिसूचना की तारीख से गिना जाता है [1]।
पात्र लागत: फैब और डिस्प्ले फैब में ज़मीन, भवन, प्लांट-मशीनरी, R&D और तकनीक हस्तांतरण जैसे खर्च गिने जाते हैं; कंपाउंड सेमीकंडक्टर और ATMP/OSAT में ज़मीन का खर्च नहीं गिना जाता [1]। वर्किंग कैपिटल, रॉयल्टी, प्रारंभिक व प्री-ऑपरेटिव खर्च और पुरानी प्लांट-मशीनरी पात्र लागत में नहीं आते [4]।
केंद्र की ISM योजना से कैसे जुड़ती है
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत सेमीकंडक्टर फैब और डिस्प्ले फैब को परियोजना लागत के 50% तक की वित्तीय सहायता पैरी-पासू (Pari-passu) आधार पर, और कंपाउंड सेमीकंडक्टर व ATMP/OSAT इकाइयों को पूँजीगत खर्च के 50% की सहायता का प्रावधान है [6]। राज्य नीति इसी केंद्रीय मंज़ूरी पर टिकी है:
- राज्य की पूँजीगत सब्सिडी केंद्र की मंज़ूर पूँजीगत सब्सिडी का 50% है; यानी केंद्र ने ₹100 करोड़ मंज़ूर किए तो राज्य नीति में ₹50 करोड़ अतिरिक्त का प्रावधान बनता है [1]।
- यह राशि केंद्र की किस्तों के साथ-साथ (पैरी-पासू) और केंद्र की किस्त जारी होने के बाद ही दी जाती है [1][4]।
- राज्य का लेटर ऑफ़ कम्फर्ट (LoC) तभी प्रभावी होता है जब भारत सरकार परियोजना को मंज़ूरी दे दे [1]।
- जिन परियोजनाओं का पूँजीगत खर्च पहले से केंद्र की संशोधित (Modified) योजनाओं की परियोजना लागत में गिना जा चुका है, उन्हें इस नीति में केवल पूँजीगत सब्सिडी मिलेगी, बाकी लाभ नहीं [1]।
केंद्र ने 15 जुलाई 2026 को ₹1,27,500 करोड़ के कुल बजट वाले सेमीकॉन 2.0 को मंज़ूरी दी है, जिसमें डिज़ाइन, उपकरण-सामग्री, नए फैब, ATMP/OSAT, R&D और प्रतिभा विकास छह मुख्य स्तंभ हैं [7]। राज्य नीति में भारत सरकार की नई या संशोधित मिलती-जुलती योजनाओं को भी शामिल करने का प्रावधान है [1]।
क्या-क्या प्रोत्साहन मिलते हैं
वित्तीय प्रोत्साहन
| प्रोत्साहन | प्रावधान |
|---|---|
| पूँजीगत सब्सिडी (Capital Subsidy) | केंद्र की मंज़ूर पूँजीगत सब्सिडी का 50% [1] |
| ब्याज सब्सिडी (Interest Subsidy) | ₹200 करोड़ तक निवेश वाली इकाइयों को बैंक ऋण पर 5% सालाना, अधिकतम ₹1 करोड़ प्रति वर्ष, 7 साल तक (कुल ₹7 करोड़) [1] |
| स्टांप ड्यूटी व रजिस्ट्रेशन शुल्क | ज़मीन की ख़रीद या लीज़ पर 100% छूट [1][2] |
| बिजली शुल्क (Electricity Duty) | 10 साल तक 100% छूट [1] |
| ट्रांसमिशन व व्हीलिंग शुल्क | राज्य के भीतर बिजली ख़रीद पर, परियोजना की कमीशनिंग से 25 साल तक 50% छूट [1] |
| स्टैंडअलोन R&D सेंटर | स्थापना लागत का 25%, अधिकतम ₹10 करोड़ (न्यूनतम ₹20 करोड़ निवेश; CSIR/DSIR/STPI से मान्यता ज़रूरी) [1] |
| सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस (CoE) | परियोजना लागत का 50% तक, अधिकतम ₹10 करोड़; R&D सेंटर या CoE में से एक ही [1] |
| पेटेंट शुल्क | 75% प्रतिपूर्ति, घरेलू पर अधिकतम ₹10 लाख, अंतरराष्ट्रीय पर ₹20 लाख [1] |
| कर्मचारी आवास | इकाई से 10 किमी के भीतर आवास/डॉरमेट्री लागत का 10% या ₹10 करोड़, जो कम हो; 7 बराबर सालाना किस्तों में [1] |
कौशल और प्रतिभा
- फैकल्टी ट्रेनिंग, तकनीकी वर्कशॉप और जागरूकता कार्यक्रमों के लिए 5 साल तक ₹60 लाख प्रति वर्ष (कुल ₹3 करोड़) [1]।
- B.Tech और M.Tech के हर साल 500 तक छात्रों को 5 साल तक इंटर्नशिप, प्रति छात्र ₹20,000 की सहायता [1]।
- कुशल प्रतिभा की भर्ती के लिए 12 महीने की एकमुश्त सहायता, अधिकतम ₹1 करोड़ प्रति इकाई [1]।
ज़मीन और बिजली
ज़मीन: कंपाउंड सेमीकंडक्टर, सिलिकॉन फोटोनिक्स, सेंसर फैब और ATMP/OSAT इकाइयों के लिए राज्य की एजेंसियों से ज़मीन ख़रीदने पर पहले 200 एकड़ पर प्रचलित सेक्टर दर का 75% और अतिरिक्त ज़मीन (इकाई या सहायक इकाइयों के लिए) पर 30% छूट का प्रावधान है [1][5]। Invest UP के अनुसार जेवर एयरपोर्ट (YEIDA क्षेत्र) के पास सेमीकंडक्टर उत्पादन के लिए 1,000 एकड़ ज़मीन चिह्नित की गई है [5]।
बिजली: राज्य में लगने वाली फैब इकाइयों को दोहरा पावर ग्रिड (Dual Grid) देने का प्रावधान है। दोनों में से कम लागत वाले ग्रिड का ख़र्च राज्य सरकार वहन करेगी और दूसरे का निवेशक [1]। ओपन एक्सेस बिजली ख़रीद और नवीकरणीय ऊर्जा की पावर बैंकिंग, राज्य विद्युत नियामक आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार उपलब्ध है [1]।
अन्य सुविधाएँ: उद्योग को आवश्यक सेवा (ESMA) में रखा गया है; पानी की आपूर्ति, 24x7 तीन शिफ़्ट में काम और कुछ श्रम कानूनों में स्व-प्रमाणन का प्रावधान है [1]।
आवेदन कैसे करें
- ISM में आवेदन करते समय ही राज्य नीति के तहत भी आवेदन करें; नीति में दोनों आवेदन साथ-साथ करने की बात कही गई है [1]।
- निवेश मित्र पोर्टल पर पंजीकरण करें, एंटरप्रेन्योर डैशबोर्ड में कॉमन एप्लीकेशन फ़ॉर्म भरें और LoC के लिए यह नीति चुनें [1][3]।
- आरंभिक निवेश प्रस्ताव (Initial Investment Proposal) के साथ विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR), वित्तीय क्लोज़र के दस्तावेज़ और तीन साल उत्पादन जारी रखने का वचन-पत्र जमा करें [4]।
- नोडल एजेंसी UPLC आवेदन की जाँच करती है और ज़रूरत हो तो अतिरिक्त जानकारी माँगती है [4]।
- प्रमुख सचिव/अपर मुख्य सचिव, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स की अध्यक्षता वाली पॉलिसी इम्प्लीमेंटेशन यूनिट प्रस्ताव की समीक्षा कर मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली इम्पावर्ड कमेटी को भेजती है [1][4]।
- इम्पावर्ड कमेटी की सिफ़ारिश पर मंत्रिपरिषद अंतिम मंज़ूरी देती है [1][4]। इसके बाद नोडल एजेंसी UPLC लेटर ऑफ़ कम्फर्ट जारी करती है [4]।
- प्रोत्साहन के दावे ऑनलाइन पोर्टल पर जमा होते हैं, जिनमें खर्च का सत्यापन CAG के पैनल में शामिल चार्टर्ड अकाउंटेंट या पैनल में शामिल मूल्यांकनकर्ता (Valuer) से कराया जाता है [4]।
ध्यान रखने वाली बातें
- पूँजीगत सब्सिडी, ज़मीन छूट और स्टांप ड्यूटी छूट को छोड़कर बाकी वित्तीय प्रोत्साहन वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने पर देय होते हैं [1]।
- यह नीति राज्य की किसी अन्य नीति के साथ नहीं जोड़ी जा सकती, लेकिन केंद्र की योजनाओं के साथ जोड़ी जा सकती है, बशर्ते कुल प्रोत्साहन 100% की सीमा में रहें [1]।
- 12.5 एकड़ से ज़्यादा ज़मीन ख़रीदने के लिए राजस्व परिषद से धारा 89 के तहत अनुमति लेनी होती है, जिसकी तय समय-सीमा 60 दिन है [5]।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या चिप डिज़ाइन स्टार्टअप इस नीति में आवेदन कर सकते हैं?
नहीं। DLI या फैबलेस (केवल डिज़ाइन) परियोजनाएँ इस नीति में पात्र नहीं हैं। ऐसी कंपनियाँ यूपी आईटी/आईटीईएस नीति 2022 के तहत आवेदन कर सकती हैं [1]।
क्या ISM की मंज़ूरी के बिना राज्य से सब्सिडी मिल सकती है?
नीति के अनुसार राज्य की पूँजीगत सब्सिडी केंद्र की मंज़ूर सब्सिडी पर आधारित है और LoC भी भारत सरकार की मंज़ूरी के बाद ही प्रभावी होता है [1]।
नीति कब तक लागू है?
नीति 19 जनवरी 2024 से पाँच साल के लिए, यानी 18 जनवरी 2029 तक लागू है [4]।
आवेदन और जानकारी के लिए किससे संपर्क करें?
नोडल एजेंसी UPLC है, जिसका कार्यालय नवचेतना केंद्र, 10-अशोक मार्ग, लखनऊ में है; आवेदन निवेश मित्र पोर्टल से होता है [3][4]।
स्रोत
- [1] Uttar Pradesh Semiconductor Policy 2024 (GO No. 142/78-1-2024-14/2024) — आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग, उत्तर प्रदेश / Invest UP, 19 जनवरी 2024
- [2] Uttar Pradesh Semiconductor Policy-2024 — Invest UP, पेज अपडेट 2 जून 2026
- [3] Uttar Pradesh Semiconductor Policy — यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPLC), पेज अपडेट 24 फ़रवरी 2026
- [4] वित्तीय प्रोत्साहन के दिशानिर्देश व क्रियान्वयन प्रक्रिया, शासनादेश 11/2024/254/78-1-2024-14/2024 — आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स अनुभाग-1, उत्तर प्रदेश, 28 फ़रवरी 2024
- [5] Semiconductors in Uttar Pradesh — Invest UP, पेज अपडेट 3 जून 2026
- [6] India Semiconductor Mission — इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार
- [7] Cabinet approves Semicon 2.0 — प्रधानमंत्री कार्यालय (pmindia.gov.in), 15 जुलाई 2026
- [8] UP govt revises Semiconductor Policy to attract investors — KNN India, 5 जून 2026
यह गाइड आधिकारिक दस्तावेज़ों के आधार पर तैयार की गई है; हर तथ्य का स्रोत लेख के अंत में दिया गया है। नीतियाँ समय-समय पर बदलती हैं, इसलिए आवेदन से पहले नवीनतम आधिकारिक अधिसूचना ज़रूर देखें। किसी त्रुटि की सूचना [email protected] पर "सुधार" विषय के साथ दें।