यूपी एयरोस्पेस एवं रक्षा नीति 2024: पात्रता, सब्सिडी, ज़मीन और आवेदन की पूरी जानकारी
उत्तर प्रदेश एयरोस्पेस तथा रक्षा इकाई एवं रोज़गार प्रोत्साहन नीति-2024 राज्य भर में लगने वाली रक्षा और एयरोस्पेस निर्माण इकाइयों के लिए पूँजीगत सब्सिडी, स्टांप ड्यूटी छूट, डिफेंस कॉरिडोर की ज़मीन पर रियायत और कई अन्य प्रोत्साहनों का प्रावधान करती है। यह गाइड बताती है कि कौन पात्र है, किस इकाई को क्या मिल सकता है और आवेदन कैसे होता है।

- नीति 24 जनवरी 2025 के शासनादेश से अधिसूचित हुई; अवधि अधिसूचना से 5 वर्ष या नई नीति आने तक, जो भी पहले हो
- पश्चिमांचल-मध्यांचल में 25% और बुंदेलखंड-पूर्वांचल में 35% बैक-एंडेड पूँजीगत सब्सिडी का प्रावधान
- मेगा एंकर और एंकर इकाइयों के लिए डिफेंस कॉरिडोर की ज़मीन के सकल विक्रय मूल्य पर 25% छूट; पात्र इकाइयों को भूमि डीड पर स्टांप ड्यूटी में 100% छूट
- महिला उद्यमियों को सभी लागू सब्सिडी के ऊपर अतिरिक्त 2%
- नोडल एजेंसी UPEIDA; कॉरिडोर के छह नोड: लखनऊ, कानपुर, आगरा, अलीगढ़, झाँसी और चित्रकूट
उत्तर प्रदेश में रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में निर्माण इकाई लगाने वालों के लिए राज्य सरकार की मुख्य नीति "उत्तर प्रदेश एयरोस्पेस तथा रक्षा इकाई एवं रोज़गार प्रोत्साहन नीति-2024" है, जिसने 2018 की रक्षा एवं एयरोस्पेस नीति की जगह ली है [2]। सबसे काम की बात यह है कि इसमें प्रोत्साहन इकाई के आकार (मेगा एंकर, एंकर, वेंडर, MSME, स्टार्टअप) और क्षेत्र (पश्चिमांचल, मध्यांचल, बुंदेलखंड, पूर्वांचल) के हिसाब से तय हैं, इसलिए आवेदन से पहले अपनी श्रेणी और लोकेशन तय कर लेना सबसे ज़रूरी कदम है [2]।
एक नज़र में
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| नीति का नाम | उत्तर प्रदेश एयरोस्पेस तथा रक्षा इकाई एवं रोज़गार प्रोत्साहन नीति-2024 [3] |
| अधिसूचना | शासनादेश दिनांक 24 जनवरी 2025, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग [3] |
| मौजूदा संस्करण | Invest UP इसे "नीति-2024 (प्रथम संशोधन)" के नाम से सूचीबद्ध करता है [1][4]; नीति दस्तावेज़ 19 मई 2026 को अपडेट हुआ [1] |
| अवधि | अधिसूचना से 5 वर्ष या नई नीति आने तक, जो भी पहले हो [2] |
| लक्ष्य | 5 वर्ष में ₹50,000 करोड़ निवेश और 1 लाख रोज़गार [2] |
| पूँजीगत सब्सिडी | 25% (पश्चिमांचल, मध्यांचल) और 35% (बुंदेलखंड, पूर्वांचल), बैक-एंडेड [2] |
| कॉरिडोर नोड की ज़मीन | लीज़ रेंट 10 वर्ष तक भूमि लागत का 1%, उसके बाद 1.5% [2] |
| नोडल एजेंसी | उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज़ औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) [2][4] |
| आवेदन | Nivesh Mitra से जुड़ा ऑनलाइन इंसेंटिव मैनेजमेंट पोर्टल (OIMS) [2] |
किसके लिए है
नीति उन इकाइयों के लिए है जो रक्षा या एयरोस्पेस (A&D) उत्पादों की वैल्यू चेन में काम करती हैं। इसमें सामग्री, उपकरण, कलपुर्ज़े, असेंबली और इन उत्पादों की ढुलाई व भंडारण के लिए बने विशेष वाहन भी शामिल हैं [2]। इकाई को नीति में दी गई आठ शर्तों में से कम से कम एक पूरी करनी होती है, जैसे सेना, नौसेना, वायुसेना, अर्धसैनिक बलों या DRDO के लिए निर्माण या डिज़ाइन, किसी A&D इकाई से सप्लाई ऑर्डर, ऑफ़सेट नीति के तहत विदेशी OEM से MoU, या रखरखाव-मरम्मत (MRO) इकाई होना [2]।
नीति में इकाइयों की श्रेणियाँ इस तरह हैं [2]:
- मेगा एंकर (Mega Anchor): ₹1,000 करोड़ से अधिक निवेश करने वाली देशी या विदेशी OEM।
- एंकर (Anchor): A&D प्लेटफ़ॉर्म डिज़ाइन और निर्माण करने वाली OEM। बुंदेलखंड (झाँसी, चित्रकूट नोड) और पूर्वांचल में ₹200 करोड़ से अधिक निवेश या कम से कम 1,000 प्रत्यक्ष रोज़गार; मध्यांचल और पश्चिमांचल (आगरा, अलीगढ़, कानपुर, लखनऊ नोड) में ₹300 करोड़ से अधिक निवेश या कम से कम 1,500 प्रत्यक्ष रोज़गार।
- वेंडर (Vendor): एंकर इकाई वाले क्लस्टर में स्थित इकाई, जो अपने तैयार उत्पाद का कम से कम 40% उसी एंकर को देती हो।
- MSME: केंद्र सरकार की MSME परिभाषा के अनुसार; टर्नओवर का कम से कम 50% हिस्सा विनिर्माण गतिविधियों से आना चाहिए और इकाई A&D वैल्यू चेन में मेगा एंकर, एंकर, वेंडर इकाइयों या रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों (DPSU) को सप्लाई करती हो।
- स्टार्टअप: DPIIT से मान्यता प्राप्त और A&D क्षेत्र में काम करने वाला या आने का इच्छुक स्टार्टअप।
मौजूदा इकाइयों का विस्तार (Expansion) या विविधीकरण (Diversification) भी पात्र है। विस्तार में नए पूँजी निवेश से ग्रॉस ब्लॉक कम से कम 25% बढ़ना चाहिए, जबकि विविधीकरण में ग्रॉस ब्लॉक 25% बढ़ाने या एंकर श्रेणी की शर्त पूरी करने में से जो कम हो, वह लागू होती है [2]। फ़ोकस सेक्टरों में एयरोस्पेस, रक्षा, MRO, अनुसंधान एवं विकास, स्पेस टेक्नोलॉजी, AI आधारित प्लेटफ़ॉर्म, डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स, साइबर सुरक्षा, टेस्टिंग और ड्रोन (UAV) शामिल हैं [2]।
क्या-क्या प्रोत्साहन / लाभ मिलते हैं
पूँजीगत सब्सिडी (Capital Subsidy)
पात्र इकाइयों को पश्चिमांचल और मध्यांचल में 25% तथा बुंदेलखंड और पूर्वांचल में 35% बैक-एंडेड पूँजीगत सब्सिडी का प्रावधान है [2]। भुगतान बराबर वार्षिक किस्तों में होता है [2]:
| सब्सिडी की राशि | किस्तों की अवधि |
|---|---|
| ₹500 करोड़ तक | 5 वर्ष |
| ₹500 करोड़ से ₹1,000 करोड़ | 10 वर्ष |
| ₹1,000 करोड़ से अधिक | 15 वर्ष |
आयातित पुरानी मशीनरी भी 40% तक पात्र मानी गई है [2]। ₹3,000 करोड़ से अधिक निवेश वाली अल्ट्रा-एंकर इकाइयों को केस-दर-केस अतिरिक्त प्रोत्साहन दिए जा सकते हैं [2]।
ज़मीन और स्टांप ड्यूटी
- डिफेंस कॉरिडोर नोड्स में आवंटित भूमि पर लीज़ रेंट पहले 10 वर्ष भूमि लागत का 1% और उसके बाद 1.5% [2]।
- मेगा एंकर और एंकर इकाइयों के लिए कॉरिडोर भूमि के सकल विक्रय मूल्य पर 25% छूट (Land Subsidy) [2]।
- भूमि ख़रीद या लीज़ डीड पर स्टांप ड्यूटी में 100% छूट; इसके लिए स्टांप शुल्क के बराबर बैंक गारंटी स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग में जमा करनी होती है [2]।
- मेगा एंकर और एंकर इकाइयाँ अपनी ज़मीन के 20% तक हिस्से पर वेंडर इकाइयाँ बसा सकती हैं [2]।
अन्य प्रोत्साहन
| प्रोत्साहन | प्रावधान |
|---|---|
| आयातित प्लांट-मशीनरी की ढुलाई | लागत का 50%, अधिकतम ₹5 करोड़ [2] |
| तैयार माल की ढुलाई | लागत का 50%, अधिकतम ₹5 करोड़ प्रति वर्ष, व्यावसायिक उत्पादन से 5 वर्ष [2] |
| ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर | पर्यावरण संरक्षण ढाँचे की लागत का 25%, अधिकतम ₹1 करोड़ [2] |
| कॉमन फ़ैसिलिटी / स्किलिंग सेंटर | पूँजी निवेश का 50%, अधिकतम ₹10 करोड़ प्रति सेंटर [2] |
| महिला उद्यमी | सभी लागू सब्सिडी के ऊपर अतिरिक्त 2% [2] |
| मार्केटिंग सहायता (MSME, स्टार्टअप) | अंतरराष्ट्रीय आयोजन पर ₹15 लाख और राष्ट्रीय आयोजन पर ₹5 लाख तक (प्रत्येक वर्ष में एक), स्थापना से 5 वर्ष [2] |
| पेटेंट | घरेलू फ़ाइलिंग शुल्क का 100%, अंतरराष्ट्रीय का 50% तक; प्रति इकाई अधिकतम ₹25 लाख, पेटेंट मिलने के बाद [2] |
| क्वालिटी सर्टिफ़िकेशन (MSME) | AS 9100, NADCAP जैसे प्रमाणन शुल्क का 100%, अधिकतम ₹1 लाख प्रति इकाई प्रति वर्ष [2] |
| ट्रेडमार्क | आवेदन शुल्क का 100%, अधिकतम ₹1 लाख प्रति इकाई प्रति वर्ष [2] |
| कौशल विकास (Skilling) | प्रति इकाई अधिकतम 20 लोगों का प्रशिक्षण, ₹10,000 प्रति व्यक्ति प्रति माह तक, एक वर्ष के लिए [2] |
| R&D सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस | प्रति संस्थान प्रति वर्ष ₹10 करोड़ तक [2] |
डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और उसके छह नोड
उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (UPDIC) की घोषणा फ़रवरी 2018 के यूपी इन्वेस्टर्स समिट में भारत सरकार ने की थी [2]। इसके छह नोड लखनऊ, कानपुर, आगरा, अलीगढ़, झाँसी और चित्रकूट हैं [2][5]। Invest UP के अनुसार इन नोड्स में कुल 5,000 हेक्टेयर विकसित भूमि चिह्नित है [5]। रक्षा मंत्रालय ने तीन डिफेंस टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाओं के लिए ₹117.1 करोड़ मंज़ूर किए हैं: कानपुर में मानवरहित हवाई प्रणाली (UAS) परीक्षण सुविधा और संचार परीक्षण सुविधा, तथा लखनऊ में सामग्री एवं यांत्रिक परीक्षण सुविधा [5]। कॉरिडोर का काम UPEIDA के तहत UPDIC देखता है और नोड्स के लैंड बैंक, लेआउट प्लान व आवंटन दिशानिर्देश UPDIC की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं [6][7]।
आवेदन कैसे करें
- श्रेणी और नोड तय करें: मेगा एंकर, एंकर, वेंडर, MSME या स्टार्टअप में से अपनी श्रेणी और नोड चुनें, क्योंकि सब्सिडी की दर क्षेत्र पर निर्भर है [2]।
- ज़मीन लें: कॉरिडोर नोड में प्लॉट के लिए UPEIDA के आवंटन दिशानिर्देश और UPDIC पोर्टल देखें [6][7]। निजी A&D पार्क UPEIDA से या स्वतंत्र रूप से भी ज़मीन ले सकते हैं [2]।
- DPR तैयार करें: आवेदन के साथ विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) देनी होती है; चरणबद्ध परियोजना हो तो सभी चरण DPR में दर्शाने होते हैं [2]।
- लेटर ऑफ़ कम्फर्ट: नीति का लाभ उन्हीं निवेशकों को है जिनका निवेश प्रभावी तिथि के बाद हुआ हो और जिनके पास इस नीति के तहत लेटर ऑफ़ कम्फर्ट या पक्का आवंटन हो [2]।
- ऑनलाइन आवेदन: प्रोत्साहन के आवेदन Nivesh Mitra से जुड़े ऑनलाइन इंसेंटिव मैनेजमेंट पोर्टल (OIMS) पर होंगे और हर आवेदक को यूनिक ID मिलेगी [2][8]। निवेश मित्र के बारे में विस्तार से निवेश मित्र 3.0 गाइड में पढ़ें।
- मदद: Invest UP हेल्पडेस्क +91 522 6923000 (सोमवार से शनिवार, सुबह 9:30 से शाम 6:00) और [email protected] [1]; UPDIC कार्यालय, पिकप भवन, विभूति खंड, गोमती नगर, लखनऊ [6]।
ध्यान रखने वाली बातें
- पात्र निवेश की अवधि कट-ऑफ़ तिथि से मेगा एंकर के लिए 7 वर्ष, एंकर के लिए 5 वर्ष और MSME, वेंडर व स्टार्टअप के लिए 4 वर्ष है; इसी के भीतर निवेश की योजना बनाएँ [2]।
- पात्र पूँजी निवेश में ज़मीन (विकास शुल्क सहित), नया भवन, अन्य निर्माण कार्य, प्लांट-मशीनरी और परिसर को मुख्य सड़क, बिजली व सीवर लाइनों से जोड़ने वाली इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाएँ गिनी जाती हैं, जबकि वर्किंग कैपिटल, कंसल्टेंसी, रॉयल्टी, सॉफ़्टवेयर और पेटेंट जैसी मदें शामिल नहीं हैं [2]।
- इस नीति के प्रोत्साहन लेने वाली परियोजना राज्य की किसी दूसरी नीति के प्रोत्साहन नहीं ले सकती, पर केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ ले सकती है [2]। इसलिए औद्योगिक निवेश एवं रोज़गार प्रोत्साहन नीति 2022 से तुलना करके ही विकल्प चुनें।
- नीति में स्व-प्रमाणन, डीम्ड अप्रूवल और थर्ड पार्टी सर्टिफ़िकेशन को बढ़ावा देने की बात कही गई है; अंग्रेज़ी अनुवाद और हिंदी पाठ में अंतर होने पर हिंदी पाठ मान्य है [2]।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या यह नीति केवल बड़ी कंपनियों के लिए है?
नहीं। मेगा एंकर और एंकर के साथ वेंडर, MSME और DPIIT मान्य स्टार्टअप भी पात्र हैं। MSME और स्टार्टअप के लिए मार्केटिंग सहायता और MSME के लिए क्वालिटी सर्टिफ़िकेशन जैसे प्रावधान अलग से हैं [2]।
बुंदेलखंड में इकाई लगाने पर क्या अलग है?
बुंदेलखंड (झाँसी, चित्रकूट) और पूर्वांचल में पूँजीगत सब्सिडी 35% है, जबकि पश्चिमांचल और मध्यांचल में 25%। एंकर श्रेणी की सीमा भी यहाँ ₹200 करोड़ से अधिक निवेश या कम से कम 1,000 प्रत्यक्ष रोज़गार है [2]।
क्या पुरानी 2018 नीति के आवेदक नई नीति में आ सकते हैं?
जिनके लेटर ऑफ़ कम्फर्ट 2018 नीति के तहत लंबित हैं, उन्हें नियम अधिसूचित होने के एक महीने के भीतर नई नीति अपनाने या पुरानी में बने रहने का एक बार का विकल्प दिया गया है [2]।
क्या ड्रोन या MRO इकाइयाँ पात्र हैं?
हाँ। UAV और MRO दोनों नीति के फ़ोकस सेक्टरों में हैं, और MRO इकाइयों को नीति के सभी प्रोत्साहनों के लिए पात्र बताया गया है [2]।
नीति कब तक लागू है?
नीति अधिसूचना की तिथि से 5 वर्ष तक या नई नीति अधिसूचित होने तक, जो भी पहले हो, लागू है। अधिसूचना का शासनादेश 24 जनवरी 2025 का है [2][3]।
स्रोत
- [1] Uttar Pradesh Aerospace & Defence Unit and Employment Promotion Policy 2024 (First Amendment) — Invest UP, उत्तर प्रदेश सरकार
- [2] Uttar Pradesh Aerospace & Defence Unit and Employment Promotion Policy-2024, नीति दस्तावेज़ — Invest UP, मई 2026
- [3] शासनादेश संख्या 04/2025/192/77-6-2025-एल.सी. 03/2018 — औद्योगिक विकास अनुभाग-6, उत्तर प्रदेश शासन, 24 जनवरी 2025
- [4] एयरोस्पेस एवं रक्षा इकाई तथा रोजगार प्रोत्साहन नीति-2024 (प्रथम संशोधन) — Invest UP (हिंदी)
- [5] Defence & Aerospace Sector — Invest UP, उत्तर प्रदेश सरकार
- [6] Uttar Pradesh Defence Industrial Corridor (UPDIC) — UPEIDA
- [7] Guidelines/Policies — UPEIDA
- [8] Nivesh Mitra — उत्तर प्रदेश सरकार का सिंगल विंडो पोर्टल
यह गाइड आधिकारिक दस्तावेज़ों के आधार पर तैयार की गई है; हर तथ्य का स्रोत लेख के अंत में दिया गया है। नीतियाँ समय-समय पर बदलती हैं, इसलिए आवेदन से पहले नवीनतम आधिकारिक अधिसूचना ज़रूर देखें। किसी त्रुटि की सूचना [email protected] पर "सुधार" विषय के साथ दें।