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उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति 2026: पात्रता, भत्ता, सीड फंड और आवेदन की पूरी जानकारी

UP Corporate News डेस्क • • 10 मिनट

उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति 2026 ने 2020 की नीति (प्रथम संशोधन 2022) की जगह ली है और अधिसूचना की तिथि से पाँच वर्ष तक लागू रहेगी। इसमें भरण-पोषण भत्ता, प्रोटोटाइप अनुदान, सीड कैपिटल, इनक्यूबेटर सहायता और StartinUP पोर्टल पर मान्यता की प्रक्रिया तय की गई है।

उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति 2026: पात्रता, भत्ता, सीड फंड और आवेदन की पूरी जानकारी
मुख्य बिंदु
  • नई स्टार्टअप नीति 2026 अधिसूचना की तिथि से पाँच वर्ष तक लागू, 2020 की नीति की जगह
  • प्रोटोटाइप चरण तक ₹20,000 प्रतिमाह भरण-पोषण भत्ता, अधिकतम 2 वर्ष
  • प्रोटोटाइप अनुदान ₹10 लाख तक और सीड कैपिटल ₹15 लाख तक का प्रावधान
  • लाभ के लिए DPIIT और StartinUP पोर्टल, दोनों पर पंजीकरण ज़रूरी
  • ₹1,000 करोड़ का यूपी स्टार्टअप फंड और हर जनपद में इनक्यूबेटर का लक्ष्य

उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप शुरू करने वालों के लिए अब उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति 2026 (UP Startup Policy 2026) लागू है, जिसने 2020 की नीति (प्रथम संशोधन 2022) की जगह ली है [1]। इस नीति में शुरुआती दौर के संस्थापकों के लिए मासिक भत्ते से लेकर प्रोटोटाइप, सीड कैपिटल, पेटेंट और फंड जुटाने तक, चरणबद्ध सहायता का प्रावधान है [1]। सबसे ज़रूरी बात: किसी भी प्रोत्साहन के लिए स्टार्टअप का DPIIT और राज्य के StartinUP पोर्टल, दोनों पर पंजीकृत होना अनिवार्य है [1][5]।

एक नज़र में

बिंदुजानकारी
नीति का नामउत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति 2026 [1]
प्रशासकीय विभागआईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग, उत्तर प्रदेश शासन [1]
नोडल संस्थाउत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन (UP Startup Mission) [1][2]
अवधिअधिसूचना की तिथि से पाँच वर्ष [1]
दायरासभी सेक्टर, नीति किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं [1]
भरण-पोषण भत्ता₹20,000 प्रतिमाह, अधिकतम 2 वर्ष [1][2]
प्रोटोटाइप अनुदान₹10 लाख तक [1]
सीड कैपिटल₹15 लाख तक (विशेष मामलों में ₹50 लाख तक) [1][2]
पंजीकरण पोर्टलStartinUP पोर्टल (startinup.up.gov.in) [4]
फंड₹1,000 करोड़ का यूपी स्टार्टअप फंड, ₹400 करोड़ का AKTU कॉर्पस [1][2]

नई नीति कब से और पुरानी नीति का क्या हुआ

राज्य मंत्रिमंडल ने 6 जुलाई 2026 को स्टार्टअप नीति 2026 को मंज़ूरी दी [8]। नीति के अनुसार यह अपनी अधिसूचना की तिथि से पाँच वर्ष तक लागू रहेगी, और स्टार्टअप मिशन का पोर्टल इसे "2026–2031" की नीति के रूप में दर्शाता है [1][4]। 2020 की नीति (प्रथम संशोधन 2022) के प्रावधान नई नीति की अधिसूचना की तिथि तक प्रभावी रहे [1]।

संक्रमण के लिए नीति में स्पष्ट व्यवस्था है: जुलाई 2025 से नई अधिसूचना तक 2020 की नीति के तहत स्वीकृत या मान्यता पाए स्टार्टअप, इनक्यूबेटर और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पुरानी नीति के अंतर्गत ही रहेंगे। जिन मामलों पर निर्णय लंबित था, उनके आवेदकों को अधिसूचना से तीन माह के भीतर पुरानी या नई नीति में से एक चुनने का विकल्प दिया गया है [1]।

किसके लिए है

स्टार्टअप मिशन के FAQ के अनुसार "स्टार्टअप" की पहचान भारत सरकार की परिभाषा से होती है [5]:

  • इकाई प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, LLP, पार्टनरशिप फर्म, सहकारी समिति या बहु-राज्य सहकारी समिति के रूप में गठित हो।
  • सामान्यतः गठन को 10 वर्ष से अधिक न हुए हों और टर्नओवर ₹200 करोड़ तक हो; डीप-टेक स्टार्टअप के लिए अलग प्रावधान हैं।
  • काम नवाचार, नए या बेहतर उत्पाद, प्रक्रिया या सेवा पर हो, या बिज़नेस मॉडल रोज़गार और संपत्ति सृजन की अच्छी क्षमता वाला हो।
  • किसी मौजूदा कारोबार को तोड़कर या पुनर्गठित करके बनी इकाई स्टार्टअप नहीं मानी जाती।

राज्य की नीति के तहत प्रोत्साहन के लिए ये शर्तें भी जुड़ती हैं [1][3]:

  • स्टार्टअप उत्तर प्रदेश में पंजीकृत हो और कोई नवाचारी विचार या अवधारणा प्रस्तुत करता हो।
  • DPIIT और StartinUP पोर्टल, दोनों पर पंजीकरण हो।
  • स्टार्टअप किसी StartinUP-मान्यता प्राप्त इनक्यूबेटर में इनक्यूबेट हो और उसकी संस्तुति प्राप्त हो; स्केलिंग चरण या उससे आगे के स्टार्टअप को इस शर्त से छूट है।
  • राज्य से बाहर पंजीकृत स्टार्टअप भी पात्र हो सकता है, अगर उसकी उत्पादन/सेवा सुविधा या परिचालन इकाई उत्तर प्रदेश में हो और 50% से अधिक कारोबार यहीं से होता हो [4]।

क्या-क्या प्रोत्साहन / लाभ मिलते हैं

प्रोत्साहन स्टार्टअप के विकास के चरण (stage) के अनुसार दिए जाते हैं [1]।

शुरुआती और विकास चरण की सहायता

प्रोत्साहनप्रावधान
भरण-पोषण भत्ता (Sustenance Allowance)आइडिया से प्रोटोटाइप चरण तक ₹20,000 प्रतिमाह, तिमाही आधार पर, अधिकतम 2 वर्ष [1][2]
प्रोटोटाइप अनुदान (Prototype Grant)एकमुश्त ₹10 लाख तक; 70% अग्रिम और 30% प्रतिपूर्ति के रूप में [1]
सीड कैपिटल / मार्केटिंग सहायता (Seed Capital)₹15 लाख तक, कच्चा माल, हार्डवेयर-सॉफ़्टवेयर, उत्पाद विकास, ट्रायल, बाज़ार अनुसंधान और MVP लॉन्च की मार्केटिंग के लिए; दो किस्तों (50%+50%) में [1]
बड़े सीड प्रस्ताव₹15 लाख से ₹50 लाख तक, विशेषज्ञ समिति (SRCE) की संस्तुति और PIU अनुमोदन से, केस-टू-केस आधार पर [1]
मैचिंग ग्रांट (Matching Grant)मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय फंड से कम से कम ₹2 करोड़ जुटाने पर उस राशि का 50%, अधिकतम ₹5 करोड़ [1][2]
अतिरिक्त 50% प्रोत्साहनप्रोटोटाइप और सीड अनुदान पर; महिला, दिव्यांगजन, ट्रांसजेंडर या EWS नेतृत्व वाले (संस्थापक हिस्सेदारी न्यूनतम 51%), पूर्वांचल/बुंदेलखंड स्थित, या एग्री-टेक, सर्कुलर इकोनॉमी, ग्रामीण प्रभाव, अपशिष्ट प्रबंधन, नवीकरणीय ऊर्जा व जलवायु क्षेत्र के स्टार्टअप [1][2][7]

अन्य सहायता

  • इवेंट अनुदान: राष्ट्रीय सम्मेलन में भागीदारी पर लागत का 50%, अधिकतम ₹50,000; अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के लिए अधिकतम ₹2 लाख; पूर्व स्वीकृति ज़रूरी [1]।
  • एक्सेलरेटर सहायता: राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय स्तर के (Tier 1) प्रोग्राम में शुल्क का 75%, अधिकतम ₹3 लाख; एक स्टार्टअप अधिकतम 2 प्रोग्राम के लिए [1]।
  • पेटेंट और गुणवत्ता प्रमाणन: ₹50 लाख तक के खर्च पर 100%, ₹50 लाख–₹1 करोड़ वाले हिस्से पर 75% और ₹1–2 करोड़ वाले हिस्से पर 50% प्रतिपूर्ति; ऊपरी स्लैब पर मंत्रिमंडल का अनुमोदन [1][2]।
  • ब्याज सब्सिडी (Interest Subvention): अनुसूचित बैंकों/वित्तीय संस्थानों से लिए गए टर्म लोन पर 4% प्रति वर्ष या वास्तविक ब्याज, जो कम हो; 3 वर्ष की अवधि में अधिकतम ₹2 करोड़ तक [1][3]।
  • EPF/ESI प्रतिपूर्ति: नियोक्ता अंशदान की 3 वर्ष तक प्रतिपूर्ति; आवेदन की तिथि पर कंपनी का संचालन 3 वर्ष से अधिक पुराना न हो [1]।

डीप-टेक स्टार्टअप के लिए

CoE या यू-हब (U-Hub) द्वारा संस्तुत डीप-टेक स्टार्टअप के लिए प्रोटोटाइप और सीड अनुदान मानक राशि के दोगुने तक (₹20 लाख और ₹30 लाख तक) हो सकता है [1][2]। इसके अलावा सत्यापित R&D खर्च के 40% तक की रॉयल्टी-आधारित मैचिंग ग्रांट (₹1 करोड़ वार्षिक राजस्व के बाद 3% रॉयल्टी के रूप में वापसी), क्लाउड/डेटा सेंटर खर्च पर ₹50,000 से ऊपर के व्यय की 50% प्रतिपूर्ति (अधिकतम ₹2 लाख प्रति वर्ष) और ₹40 करोड़ तक की पेशेंस कैपिटल (Patience Capital) का प्रावधान है; पेशेंस कैपिटल एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 4 स्टार्टअप को और प्रति वर्ष कुल ₹100 करोड़ की सीमा में दी जा सकती है [1][2]।

इनक्यूबेटर और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

सहायताप्रावधान
पूँजीगत अनुदान (Capital Grant)अवसंरचना की पात्र लागत का 50%, अधिकतम ₹1.25 करोड़; पूर्वांचल/बुंदेलखंड में ₹1.50 करोड़ [2][3]
परिचालन अनुदान (OPEX Grant)₹40 लाख प्रति वर्ष तक, 5 वर्ष या आत्मनिर्भर होने तक [2][3]
नवरत्न इनक्यूबेटर अनुदान₹30 लाख प्रति वर्ष [3]
इनक्यूबेटी की फंडिंग पर पुरस्कारइनक्यूबेटेड स्टार्टअप द्वारा जुटाई राशि का 2%, अधिकतम ₹50 लाख [3]
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE)5 वर्ष में ₹12 करोड़ तक; पाँच वर्षों में 20 नए CoE का लक्ष्य [2][3]

नीति का लक्ष्य हब-एंड-स्पोक मॉडल पर हर जनपद में इनक्यूबेटर विकसित करना है, जिसमें यू-हब और CoE हब की भूमिका निभाएँगे [1]। मान्यता प्राप्त इनक्यूबेटर में 25% सीटें उन स्टार्टअप को प्राथमिकता से देने का प्रावधान है जिनमें महिला संस्थापकों की हिस्सेदारी कम से कम 51% हो [1]।

फंड तक पहुँच

₹1,000 करोड़ का यूपी स्टार्टअप फंड फंड ऑफ फंड्स (Fund of Funds) के रूप में सीधे स्टार्टअप में निवेश नहीं करेगा, बल्कि "डॉटर फंड्स" के माध्यम से निवेश करेगा [1][2]; स्टार्टअप मिशन के पोर्टल के अनुसार ये SEBI-पंजीकृत फंड होंगे [2]। अनुदान और सीड सहायता के लिए AKTU के पास ₹400 करोड़ का कॉर्पस फंड रहेगा [1][2]।

आवेदन कैसे करें

  • StartinUP पोर्टल या यूपी स्टार्टअप मिशन पोर्टल पर जाएँ और "Register" चुनें [4]।
  • यूज़र टाइप में "Startup" चुनें; नाम, ईमेल, मोबाइल नंबर और पासवर्ड भरें। सीधा लिंक: स्टार्टअप पंजीकरण [4]।
  • लॉगिन करके ऑनलाइन आवेदन फ़ॉर्म पूरा करें और आवश्यक दस्तावेज़ व घोषणाएँ अपलोड करें [4][5]।
  • आवश्यक अनुपालन पूरे होने पर नोडल संस्था आवेदन को मान्यता (Recognition) के लिए अनुमोदित करती है; इसके लिए कोई शुल्क तय नहीं है [1][5]।
  • प्रोत्साहन का दावा भी पोर्टल से होता है। जहाँ ज़रूरी हो, इनक्यूबेटर की संस्तुति साथ लगती है [3]।
  • सेक्टर-विशेष विशेषज्ञ समिति (SRCE) आवेदन का मूल्यांकन कर संस्तुति करती है; नोडल संस्था और नीति क्रियान्वयन इकाई (PIU) के अनुमोदन के बाद राशि सीधे स्टार्टअप के बैंक खाते में भेजी जाती है [3]।

स्टार्टअप और इनक्यूबेटर को दिए जाने वाले प्रोत्साहनों के विस्तृत दिशानिर्देश (अगस्त 2026) स्टार्टअप मिशन के दिशानिर्देश पेज पर उपलब्ध हैं [6]।

ध्यान रखने वाली बातें

  • पहले DPIIT मान्यता लें: राज्य के प्रोत्साहनों के लिए DPIIT पंजीकरण एक अनिवार्य शर्त है [1]।
  • सही इनक्यूबेटर चुनें: शुरुआती चरण में इनक्यूबेटर की संस्तुति ज़रूरी है। FAQ के अनुसार मान्यता प्राप्त इनक्यूबेटर और CoE में दो वर्ष तक निःशुल्क इनक्यूबेशन का प्रावधान है [5]।
  • प्रोटोटाइप ठोस हो: सामान्य वेबसाइट या साधारण मोबाइल ऐप प्रोटोटाइप अनुदान के दायरे में नहीं आते [1]।
  • इवेंट से पहले मंज़ूरी: सम्मेलन या प्रदर्शनी अनुदान के लिए पूर्व स्वीकृति और बाद में उपलब्धि रिपोर्ट ज़रूरी है [1]।
  • ज़िले की ताकत से जुड़ें: नीति ODOP से जुड़े नवाचार को प्रोत्साहित करती है; इस बारे में हमारी ODOP गाइड देखें [7]।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या 2020 की नीति के तहत मंज़ूर लाभ जारी रहेंगे?

हाँ। जुलाई 2025 से नई नीति की अधिसूचना तक 2020 की नीति के तहत स्वीकृत स्टार्टअप, इनक्यूबेटर और CoE उसी नीति के अंतर्गत रहेंगे। लंबित मामलों में आवेदक तीन माह के भीतर पुरानी या नई नीति चुन सकते हैं [1]।

क्या StartinUP पर मान्यता के लिए कोई फ़ीस है?

नहीं। स्टार्टअप मिशन के FAQ के अनुसार मान्यता के लिए कोई पंजीकरण शुल्क निर्धारित नहीं है [5]।

क्या हर स्टार्टअप को इनक्यूबेटर से जुड़ना ज़रूरी है?

प्रोत्साहन के लिए सामान्यतः मान्यता प्राप्त इनक्यूबेटर की संस्तुति चाहिए। स्केलिंग चरण या उससे आगे के स्टार्टअप को इस शर्त से छूट है [1][5]।

महिला संस्थापकों के लिए क्या अतिरिक्त प्रावधान है?

महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप (संस्थापक हिस्सेदारी कम से कम 51%) के लिए प्रोटोटाइप और सीड अनुदान पर 50% अतिरिक्त प्रोत्साहन और इनक्यूबेटर में 25% सीटों पर प्राथमिकता का प्रावधान है [1][2]।

किसी समस्या पर कहाँ संपर्क करें?

नीति संबंधी सहायता के लिए यूपी स्टार्टअप मिशन कार्यालय (पाँचवीं मंज़िल, नवचेतना केंद्र, 10 अशोक मार्ग, लखनऊ) से सामान्य पूछताछ नंबर 0522-4130303 (एक्सटेंशन 302) या [email protected] पर कार्यदिवसों में सुबह 10 से शाम 6 बजे तक संपर्क किया जा सकता है [9]।

स्रोत

मुख्य आधिकारिक स्रोत: उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति 2026 — आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग, उत्तर प्रदेश शासन (Invest UP) — मूल दस्तावेज़ देखें
यह गाइड आधिकारिक दस्तावेज़ों के आधार पर तैयार की गई है; हर तथ्य का स्रोत लेख के अंत में दिया गया है। नीतियाँ समय-समय पर बदलती हैं, इसलिए आवेदन से पहले नवीनतम आधिकारिक अधिसूचना ज़रूर देखें। किसी त्रुटि की सूचना [email protected] पर "सुधार" विषय के साथ दें।

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