यूपी फार्मास्युटिकल एवं मेडिकल डिवाइस उद्योग नीति 2023: पात्रता, सब्सिडी, पार्क और आवेदन
उत्तर प्रदेश फार्मास्युटिकल एवं मेडिकल डिवाइस उद्योग नीति 2023 दवा और चिकित्सा उपकरण बनाने वाली इकाइयों तथा फार्मा पार्क विकसित करने वालों के लिए राज्य की सेक्टर-विशेष नीति है। इसमें पूँजीगत सब्सिडी, ब्याज सब्सिडी, स्टांप ड्यूटी और बिजली शुल्क में छूट के साथ अनुसंधान, पेटेंट और गुणवत्ता प्रमाणन पर प्रतिपूर्ति के प्रावधान हैं।

- पात्र इकाइयों के लिए निवेश के 15% के बराबर पूँजीगत सब्सिडी का प्रावधान, अधिकतम ₹200 करोड़, पाँच सालाना किस्तों में
- बिजली शुल्क में 10 साल तक 100% छूट और स्टांप ड्यूटी में 100% छूट
- बुंदेलखंड और पूर्वांचल की इकाइयों को प्लांट-मशीनरी ऋण पर 7 साल तक 2% सालाना अतिरिक्त ब्याज सब्सिडी
- कम से कम 10 एकड़ के हॉरिज़ॉन्टल और 3 एकड़ के वर्टिकल फार्मा पार्क के डेवलपर्स के लिए अलग पैकेज
- नोडल एजेंसी खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA); निवेश का इरादा निवेश सारथी पोर्टल पर और मंज़ूरियाँ निवेश मित्र पर
उत्तर प्रदेश फार्मास्युटिकल एवं मेडिकल डिवाइस उद्योग नीति 2023 राज्य में दवाएँ, बल्क ड्रग और चिकित्सा उपकरण बनाने वाली इकाइयों को आकर्षित करने के लिए बनी सेक्टर-विशेष नीति है। सबसे काम की बात यह है कि इसमें निवेश के 15% के बराबर पूँजीगत सब्सिडी के साथ-साथ अनुसंधान (R&D), क्लिनिकल ट्रायल, पेटेंट और गुणवत्ता प्रमाणन जैसे खर्चों पर भी अलग से प्रतिपूर्ति का प्रावधान है, जो दवा उद्योग की असली ज़रूरतों से जुड़े हैं [1]। यह नीति राज्य की 2018 की फार्मास्युटिकल उद्योग नीति के बाद आई है और Invest UP की नीतियों की सूची में दर्ज है; इसका नीति पेज 2 जून 2026 को अपडेट हुआ था और वहाँ किसी संशोधन या नई नीति का उल्लेख नहीं है [1][7]।
एक नज़र में
इस गाइड के आँकड़े Invest UP के नीति-पेज पर दिए सारांश से लिए गए हैं [1]। अधिसूचित नीति का पूरा पाठ ऑनलाइन पढ़ने योग्य रूप में उपलब्ध नहीं है, इसलिए आवेदन से पहले खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) या Invest UP से नवीनतम शर्तें ज़रूर मिला लें।
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| नीति का नाम | उत्तर प्रदेश फार्मास्युटिकल एवं मेडिकल डिवाइस उद्योग नीति, 2023 [1] |
| पहले की नीति | उत्तर प्रदेश फार्मास्युटिकल उद्योग नीति, 2018 [7] |
| नोडल एजेंसी | खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) [1] |
| इकाइयों की श्रेणियाँ | MSME, बड़ी (Large) और मेगा (Mega) [1] |
| पूँजीगत सब्सिडी | निवेश का 15%, अधिकतम ₹200 करोड़, 5 सालाना किस्तों में [1] |
| बिजली शुल्क | 10 साल तक 100% छूट [1] |
| स्टांप ड्यूटी | 100% छूट [1] |
| फार्मा पार्क की न्यूनतम ज़मीन | हॉरिज़ॉन्टल पार्क 10 एकड़, वर्टिकल पार्क 3 एकड़ [1] |
| प्रमुख पार्क | ललितपुर फार्मा पार्क (UPSIDA), YEIDA मेडिकल डिवाइस पार्क (सेक्टर 28) [4][5] |
किसके लिए है
Invest UP के अनुसार यह नीति दवा बनाने वाली इकाइयों, चिकित्सा उपकरण (Medical Device) बनाने वाली इकाइयों और फार्मा व मेडिकल डिवाइस पार्क विकसित करने वाले डेवलपर्स व एंकर इकाइयों के लिए है। नई (Greenfield) परियोजनाओं के साथ पात्र विस्तार (Brownfield Expansion) परियोजनाएँ भी इसके दायरे में बताई गई हैं [2]।
इकाइयों को पूँजी निवेश के हिसाब से तीन श्रेणियों में बाँटा गया है [1]:
- MSME इकाई: भारत सरकार की MSME परिभाषा के अनुसार
- बड़ी इकाई (Large): पूँजी निवेश MSME सीमा से अधिक और ₹100 करोड़ से कम
- मेगा इकाई (Mega): पूँजी निवेश ₹100 करोड़ से अधिक
स्टार्टअप्स के प्रोत्साहन के लिए Invest UP के नीति-सार में राज्य की स्टार्टअप नीति 2022 का हवाला दिया गया है [1]।
क्या-क्या प्रोत्साहन / लाभ मिलते हैं
दवा और चिकित्सा उपकरण इकाइयों के लिए
| प्रोत्साहन | प्रावधान |
|---|---|
| पूँजीगत सब्सिडी (Capital Subsidy) | निवेश का 15%, अधिकतम ₹200 करोड़, 5 सालाना किस्तों में [1] |
| प्लांट-मशीनरी ऋण पर ब्याज सब्सिडी (Interest Subsidy) | 5 साल तक 5% सालाना, अधिकतम ₹1 करोड़ प्रति वर्ष प्रति इकाई [1] |
| बुंदेलखंड और पूर्वांचल के लिए अतिरिक्त | 7 साल तक 2% सालाना अतिरिक्त ब्याज सब्सिडी [1] |
| स्व-उपयोग वाले भवन ढाँचे के ऋण पर | 5 साल तक 5% सालाना, अधिकतम ₹1 करोड़ प्रति वर्ष प्रति इकाई [1] |
| अनुसंधान गुणवत्ता सुधार के ऋण पर | 5 साल तक 50% सालाना ब्याज सब्सिडी, अधिकतम ₹2 करोड़ प्रति इकाई [1] |
| बिजली शुल्क (Electricity Duty) | 10 साल तक 100% छूट [1] |
| स्टांप ड्यूटी (Stamp Duty) | 100% छूट [1] |
पर्यावरण, गुणवत्ता और कौशल
- कचरा प्रबंधन (Waste Management): कचरा प्रबंधन व्यवस्था लगाने के लिए उठाए गए ऋण पर 5 साल तक 50% सालाना ब्याज सब्सिडी, अधिकतम ₹10 लाख [1]
- कॉमन बॉयलर: ठोस ईंधन वाले बॉयलर के लिए स्थायी स्थापना लागत का 35% और स्वच्छ ईंधन (Clean Fuel) वाले के लिए 50%, अधिकतम ₹2 करोड़ [1]
- पेटेंट फाइलिंग: घरेलू पेटेंट के वास्तविक खर्च की 100% और अंतरराष्ट्रीय पेटेंट की 50% प्रतिपूर्ति [1]
- गुणवत्ता प्रमाणन (Quality Certification): ISO प्रमाणन के खर्च का 75% और BIS प्रमाणन के खर्च का 50% [1]
- कौशल विकास (Skill Development): NAPS और CMAPS के तहत प्रशिक्षण पर 6 महीने का स्टाइपेंड वापस, अधिकतम 10 प्रशिक्षुओं के लिए [1]
अनुसंधान और नवाचार (R&D)
- R&D संस्थान की स्थापना: इसके लिए उठाए गए ऋण के सालाना ब्याज की 60% प्रतिपूर्ति [1]
- क्लिनिकल ट्रायल: कुल खर्च की 75% प्रतिपूर्ति [1]
- कॉन्ट्रैक्ट या प्रायोजित अनुसंधान (Sponsored Research): उत्तर प्रदेश में स्थित संस्थानों के साथ किए गए शोध पर पात्र परियोजना लागत का 50% [1]
बल्क ड्रग पार्क और मेडिकल डिवाइस पार्क में लगने वाली इकाइयाँ
इन पार्कों में लगने वाली इकाइयों के लिए विशेष पैकेज का प्रावधान है, जिसमें 10 साल तक ब्याज सब्सिडी शामिल है। साथ ही एयर कार्गो हैंडलिंग और माल-भाड़ा (Freight) शुल्क पर प्रोत्साहन का प्रावधान है, जिसकी दर राज्य सरकार समय-समय पर तय करती है [1]।
फार्मा पार्क डेवलपर्स के लिए
यह पैकेज कम से कम 10 एकड़ के हॉरिज़ॉन्टल पार्क और कम से कम 3 एकड़ के वर्टिकल पार्क पर लागू है [1]।
| प्रोत्साहन | प्रावधान |
|---|---|
| ज़मीन के लिए उठाए गए ऋण पर ब्याज सब्सिडी | 7 साल तक 50% सालाना, अधिकतम ₹1 करोड़ प्रति वर्ष प्रति पार्क [1] |
| बुनियादी ढाँचे (Infrastructure) के ऋण पर | 7 साल तक 60% सालाना, अधिकतम ₹50 करोड़ प्रति पार्क [1] |
| साझा सुविधाओं (Common Facility) के ऋण पर | 7 साल तक 60% सालाना, अधिकतम ₹30 करोड़ प्रति पार्क [1] |
| पूँजीगत सब्सिडी | साझा ढाँचे और यूटिलिटी में स्थायी पूँजी निवेश का 25%, अधिकतम ₹25 करोड़, 5 साल में [1] |
| स्टांप ड्यूटी | डेवलपर को 100% और इकाइयों को 50% छूट [1] |
| CETP / कचरा प्रबंधन अनुदान | परियोजना लागत का 40%, अधिकतम ₹10 करोड़; केंद्र और राज्य की कुल सहायता स्थायी पूँजी निवेश के 75% से अधिक नहीं [1] |
प्रमुख फार्मा और मेडिकल डिवाइस पार्क
- ललितपुर फार्मा पार्क (UPSIDA): पहले चरण में 352.91 एकड़ ज़मीन फॉर्मूलेशन, बल्क ड्रग और साझा ढाँचे के लिए है। दूसरा चरण 1,465 एकड़ में विकसित हो रहा है, जिसके लिए रुचि पत्र (EOI) जारी किया गया है [4]।
- YEIDA मेडिकल डिवाइस पार्क: यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र के सेक्टर 28 में लगभग 350 एकड़ का पार्क, जिसमें से अनुमानित 195 एकड़ (कुल ज़मीन का लगभग 55%) चिकित्सा उपकरण बनाने वाली इकाइयों को आवंटन के लिए उपलब्ध है [5]। YEIDA के अनुसार केंद्र की "प्रमोशन ऑफ़ मेडिकल डिवाइस पार्क" योजना के तहत इसे केंद्र सरकार से ₹30 करोड़ की अनुदान सहायता (Grant-in-aid) मिली है [5]। पार्क के घटकों में बायोमटीरियल टेस्टिंग लैब, कॉमन टूल रूम, 3D डिज़ाइन व रैपिड प्रोटोटाइपिंग और इलेक्ट्रॉनिक असेंबली जैसी साझा सुविधाएँ शामिल हैं [5]।
- फार्मा फॉर्मूलेशन पार्क: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास सेक्टर 7 में 250 एकड़ का पार्क प्रस्तावित है [4]।
आवेदन कैसे करें
- नीति पढ़ें: पूरी नीति (हिंदी) Invest UP के नीति पेज से डाउनलोड की जा सकती है। हर प्रोत्साहन की शर्तें और दावे की प्रक्रिया वहीं से मिलाएँ [1]।
- निवेश सारथी पर पंजीकरण: निवेश सारथी पोर्टल पर ईमेल से पंजीकरण और सत्यापन के बाद निवेश का इरादा (Investment Intent) दर्ज किया जा सकता है। ₹50 करोड़ से अधिक के प्रस्तावों पर संबंधित विभाग और निवेशक के बीच MoU होता है [6]।
- मंज़ूरियाँ निवेश मित्र से: विभिन्न विभागों की मंज़ूरियों और NOC के लिए आवेदन निवेश मित्र सिंगल विंडो पोर्टल पर होते हैं, जहाँ 45 से ज़्यादा विभागों की लगभग 225 सेवाएँ जुड़ी हैं [3]। इसकी पूरी प्रक्रिया के लिए हमारी गाइड निवेश मित्र 3.0 देखें।
- पार्क में ज़मीन: ललितपुर पार्क के लिए UPSIDA और मेडिकल डिवाइस पार्क के लिए YEIDA की आवंटन योजनाओं पर नज़र रखें [4][5]।
- मदद: Invest UP के मुख्यमंत्री उद्यमी मित्र (Udyami Mitra) निवेशकों को आवेदन से मंज़ूरी तक सहयोग करते हैं। हेल्पडेस्क नंबर +91 522 6923000 है (सोमवार से शनिवार, सुबह 9:30 से शाम 6 बजे) [3]।
ध्यान रखने वाली बातें
- अपनी इकाई की श्रेणी (MSME, बड़ी या मेगा) पहले तय कर लें, क्योंकि यह पूँजी निवेश पर निर्भर है [1]।
- बुंदेलखंड या पूर्वांचल में इकाई लगाने पर प्लांट-मशीनरी ऋण पर अतिरिक्त 2% ब्याज सब्सिडी का प्रावधान है, इसलिए जगह चुनते समय इसे भी गणना में रखें [1]।
- उत्तर प्रदेश के शोध संस्थानों के साथ कॉन्ट्रैक्ट रिसर्च करने पर पात्र परियोजना लागत के 50% तक सहायता का प्रावधान है, इसलिए शोध साझेदारी की योजना बनाते समय इसे ध्यान में रखें [1]।
- राज्य की अन्य नीतियाँ भी देखें, जैसे औद्योगिक निवेश एवं रोज़गार प्रोत्साहन नीति 2022, और नीति की शर्तों के अनुसार अपने लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या यह नीति सिर्फ़ दवा कंपनियों के लिए है?
नहीं। Invest UP के अनुसार इसमें चिकित्सा उपकरण बनाने वाली इकाइयाँ और फार्मा व मेडिकल डिवाइस पार्क के डेवलपर भी शामिल हैं [2]।
पूँजीगत सब्सिडी कितनी है और कैसे मिलती है?
पात्र इकाइयों के लिए निवेश के 15% के बराबर पूँजीगत सब्सिडी का प्रावधान है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹200 करोड़ है। इसे पाँच सालाना किस्तों में देने का प्रावधान है [1]।
नीति की नोडल एजेंसी कौन है?
Invest UP के नीति पेज के अनुसार नोडल एजेंसी खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) है [1]।
फार्मा पार्क बनाने के लिए कितनी ज़मीन चाहिए?
हॉरिज़ॉन्टल फार्मा पार्क के लिए कम से कम 10 एकड़ और वर्टिकल फार्मा पार्क के लिए कम से कम 3 एकड़ ज़मीन ज़रूरी है [1]।
स्रोत
- [1] UP Pharmaceutical and Medical Device Policy, 2023 — Invest UP, उत्तर प्रदेश सरकार (पेज अपडेट 2 जून 2026)
- [2] Uttar Pradesh Pharmaceutical & Medical Device Industry Policy, 2023 — Invest UP
- [3] Uttar Pradesh: India's Next Pharmaceutical Powerhouse — Invest UP (पेज अपडेट 22 अप्रैल 2026)
- [4] प्रेस विज्ञप्ति: यूपी फार्मा कॉन्क्लेव 1.0, लखनऊ — Invest UP, 5 फरवरी 2026
- [5] Medical Device Park — यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA), अक्टूबर 2026
- [6] निवेश सारथी पोर्टल — Invest UP
- [7] Policies & Government Orders — Invest UP
यह गाइड आधिकारिक दस्तावेज़ों के आधार पर तैयार की गई है; हर तथ्य का स्रोत लेख के अंत में दिया गया है। नीतियाँ समय-समय पर बदलती हैं, इसलिए आवेदन से पहले नवीनतम आधिकारिक अधिसूचना ज़रूर देखें। किसी त्रुटि की सूचना [email protected] पर "सुधार" विषय के साथ दें।