एग्रीवोल्टाइक्स सम्मेलन: यूपी के मंत्रियों ने निवेशकों को बुलाया, 16 लाख कृषि नलकूप सौर ऊर्जा से चलाने का लक्ष्य
एग्रीवोल्टाइक्स विश्व सम्मेलन 2026 के मंत्रिस्तरीय सत्र में उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने निवेशकों को राज्य में खेती के साथ सौर ऊर्जा उत्पादन के अवसरों के लिए आमंत्रित किया, जबकि कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बिजली बिल माफ़ी वाले सभी 16 लाख कृषि नलकूपों को सौर ऊर्जा से चलाने की राज्य की योजना बताई।

- ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने निवेशकों को ग्रिड कनेक्टिविटी और बिजली निकासी में राज्य के समर्थन का आश्वासन दिया।
- उनके अनुसार ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर-III नवीकरणीय परियोजनाओं की बिजली की निकासी और पारेषण को और मज़बूत करेगा।
- राज्य की लगभग 80% कृषि भूमि छोटे और सीमांत किसानों के पास; उनके लिए उपयुक्त वित्तपोषण मॉडल पर ज़ोर।
- कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही: बिजली बिल माफ़ी वाले सभी 16 लाख कृषि नलकूपों को सौर ऊर्जा से चलाने का लक्ष्य।
- किसानों की भूमि का स्वामित्व सुरक्षित रहने का आश्वासन; कृषि विज्ञान केंद्रों के ज़रिये प्रशिक्षण का प्रस्ताव।
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की 22 अक्टूबर 2026 को जारी विज्ञप्ति के अनुसार, एग्रीवोल्टाइक्स विश्व सम्मेलन 2026 के दूसरे दिन एक विशेष मंत्रिस्तरीय सत्र में उत्तर प्रदेश के ऊर्जा और कृषि मंत्रियों ने राज्य में खेती के साथ सौर ऊर्जा उत्पादन (एग्रीवोल्टाइक्स) की संभावनाएँ और योजनाएँ रखीं। इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट (आईआईएसडी) और काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) के संयुक्त तत्वावधान में हुए इस सत्र में ओडिशा, मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार के मंत्री भी शामिल हुए। सत्र का उद्देश्य राज्यों को अपने यहाँ निवेश के अवसर दिखाने का मंच देना था।
उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा ने राज्य के विशाल कृषि आधार, विविध फसल प्रणालियों और बढ़ते सौर ऊर्जा ढाँचे को एग्रीवोल्टाइक्स के लिए प्रमुख लाभ बताया। उन्होंने कहा कि खेती के साथ सौर ऊर्जा उत्पादन से ज़मीन का बेहतर उपयोग होगा और किसानों को आय का एक अतिरिक्त स्रोत मिलेगा। छत पर सौर पैनल और ग्रिड ढाँचे में राज्य की प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर-III नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं से बनी बिजली की निर्बाध निकासी और पारेषण को और मज़बूत करेगा।
श्री शर्मा ने कहा कि राज्य की लगभग 80% कृषि भूमि छोटे और सीमांत किसानों के पास है, इसलिए उनके अनुरूप वित्तपोषण मॉडल और तकनीकों की ज़रूरत है। निवेशकों को आमंत्रित करते हुए उन्होंने कहा, "एग्रीवोल्टाइक्स की संभावनाएं बहुत अधिक हैं। जो लोग एग्रीवोल्टाइक्स से जुड़ना चाहते हैं उन्हें उत्तर प्रदेश की ओर देखने की जरूरत है।" उन्होंने निवेशकों को ग्रिड कनेक्टिविटी और बिजली निकासी में राज्य के समर्थन का आश्वासन भी दिया।
कृषि मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही ने राज्य की उस योजना की जानकारी दी, जिसके तहत बिजली बिल माफ़ किए गए सभी 16 लाख कृषि नलकूपों को सौर ऊर्जा से चलाने का लक्ष्य है। विज्ञप्ति के अनुसार इस योजना को समर्पित ग्रिड ढाँचे का समर्थन मिलेगा। उन्होंने किसानों के भूमि स्वामित्व अधिकारों की रक्षा पर ज़ोर दिया और आश्वासन दिया कि उनकी ज़मीन का स्वामित्व सुरक्षित रहेगा। उन्होंने फसल चयन और एग्रीवोल्टाइक तकनीकों पर संरचित प्रशिक्षण, तथा कृषि विज्ञान केंद्रों, कृषि विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों के ज़रिये किसानों की क्षमता निर्माण का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा, "उत्तर प्रदेश की कृषि और उसके किसान एक तरह से हमारी आर्थिक व्यवस्था की जीवनरेखा हैं।"
सम्मेलन के दूसरे दिन इंडो-जर्मन चैंबर ऑफ कॉमर्स के संवाद में एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी और फर्स्ट सोलर समेत भारतीय व अंतरराष्ट्रीय डेवलपर्स ने आपूर्ति श्रृंखला के स्थानीयकरण और मानकों पर चर्चा की। एक गोलमेज बैठक में विश्व बैंक, केएफडब्ल्यू, यूरोपीय निवेश बैंक और आईआरईडीए सहित वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधियों ने एग्रीवोल्टाइक्स के लिए रियायती ऋण और मिश्रित वित्त जैसे तंत्रों पर विचार किया।
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