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उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति 2023: सब्सिडी, पात्रता और आवेदन की पूरी जानकारी

UP Corporate News डेस्क • • 9 मिनट

उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति 2023 में नई इकाइयों को प्लांट, मशीनरी और तकनीकी सिविल कार्य पर 35% (अधिकतम ₹5 करोड़) पूँजीगत सब्सिडी का प्रावधान है। साथ ही कोल्ड चेन, क्लस्टर, सोलर, निर्यात भाड़ा, मंडी शुल्क और भूमि से जुड़ी कई रियायतें भी दी गई हैं।

उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति 2023: सब्सिडी, पात्रता और आवेदन की पूरी जानकारी
मुख्य बिंदु
  • नई खाद्य प्रसंस्करण इकाई को प्लांट, मशीनरी व तकनीकी सिविल कार्य पर 35% पूँजीगत सब्सिडी, अधिकतम ₹5 करोड़
  • विस्तार, आधुनिकीकरण व उन्नयन पर 35% सब्सिडी, अधिकतम ₹1 करोड़
  • खाद्य प्रसंस्करण इकाई के लिए खरीदी गई भूमि पर स्टाम्प शुल्क से 100% छूट
  • किसानों से सीधी खरीद और दूसरे राज्यों से लाई गई उपज पर मंडी शुल्क व सेस से छूट
  • नीति 2 फरवरी 2023 के शासनादेश से लागू; अवधि अगले 5 वर्ष या नई नीति आने तक

उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति 2023 (UP Food Processing Industry Policy 2023) राज्य में कृषि उपज की प्रोसेसिंग बढ़ाने और प्रोसेस्ड फूड के निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए बनाई गई नीति है [3]। इसका सबसे अहम प्रावधान यह है कि नई खाद्य प्रसंस्करण इकाई लगाने पर प्लांट, मशीनरी और तकनीकी सिविल कार्य के खर्च पर 35% पूँजीगत सब्सिडी (Capital Subsidy), अधिकतम ₹5 करोड़ तक, का प्रावधान है [1][2]। इसके साथ भूमि, मंडी शुल्क, कोल्ड चेन, सोलर ऊर्जा और निर्यात भाड़े पर भी अलग-अलग रियायतें तय की गई हैं।

एक नज़र में

बिंदुजानकारी
नीति का नामउत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति 2023
लागू होने का आधार2 फरवरी 2023 का शासनादेश, तत्काल प्रभाव से [2]
अवधिअगले 5 वर्ष तक या नई नीति आने तक, जो भी बाद में हो [2]
नोडल विभागउद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग [3]
नोडल एजेंसीउद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण निदेशालय [3]
नई इकाई पर पूँजीगत सब्सिडी35%, अधिकतम ₹5 करोड़ [1][2]
विस्तार/आधुनिकीकरण पर सब्सिडी35%, अधिकतम ₹1 करोड़ [2][4]
स्टाम्प शुल्कइकाई के लिए खरीदी गई भूमि पर 100% छूट [1][5]
निर्यात भाड़ा सब्सिडीवास्तविक परिवहन लागत का 25% (नेपाल, बांग्लादेश, भूटान छोड़कर) [3]
स्वीकृतिराज्य स्तरीय समितियों के माध्यम से [3]

किसके लिए है

यह नीति राज्य में खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी गतिविधियों के लिए है। नीति और उसके दिशा-निर्देशों में इन लाभार्थियों का उल्लेख है [3][4]:

  • नई खाद्य प्रसंस्करण इकाइयाँ (Food Processing Units) लगाने वाले उद्यमी
  • पहले से चल रही इकाइयाँ, जो विस्तार, आधुनिकीकरण या उन्नयन (Expansion/Modernisation) करना चाहती हैं
  • कोल्ड चेन, पैक हाउस, प्री-कूलिंग, राइपनिंग चैंबर जैसी वैल्यू एडिशन सुविधाएँ बनाने वाले निवेशक
  • एग्रो प्रोसेसिंग क्लस्टर बनाने वाले समूह, जिनमें कम से कम 5 इकाइयाँ और न्यूनतम ₹25 करोड़ का निवेश हो
  • स्वयं सहायता समूह (SHG), किसान उत्पादक संगठन (FPO) और किसान, जो विकेंद्रीकृत प्रोसेसिंग और भंडारण की परियोजना लाते हैं
  • कृषि वैल्यू चेन में आधुनिक तकनीक पर काम करने वाले स्टार्ट-अप
  • महिलाओं के स्वामित्व और संचालन वाली इकाइयाँ (सोलर सब्सिडी में ऊँची दर)

नीति के दिशा-निर्देशों के अनुसार पहले से स्थापित खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को भी इस नीति के तहत पात्र इकाई माना गया है [2]। हर प्रोत्साहन की अपनी शर्तें हैं, इसलिए आवेदन से पहले संबंधित प्रावधान को मूल दस्तावेज़ में ज़रूर पढ़ें।

क्या-क्या प्रोत्साहन / लाभ मिलते हैं

पूँजीगत और इंफ्रास्ट्रक्चर सब्सिडी

प्रोत्साहनदरअधिकतम सीमा
नई इकाई — प्लांट, मशीनरी, तकनीकी सिविल कार्य35%₹5 करोड़ [1][2]
विस्तार, आधुनिकीकरण, उन्नयन35%₹1 करोड़ [2][4]
कोल्ड चेन और वैल्यू एडिशन इंफ्रास्ट्रक्चर35%₹10 करोड़ [4]
फ्रोज़न स्टोरेज, डीप फ्रीज़र, इरेडिएशन जैसी सुविधाएँपरियोजना लागत का 50%₹10 करोड़ [3]
एग्रो प्रोसेसिंग क्लस्टर (न्यूनतम 5 इकाइयाँ, ₹25 करोड़ निवेश)पात्र लागत का 35%₹10 करोड़ [3]
बैकवर्ड-फॉरवर्ड लिंकेज (संग्रह केंद्र, वितरण हब आदि)पात्र लागत का 35%₹5 करोड़ [3]
SHG/FPO/किसानों की विकेंद्रीकृत प्रोसेसिंग व भंडारणपरियोजना लागत का 50%₹50 लाख [3]
कृषि वैल्यू चेन से जुड़े टेक स्टार्ट-अप प्रोजेक्ट—प्रति प्रोजेक्ट ₹5 करोड़ [3]

विस्तार परियोजनाओं के लिए नवंबर 2022 के अंग्रेज़ी नीति दस्तावेज़ में 25% दर लिखी है, जबकि 2 फरवरी 2023 के शासनादेश और Invest UP के सेक्टर पेज पर 35% दर दी गई है [2][3][4]। यहाँ बाद वाले शासनादेश की दर ली गई है।

SHG, FPO और किसानों को मिलने वाला अनुदान दो बराबर किस्तों में देने का प्रावधान है: पहली किस्त परियोजना के बीच में और दूसरी इकाई चालू होने पर [2][3]।

ब्याज सब्सिडी

रीफर वाहन (Reefer Vehicle) और मोबाइल प्री-कूलिंग वैन खरीदने के लिए लिए गए ऋण के ब्याज की प्रतिपूर्ति (Interest Subsidy) पाँच साल तक करने का प्रावधान है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹50 लाख है [2][3]।

ऊर्जा और निर्यात

  • सोलर सब्सिडी: औद्योगिक क्षेत्रों से बाहर स्थित खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को 75 kVA तक के सोलर पावर प्लांट की लागत पर 50% सब्सिडी का प्रावधान है। पूरी तरह महिलाओं के स्वामित्व और संचालन वाली इकाइयों के लिए यह दर 90% है [3]।
  • निर्यात भाड़ा सब्सिडी (Freight Subsidy): उत्तर प्रदेश में उत्पादन स्थल से आयातक देश के बंदरगाह तक परिवहन की वास्तविक लागत का 25% प्रतिपूर्ति के रूप में देने का प्रावधान है। नेपाल, बांग्लादेश और भूटान को होने वाला निर्यात इसमें शामिल नहीं है [3]।

मंडी शुल्क और सेस में छूट

  • दूसरे राज्यों से प्रोसेसिंग के लिए लाई गई कृषि उपज पर मंडी शुल्क (Mandi Fee) और सेस से छूट [3][5]
  • किसानों द्वारा सीधे प्रोसेसिंग इकाई को बेची गई उपज पर मंडी शुल्क और सेस से छूट [3][5]
  • मंडी शुल्क और सेस के लिए पूरे प्रदेश को खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के लिए एक बाज़ार क्षेत्र माना जाएगा [3]

इन छूटों से मंडी परिषद को होने वाली राजस्व हानि की भरपाई खाद्य प्रसंस्करण विभाग के बजट से करने की व्यवस्था है [5]।

भूमि से जुड़ी रियायतें

  • इकाई के लिए खरीदी गई भूमि पर स्टाम्प शुल्क (Stamp Duty) से 100% छूट [1][4]
  • 12.5 एकड़ से अधिक कृषि भूमि खरीदने की अनुमति; 20 हेक्टेयर तक ज़िलाधिकारी, 40 हेक्टेयर तक मंडलायुक्त और उससे ऊपर राज्य सरकार 45 दिन में निर्णय लेंगे, अन्यथा अनुमति मानी हुई (Deemed) समझी जाएगी [3]
  • भूमि को गैर-कृषि घोषित कराने पर सर्किल रेट के 2% शुल्क में छूट [1][4]
  • भू-उपयोग परिवर्तन (CLU) शुल्क में 50% छूट [1][4]
  • जहाँ प्राधिकरण ने विकास कार्य नहीं किया, वहाँ बाह्य विकास शुल्क (External Development Charges) में 75% छूट [1][4]

आवेदन कैसे करें

नीति के क्रियान्वयन दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रक्रिया मोटे तौर पर इस तरह है [2][3]:

  • विभाग विज्ञापन प्रकाशित करके आवेदन आमंत्रित करता है। इसलिए उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की सूचनाओं पर नज़र रखें।
  • प्राप्त प्रस्तावों का परीक्षण राज्य स्तरीय मूल्यांकन समिति (State Level Appraisal Committee) करती है, जिसकी अध्यक्षता प्रमुख सचिव, खाद्य प्रसंस्करण करते हैं।
  • नीति के तहत अंतिम निर्णय राज्य स्तरीय अधिकार प्राप्त समिति (State Level Empowered Committee) लेती है, जिसके अध्यक्ष कृषि उत्पादन आयुक्त हैं।
  • स्वीकृति के बाद लेटर ऑफ कम्फर्ट/लेटर ऑफ सैंक्शन जारी किया जाता है।
  • विभाग द्वारा सूचीबद्ध (Empanelled) संस्थान परियोजना का मूल्यांकन और पूरे हुए कार्य का सत्यापन करते हैं, जिसके बाद भुगतान होता है।
  • इकाई से जुड़ी सामान्य मंज़ूरियाँ (NOC, लाइसेंस आदि) राज्य के पोर्टल निवेश मित्र पर ऑनलाइन आवेदन करके ली जाती हैं। इसकी पूरी प्रक्रिया हमारी गाइड निवेश मित्र 3.0 में है।

नीति से जुड़े सभी शासनादेश, अंग्रेज़ी नीति दस्तावेज़ और क्रियान्वयन दिशा-निर्देश Invest UP के नीति पेज पर उपलब्ध हैं। इस पेज पर दिशा-निर्देशों का एक दस्तावेज़ अक्टूबर 2025 में अपडेट किया गया है [1], इसलिए आवेदन से पहले नवीनतम दिशा-निर्देश ज़रूर पढ़ें। जानकारी के लिए Invest UP हेल्पडेस्क (+91 522 6923000) से भी संपर्क किया जा सकता है [1]।

ध्यान रखने वाली बातें

  • सही श्रेणी चुनें: नई इकाई और विस्तार परियोजना की सब्सिडी सीमा अलग है (₹5 करोड़ बनाम ₹1 करोड़)। परियोजना रिपोर्ट उसी हिसाब से बनाएँ।
  • खर्च का रिकॉर्ड रखें: सब्सिडी प्लांट, मशीनरी और तकनीकी सिविल कार्य पर किए गए खर्च पर आधारित है और तृतीय पक्ष सत्यापन होता है, इसलिए बिल, भुगतान और कार्य प्रगति का पूरा रिकॉर्ड रखें।
  • किसानों से सीधा जुड़ाव: किसानों से सीधी खरीद पर मंडी शुल्क और सेस की छूट है, इसलिए FPO और किसान समूहों के साथ खरीद व्यवस्था बनाना फ़ायदेमंद हो सकता है।
  • छोटे प्रोजेक्ट के लिए केंद्रीय योजना: नीति के प्रख्यापन आदेश में उल्लेख है कि छोटी परियोजनाओं के लिए ₹10 लाख तक का अनुदान प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) में अनुमन्य है [5]।
  • ज़िले का उत्पाद: अगर आपका उत्पाद आपके ज़िले के ODOP उत्पाद से जुड़ा है, तो हमारी ODOP गाइड भी देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

खाद्य प्रसंस्करण नीति 2023 कब तक लागू है?

2 फरवरी 2023 के शासनादेश के अनुसार नीति तत्काल प्रभाव से लागू हुई और इसकी अवधि अगले 5 वर्ष या नई नीति आने तक रखी गई है [2]। सितंबर 2026 में भी इस नीति के तहत राज्य स्तरीय अधिकार प्राप्त समिति (SLEC) की 22वीं बैठक की ख़बर आई है [6]।

नई इकाई को अधिकतम कितनी पूँजीगत सब्सिडी मिल सकती है?

नई खाद्य प्रसंस्करण इकाई को प्लांट, मशीनरी और तकनीकी सिविल कार्य पर हुए खर्च का 35%, अधिकतम ₹5 करोड़, देने का प्रावधान है। यह सीमा प्रदेश के सभी ज़िलों में एक समान है [3]।

क्या महिला उद्यमियों के लिए कोई विशेष प्रावधान है?

हाँ। औद्योगिक क्षेत्र से बाहर स्थित इकाइयों के लिए 75 kVA तक के सोलर प्लांट पर सामान्य दर 50% है, जबकि पूरी तरह महिलाओं के स्वामित्व और संचालन वाली इकाइयों के लिए 90% सब्सिडी का प्रावधान है [3]।

मंडी शुल्क की छूट किस उपज पर लागू है?

किसानों से सीधे खरीदी गई उपज और दूसरे राज्यों से प्रोसेसिंग के लिए लाई गई कृषि उपज पर मंडी शुल्क और सेस से छूट का प्रावधान है [3][5]।

FPO या स्वयं सहायता समूह इस नीति का लाभ कैसे ले सकते हैं?

SHG, FPO और किसान विकेंद्रीकृत खरीद, प्रोसेसिंग और भंडारण (जैसे माइक्रो स्टोरेज) की परियोजना पर परियोजना लागत के 50% या ₹50 लाख तक के अनुदान के पात्र हैं। अनुदान दो बराबर किस्तों में देने का प्रावधान है [3]।

स्रोत

मुख्य आधिकारिक स्रोत: उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति 2023 — क्रियान्वयन दिशा-निर्देश शासनादेश (Invest UP) — मूल दस्तावेज़ देखें
यह गाइड आधिकारिक दस्तावेज़ों के आधार पर तैयार की गई है; हर तथ्य का स्रोत लेख के अंत में दिया गया है। नीतियाँ समय-समय पर बदलती हैं, इसलिए आवेदन से पहले नवीनतम आधिकारिक अधिसूचना ज़रूर देखें। किसी त्रुटि की सूचना [email protected] पर "सुधार" विषय के साथ दें।

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