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उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा नीति 2022: लक्ष्य, रूफटॉप सब्सिडी, प्रोत्साहन और आवेदन की पूरी जानकारी

UP Corporate News डेस्क • • 10 मिनट

उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा नीति 2022 में वर्ष 2026-27 तक 22,000 मेगावाट सौर क्षमता का लक्ष्य रखा गया है। इसमें घरेलू रूफटॉप पर राज्य अनुदान, बड़ी सौर परियोजनाओं और सोलर पार्कों के लिए भूमि, स्टांप ड्यूटी, विद्युत शुल्क और बैटरी स्टोरेज से जुड़े प्रावधान हैं, जिनके लिए नोडल एजेंसी UPNEDA है।

उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा नीति 2022: लक्ष्य, रूफटॉप सब्सिडी, प्रोत्साहन और आवेदन की पूरी जानकारी
मुख्य बिंदु
  • 2026-27 तक 22,000 मेगावाट सौर क्षमता का लक्ष्य, जिसमें 14,000 मेगावाट यूटिलिटी-स्केल परियोजनाएँ/पार्क शामिल
  • घरेलू ग्रिड-कनेक्टेड रूफटॉप पर ₹15,000 प्रति किलोवाट, अधिकतम ₹30,000 प्रति उपभोक्ता राज्य अनुदान, केंद्रीय सहायता के अतिरिक्त
  • 4 घंटे बैटरी स्टोरेज वाली यूटिलिटी-स्केल परियोजनाओं के लिए ₹2.50 करोड़ प्रति मेगावाट पूँजीगत अनुदान का प्रावधान
  • सौर परियोजना की भूमि पर 100% स्टांप ड्यूटी छूट और 10 वर्ष तक विद्युत शुल्क छूट
  • UPNEDA सभी प्रकार की सौर परियोजनाओं के लिए सिंगल विंडो; पंजीकरण सौर उत्तर प्रदेश पोर्टल पर

उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा नीति 2022 राज्य में सौर बिजली को घरों की छत से लेकर बड़े सोलर पार्क तक फैलाने का रोडमैप है। नीति वर्ष 2026-27 तक 22,000 मेगावाट सौर क्षमता का लक्ष्य रखती है, और इसका सबसे सीधा लाभ आम परिवारों के लिए यह है कि घर की छत पर ग्रिड से जुड़ा सोलर सिस्टम लगाने पर केंद्र की सहायता के साथ राज्य सरकार का अलग अनुदान भी मिलने का प्रावधान है [1]। उद्योगों और डेवलपर्स के लिए भूमि, शुल्क-छूट और बैटरी स्टोरेज से जुड़े प्रोत्साहन तय हैं।

एक नज़र में

बिंदुजानकारी
नीति का नामउत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा नीति-2022 [1]
नोडल एजेंसीउत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (UPNEDA) [1]
अवधिजारी होने की तिथि से 5 वर्ष, या नई नीति अधिसूचित होने तक, जो पहले हो [1]
कुल लक्ष्य2026-27 तक 22,000 मेगावाट [1]
घरेलू रूफटॉप पर राज्य अनुदान₹15,000 प्रति किलोवाट, अधिकतम ₹30,000 प्रति उपभोक्ता [1][4]
बैटरी स्टोरेज अनुदान₹2.50 करोड़ प्रति मेगावाट (शर्तों के साथ) [1][2]
स्टांप ड्यूटीसौर परियोजना/पार्क की भूमि पर 100% छूट [1][2]
विद्युत शुल्क (Electricity Duty)10 वर्ष तक छूट [1][2]
कौशल विकास5 वर्ष में 30,000 युवाओं को "सूर्य मित्र" प्रशिक्षण [1][2]

नीति के अनुसार यह जारी होने की तिथि से पाँच वर्ष तक प्रभावी है। UPNEDA की वेबसाइट पर नीति के साथ इसके क्रियान्वयन से जुड़े शासनादेश (GO) सूचीबद्ध हैं, जिनमें 2023 का एक "आंशिक संशोधन" शासनादेश भी शामिल है; किसी भी प्रावधान पर अंतिम निर्णय से पहले यह सूची देख लेना उपयोगी है [3]।

लक्ष्य का बँटवारा

श्रेणीलक्ष्य
यूटिलिटी-स्केल सौर परियोजनाएँ/पार्क14,000 मेगावाट
रूफटॉप — आवासीय4,500 मेगावाट
रूफटॉप — गैर-आवासीय संस्थान1,500 मेगावाट
वितरित उत्पादन (पीएम कुसुम C1 और C2)2,000 मेगावाट

स्रोत: नीति का खंड 5 [1]। इसके अलावा अयोध्या को मॉडल सोलर सिटी के रूप में विकसित करने और उसके बाद 16 नगर निगमों व नोएडा को सोलर सिटी बनाने की योजना है; सोलर सिटी में 13.50 लाख घरों पर रूफटॉप सोलर का लक्ष्य रखा गया है [1][2]।

किसके लिए है

  • घरेलू उपभोक्ता: जिनके पास वैध बिजली कनेक्शन और सोलर पैनल के लायक अपनी छत है। केंद्र की पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना की पात्रता में यह भी शर्त है कि परिवार ने पहले सोलर पैनल के लिए कोई अन्य सब्सिडी न ली हो [6]।
  • सरकारी और शैक्षणिक भवन: राज्य/केंद्र सरकार के भवन तथा केंद्र या राज्य सरकार के नियामक निकायों के दायरे में आने वाले सभी श्रेणियों के सरकारी और गैर-सरकारी शैक्षणिक संस्थान, जिन्हें नेट मीटरिंग की सुविधा का प्रावधान है [1]।
  • उद्योग और वाणिज्यिक उपभोक्ता: इनके लिए नेट बिलिंग (Net Billing) की सुविधा का प्रावधान है [1]।
  • सौर परियोजना और सोलर पार्क डेवलपर: UPPCL को बिजली बेचने, ओपन एक्सेस में तीसरे पक्ष को बेचने या 100% कैप्टिव/ग्रुप कैप्टिव उपयोग के लिए परियोजना लगाने वाली कंपनियाँ; पार्क निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों में [1]।
  • सौर उपकरण निर्माता: सोलर उपकरणों की मैन्युफैक्चरिंग इकाइयाँ [1]।

क्या-क्या प्रोत्साहन / लाभ मिलते हैं

घर की छत पर सोलर (Residential Rooftop)

नीति के खंड 7.3 के अनुसार ग्रिड से जुड़े आवासीय रूफटॉप सिस्टम पर राज्य सरकार ₹15,000 प्रति किलोवाट, अधिकतम ₹30,000 प्रति उपभोक्ता अनुदान देती है। यह राशि सिस्टम चालू होने के बाद प्रतिपूर्ति के रूप में दी जाती है और केंद्र की सहायता के अतिरिक्त है [1]। UPNEDA के रूफटॉप FAQ में भी यही राशि केंद्रीय सब्सिडी के अतिरिक्त बताई गई है [4]।

केंद्र की पीएम सूर्य घर योजना में मासिक खपत के आधार पर सहायता इस प्रकार है [6]:

औसत मासिक खपतउपयुक्त क्षमताकेंद्रीय सहायता
0–150 यूनिट1–2 किलोवाट₹30,000 से ₹60,000
150–300 यूनिट2–3 किलोवाट₹60,000 से ₹78,000
300 यूनिट से अधिक3 किलोवाट से अधिक₹78,000

आवासीय उपभोक्ताओं के लिए नेट मीटरिंग, यानी अतिरिक्त बिजली ग्रिड को देने और केवल शुद्ध खपत का बिल भरने की व्यवस्था, UPERC के नियमों के अनुसार उपलब्ध है [1][4]।

बड़ी सौर परियोजनाएँ (Utility-Scale) और ओपन एक्सेस

  • न्यूनतम क्षमता: ग्रिड से जुड़ी यूटिलिटी-स्केल परियोजना एक स्थान पर कम से कम 5 मेगावाट [1]।
  • ट्रांसमिशन लाइन सहायता: बुंदेलखंड और पूर्वांचल में 5 मेगावाट और उससे बड़ी स्टैंडअलोन परियोजनाओं के लिए राज्य तय लंबाई तक लाइन का खर्च वहन करेगा — 5–10 मेगावाट पर 10 किमी, 10–50 मेगावाट पर 15 किमी और 50 मेगावाट से ऊपर 20 किमी [1]।
  • व्हीलिंग/ट्रांसमिशन शुल्क (Wheeling Charges): 1 मेगावाट से बड़ी ओपन एक्सेस परियोजनाओं में राज्य के भीतर तीसरे पक्ष को बिक्री या कैप्टिव उपयोग पर 50% छूट [1]।
  • एनर्जी बैंकिंग (Banking): हर वित्त वर्ष 100% तक, परियोजना की उपयोगी आयु या 25 वर्ष (जो कम हो) तक, UPERC नियमों के अनुसार [1]।
  • ग्रिड कनेक्टिविटी: नोडल एजेंसी में पंजीकरण के 90 दिन के भीतर STU से ग्रिड कनेक्टिविटी का प्रावधान [1]।

भूमि, स्टांप ड्यूटी और विद्युत शुल्क

प्रोत्साहनप्रावधान
सरकारी भूमि — निजी क्षेत्र₹15,000 प्रति एकड़ प्रति वर्ष, 30 वर्ष की लीज़ [1]
सरकारी भूमि — राज्य/केंद्र के उपक्रम₹1 प्रति एकड़ प्रति वर्ष, 30 वर्ष की लीज़ [1]
भूमि की अधिकतम सीमा5 एकड़ प्रति मेगावाट [1]
स्टांप ड्यूटी (Stamp Duty)सौर परियोजना/पार्क की भूमि पर 100% छूट [1][2]
विद्युत शुल्कडिस्कॉम, तीसरे पक्ष और कैप्टिव उपयोग, तीनों पर 10 वर्ष छूट [1]

लीज़ पर मिली भूमि हस्तांतरणीय नहीं है और तीन वर्ष में काम शुरू न होने पर वापस ली जा सकती है [1]।

बैटरी स्टोरेज, सोलर पार्क और मैन्युफैक्चरिंग

  • बैटरी स्टोरेज पूँजीगत अनुदान (Capital Subsidy): 5 मेगावाट या अधिक क्षमता के 4 घंटे बैटरी स्टोरेज वाली यूटिलिटी-स्केल परियोजनाओं और सौर ऊर्जा से चार्ज होने वाले स्टैंडअलोन बैटरी स्टोरेज के लिए ₹2.50 करोड़ प्रति मेगावाट, जब बिजली डिस्कॉम/UPPCL को बेची जाए [1]।
  • निजी सोलर पार्क: न्यूनतम 1 मेगावाट से 100% बिजली ओपन एक्सेस में तीसरे पक्ष को बेचने की अनुमति, ₹15,000 प्रति एकड़ प्रति वर्ष पर 30 वर्ष की भूमि लीज़ और अल्ट्रा मेगा सोलर पार्क का दर्जा पाने में सहयोग [1]।
  • सार्वजनिक क्षेत्र के पार्क: राजस्व भूमि ₹1 प्रति एकड़ प्रति वर्ष पर 30 वर्ष के लिए [1]।
  • सौर उपकरण निर्माण: निवेश के प्रकार के अनुसार राज्य की MSME नीति और औद्योगिक निवेश एवं रोज़गार प्रोत्साहन नीति के तहत प्रोत्साहन [1]। इनके विवरण के लिए देखें औद्योगिक निवेश एवं रोज़गार प्रोत्साहन नीति 2022।

आवेदन कैसे करें

घर की छत पर सोलर के लिए

  • पीएम सूर्य घर नेशनल पोर्टल पर मोबाइल और ईमेल OTP से पंजीकरण करें [5][9]।
  • राज्य, ज़िला, डिस्कॉम और उपभोक्ता संख्या भरकर "Apply for Solar Rooftop" के तहत आवेदन करें; चाहें तो यह आवेदन पंजीकृत वेंडर से भी भरवा सकते हैं [9]।
  • व्यवहार्यता (Feasibility) स्वीकृति मिलने पर वेंडर चुनें और बैंक विवरण जमा करें [9]।
  • स्थापना के बाद डिस्कॉम निरीक्षण करता है और नेट मीटर लगता है; इसके बाद सब्सिडी के लिए दावा किया जाता है [4][9]।
  • UPNEDA की स्वीकृत फर्मों की सूची सोलर रूफटॉप पोर्टल पर देखी जा सकती है [8]।

नीति में तय समय-सीमा के अनुसार संयुक्त कमीशनिंग रिपोर्ट (JCR) के 30 दिन में केंद्रीय सहायता और 15 दिन में राज्य सहायता जारी होने का प्रावधान है [1]।

परियोजना डेवलपर और निवेशकों के लिए

  • UPNEDA के सौर उत्तर प्रदेश पोर्टल पर "Organization/Individual" के रूप में पंजीकरण करें; ईमेल और मोबाइल OTP से सत्यापित होते हैं [7]।
  • पोर्टल पर अपनी परियोजना की श्रेणी चुनें — UPPCL के साथ PPA, ओपन एक्सेस, सार्वजनिक/निजी सोलर पार्क, स्टोरेज वाली परियोजना या फ्लोटिंग सोलर; सरकारी भवनों पर रूफटॉप के लिए अलग खंड है [7]।
  • UPNEDA सभी प्रकार की सौर परियोजनाओं के लिए सिंगल विंडो के रूप में काम करता है। डेवलपर को समय-समय पर तय पंजीकरण शुल्क देना होता है, और UPNEDA का पंजीकरण प्रमाणपत्र डिस्कॉम, ट्रांसमिशन और राजस्व जैसे विभागों से समन्वय में मदद करता है [1]।
  • राज्य स्तर की अन्य निवेश स्वीकृतियों के लिए निवेश मित्र 3.0 की जानकारी भी उपयोगी है।

ध्यान रखने वाली बातें

  • घरेलू राज्य अनुदान ₹15,000 प्रति किलोवाट है और इसकी ऊपरी सीमा ₹30,000 प्रति उपभोक्ता है, यानी 2 किलोवाट से बड़ा सिस्टम लगाने पर भी राज्य अनुदान ₹30,000 तक ही रहता है [1]।
  • राज्य अनुदान ग्रिड से जुड़े और नेट मीटर वाले सिस्टम के लिए है, इसलिए डिस्कॉम निरीक्षण और नेट मीटरिंग की प्रक्रिया पूरी कराएँ [1][4]।
  • सरकारी/शैक्षणिक संस्थान किराये के निजी भवन में चल रहे हों तो नेट मीटरिंग की अनुमति नहीं है [1]।
  • रूफटॉप से जुड़ी जानकारी के लिए UPNEDA सूर्य घर हेल्पलाइन 155243 (सोमवार से शनिवार) और शिकायत के लिए 1800 180 0005 पर संपर्क किया जा सकता है [8]।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या राज्य का अनुदान पीएम सूर्य घर की सब्सिडी के साथ मिलता है?

हाँ, नीति के अनुसार ₹15,000 प्रति किलोवाट (अधिकतम ₹30,000) का राज्य अनुदान केंद्र की सहायता के अतिरिक्त है। UPNEDA केंद्रीय सहायता जारी होने के बाद पात्र उपभोक्ताओं को राज्य अनुदान देता है [1][5]।

3 किलोवाट का सिस्टम लगाने पर कुल कितनी सहायता का प्रावधान है?

केंद्र की तालिका में 2–3 किलोवाट पर ₹60,000 से ₹78,000 और 3 किलोवाट से अधिक पर ₹78,000 का प्रावधान है [6]। राज्य अनुदान अधिकतम ₹30,000 तक है [1]। अंतिम राशि स्वीकृत क्षमता और पोर्टल पर स्वीकृति पर निर्भर करती है।

यह नीति कब तक लागू है?

नीति जारी होने की तिथि से पाँच वर्ष तक, या नई नीति अधिसूचित होने तक (जो पहले हो), प्रभावी है [1]। इसके क्रियान्वयन और संशोधन से जुड़े शासनादेश UPNEDA की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं [3]।

सोलर उपकरण बनाने वाली फैक्टरी को कौन-से प्रोत्साहन मिलते हैं?

सौर नीति स्वयं अलग राशि तय नहीं करती; निवेश के आकार के अनुसार राज्य की MSME नीति या औद्योगिक निवेश एवं रोज़गार प्रोत्साहन नीति के प्रोत्साहन लागू होते हैं [1]।

स्रोत

मुख्य आधिकारिक स्रोत: उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा नीति-2022 — UPNEDA — मूल दस्तावेज़ देखें
यह गाइड आधिकारिक दस्तावेज़ों के आधार पर तैयार की गई है; हर तथ्य का स्रोत लेख के अंत में दिया गया है। नीतियाँ समय-समय पर बदलती हैं, इसलिए आवेदन से पहले नवीनतम आधिकारिक अधिसूचना ज़रूर देखें। किसी त्रुटि की सूचना [email protected] पर "सुधार" विषय के साथ दें।

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