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उत्तर प्रदेश वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स नीति 2022: पात्रता, सब्सिडी और आवेदन की जानकारी

UP Corporate News डेस्क • • 10 मिनट

उत्तर प्रदेश वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स नीति 2022 वेयरहाउस, साइलो, कोल्ड चेन, ड्राई पोर्ट, लॉजिस्टिक्स पार्क, ट्रकर्स पार्क और कार्गो व बर्थिंग टर्मिनल जैसी परियोजनाओं के लिए स्टांप ड्यूटी छूट, पूँजीगत सब्सिडी और बिजली शुल्क छूट जैसे प्रोत्साहनों का प्रावधान करती है। भंडारण सुविधाओं, ड्राई पोर्ट और लॉजिस्टिक्स पार्क के लिए नोडल एजेंसी UPSIDA है, जहाँ आवेदन पर यूनिक आईडी जारी होती है।

उत्तर प्रदेश वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स नीति 2022: पात्रता, सब्सिडी और आवेदन की जानकारी
मुख्य बिंदु
  • वेयरहाउस (1 लाख वर्ग फुट, ₹20 करोड़), साइलो, कोल्ड चेन, ICD/CFS, लॉजिस्टिक्स पार्क (25 एकड़) और ट्रकर्स पार्क पात्र
  • भंडारण सुविधाओं को 15% पूँजीगत सब्सिडी, अधिकतम ₹5 करोड़ (लॉजिस्टिक्स ज़ोन में ₹10 करोड़)
  • ड्राई पोर्ट और लॉजिस्टिक्स पार्क को 25% पूँजीगत सब्सिडी, अधिकतम ₹25 करोड़ (लॉजिस्टिक्स ज़ोन में ₹50 करोड़)
  • 10 वर्ष तक 100% बिजली शुल्क छूट और भूमि उपयोग परिवर्तन व विकास शुल्क में 75% छूट
  • नोडल एजेंसी UPSIDA; नीति अधिसूचना से 5 वर्ष तक प्रभावी

उत्तर प्रदेश वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स नीति 2022 राज्य में आधुनिक भंडारण और माल-परिवहन ढाँचा खड़ा करने वाले निवेशकों के लिए बनाई गई प्रोत्साहन नीति है। इसमें बड़े वेयरहाउस, साइलो, कोल्ड चेन, ड्राई पोर्ट, लॉजिस्टिक्स पार्क, ट्रकर्स पार्क और जलमार्ग व रेल कार्गो टर्मिनल जैसी परियोजनाओं के लिए स्टांप ड्यूटी छूट, पूँजीगत सब्सिडी (Capital Subsidy) और बिजली शुल्क छूट का प्रावधान है [1]। सबसे काम की बात: भंडारण, ड्राई पोर्ट या लॉजिस्टिक्स पार्क परियोजना में छूट (फ्रंट-एंड लाभ) पाने के लिए सबसे पहले नोडल एजेंसी UPSIDA से परियोजना की "यूनिक आईडी" लेनी होती है [1]।

यह नीति 2018 की नीति की जगह आई है [1], और मार्च 2026 में भी UPSIDA ने इसी नीति के तहत नई परियोजनाओं को मंज़ूरी दी [5]।

एक नज़र में

बिंदुजानकारी
नीति का नामउत्तर प्रदेश वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स नीति 2022 [1]
वैधताअधिसूचना की तिथि से 5 वर्ष, या नई/संशोधित नीति आने तक (जो पहले हो) [1]
नोडल एजेंसीउत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPSIDA) — भंडारण, ड्राई पोर्ट और लॉजिस्टिक्स पार्क के लिए; बर्थिंग टर्मिनल, कार्गो टर्मिनल और इनलैंड वेसल के लिए नोडल एजेंसी अलग शासनादेश से तय होती है [1]
भंडारण पर पूँजीगत सब्सिडी15%, अधिकतम ₹5 करोड़; लॉजिस्टिक्स ज़ोन में ₹10 करोड़ [1]
ड्राई पोर्ट/लॉजिस्टिक्स पार्क पर सब्सिडी25%, अधिकतम ₹25 करोड़; लॉजिस्टिक्स ज़ोन में ₹50 करोड़ [1]
बिजली शुल्क (Electricity Duty)10 वर्ष तक 100% छूट [1]
कुल लाभ की सीमासभी लाभ मिलाकर पात्र पूँजी निवेश के 100% से अधिक नहीं [1]

किसके लिए है

नीति में "डेवलपर" की परिभाषा व्यापक है — प्रोपराइटरशिप, पार्टनरशिप, सहकारी समिति, कंपनी, LLP, ट्रस्ट, NGO और SPV सभी इसके दायरे में आते हैं [1]। पात्र परियोजनाओं के लिए न्यूनतम आकार और निवेश की शर्तें इस प्रकार हैं [1]:

परियोजनान्यूनतम आकारन्यूनतम पूँजी निवेश
वेयरहाउस/गोदाम1 लाख वर्ग फुट₹20 करोड़
साइलो (Silo)4 एकड़₹30 करोड़
कोल्ड चेन सुविधा20,000 वर्ग फुट₹15 करोड़
इनलैंड कंटेनर डिपो (ICD) / कंटेनर फ्रेट स्टेशन (CFS) / एयर फ्रेट स्टेशन (AFS)10 एकड़₹50 करोड़
लॉजिस्टिक्स पार्क25 एकड़—
ट्रकर्स पार्क10 एकड़ (NH/एक्सप्रेसवे/स्टेट हाईवे के दोनों ओर 2 किमी के भीतर)—
कार्गो टर्मिनल (ग्रीनफील्ड, कॉमन यूज़र)10 एकड़₹20 करोड़ (भूमि छोड़कर)
बर्थिंग टर्मिनल (कॉमन यूज़र, राष्ट्रीय जलमार्ग-1 के किनारे)5,000 टन क्षमता₹20 करोड़ (भूमि छोड़कर)
इनलैंड वेसल (जलपोत), राष्ट्रीय जलमार्ग-1 क्षेत्र में संचालन500 टन क्षमता—

ट्रकर्स पार्क में कम से कम 85% हिस्सा पार्किंग और आवाजाही के लिए होना चाहिए [1]। कार्गो टर्मिनल के लिए 10 एकड़ और ₹20 करोड़ की शर्त उन टर्मिनलों पर है जो केंद्र की गति शक्ति मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल (GCT) योजना 2021 से बाहर बनें; इस योजना में स्वीकृत ग्रीनफील्ड कार्गो टर्मिनल भी नीति के तहत पात्र हैं [1]।

क्या-क्या प्रोत्साहन / लाभ मिलते हैं

नीति के लाभ दो हिस्सों में हैं। फ्रंट-एंड लाभ (छूट/रियायत) व्यावसायिक संचालन शुरू होने से पहले मिलते हैं, जबकि बैक-एंड लाभ (सब्सिडी) परियोजना पूरी होने और व्यावसायिक संचालन शुरू होने के बाद [1]।

स्टांप ड्यूटी छूट (Stamp Duty Exemption)

परियोजना/क्षेत्रछूट
भंडारण सुविधा — बुंदेलखंड, पूर्वांचल और ताज ट्रेपेज़ियम ज़ोन100%
भंडारण सुविधा — मध्यांचल व पश्चिमांचल (गौतमबुद्ध नगर व गाज़ियाबाद छोड़कर)75%
भंडारण सुविधा — गौतमबुद्ध नगर व गाज़ियाबाद50%
ICD/CFS/AFS, लॉजिस्टिक्स पार्क, ट्रकर्स पार्क — पूरे प्रदेश में100%

भंडारण सुविधाओं के लिए यह छूट खरीदी गई या कम से कम 10 वर्ष की लीज़ पर ली गई भूमि पर लागू है [1][3]। स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग ने 12 अप्रैल 2023 के शासनादेश से इस छूट को लागू किया है [3]।

अन्य फ्रंट-एंड रियायतें

  • भूमि उपयोग परिवर्तन शुल्क (Land Use Conversion Charges) में 75% छूट और विकास शुल्क (Development Charges) में 75% छूट — भंडारण, ड्राई पोर्ट, लॉजिस्टिक्स पार्क और ट्रकर्स पार्क के लिए [1]।
  • भंडारण सुविधा, ड्राई पोर्ट और लॉजिस्टिक्स पार्क को 60% तक ग्राउंड कवरेज [1]।
  • लॉजिस्टिक्स पार्क में लॉजिस्टिक्स सुविधाओं के लिए FSI 1 और गैर-लॉजिस्टिक्स सुविधाओं के लिए 1.5 तक; अधिकतम 30% भूमि गैर-लॉजिस्टिक्स सेवाओं के लिए [1]।

पूँजीगत सब्सिडी और अन्य बैक-एंड लाभ

परियोजनापूँजीगत सब्सिडीभुगतान का तरीका
वेयरहाउस/साइलो/कोल्ड चेनपात्र पूँजी निवेश का 15%, अधिकतम ₹5 करोड़ (लॉजिस्टिक्स ज़ोन में ₹10 करोड़)व्यावसायिक संचालन के बाद एकमुश्त
ICD/CFS/AFS और लॉजिस्टिक्स पार्क25%, अधिकतम ₹25 करोड़ (लॉजिस्टिक्स ज़ोन में ₹50 करोड़)75% चार किस्तों में (25%, 50%, 75%, 100% खर्च पर), 10% सभी इकाइयों को भूमि आवंटन पर, अंतिम 15% जब 80% इकाइयाँ संचालन शुरू कर दें
कार्गो टर्मिनल20%, अधिकतम ₹15 करोड़; पहले चरण में अधिकतम 25 परियोजनाएँपरियोजना पूरी होने के बाद 3 वार्षिक किस्तें
बर्थिंग टर्मिनल20%, अधिकतम ₹15 करोड़; पहले चरण में अधिकतम 6 परियोजनाएँपरियोजना पूरी होने के बाद 3 वार्षिक किस्तें
इनलैंड वेसल खरीदखरीद लागत का 25%, अधिकतम ₹5 करोड़ प्रति वेसलशर्त: केवल पहले 10 वेसल के लिए, एक संस्था को अधिकतम 4

इसके अलावा [1]:

  • बिजली शुल्क छूट: भंडारण, ड्राई पोर्ट और लॉजिस्टिक्स पार्क को 10 वर्ष तक 100%।
  • गुणवत्ता प्रमाणन (Quality Certification): भंडारण सुविधाओं को प्रमाणन लागत का 50%, अधिकतम ₹5 लाख प्रति परियोजना।
  • कौशल विकास सब्सिडी (Skill Development Subsidy): प्रति प्रशिक्षु ₹1,000 प्रति माह स्टाइपेंड की प्रतिपूर्ति, 6 माह तक; हर साल अधिकतम 50 प्रशिक्षु, प्रति परियोजना 5 वर्ष तक।
  • कार्गो और बर्थिंग टर्मिनल के लिए भूमि: PPP आधार पर BOOT मॉडल में अधिकतम 30 वर्ष के लिए। कार्गो टर्मिनल की लूप-लाइन का खर्च राज्य सरकार वहन करेगी।

गैर-वित्तीय सुविधाएँ

  • नीति में परिभाषित सभी पात्र परियोजनाओं को "उद्योग का दर्जा" (Industry Status) दिया गया है, यानी इन पर औद्योगिक भूमि उपयोग और औद्योगिक FAR लागू होगा [1]।
  • वेयरहाउस 24x7 संचालित हो सकते हैं; सुरक्षा व्यवस्था के साथ महिलाएँ सहमति से रात की पाली में भी काम कर सकती हैं [1]।
  • कम से कम ₹500 करोड़ निवेश वाले लॉजिस्टिक्स पार्क को प्राधिकरण क्षेत्रों में फास्ट-ट्रैक आधार पर भूमि आवंटन का प्रावधान है, जो औद्योगिक निवेश एवं रोज़गार प्रोत्साहन नीति 2022 के प्रावधानों के अनुसार होगा [1]।
  • डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, एक्सप्रेसवे, जेवर एयरपोर्ट और जलमार्ग जैसे प्रमुख ढाँचे के पास के क्षेत्र राज्य सरकार समय-समय पर अलग शासनादेश से "लॉजिस्टिक्स ज़ोन" के रूप में चिह्नित करेगी, जहाँ सब्सिडी की ऊपरी सीमा अधिक है [1]।

आवेदन कैसे करें

  • परियोजना की पात्रता जाँचें: ऊपर दी गई तालिका से न्यूनतम आकार और निवेश की शर्त मिलाएँ। नीति दस्तावेज़ Invest UP की वेबसाइट पर उपलब्ध है [2]।
  • UPSIDA में आवेदन करें: भंडारण सुविधा, ड्राई पोर्ट और लॉजिस्टिक्स पार्क के सभी प्रोत्साहनों (फ्रंट-एंड और बैक-एंड) के आवेदन नोडल एजेंसी UPSIDA को दिए जाते हैं, जो ऑनलाइन इंसेंटिव मैनेजमेंट सिस्टम (OIMS) से इनका प्रबंधन करती है [1]।
  • यूनिक आईडी: नोडल अधिकारी आवेदन की पूर्णता और प्रासंगिकता जाँचता है और CEO UPSIDA स्तर की स्क्रूटनी कमेटी समीक्षा करती है। सही आवेदन पर यूनिक आईडी जारी होती है [1]।
  • फ्रंट-एंड छूट लें: संबंधित विभाग यूनिक आईडी के सत्यापन के बाद ही छूट देते हैं। स्टांप ड्यूटी, भूमि उपयोग परिवर्तन और विकास शुल्क की छूट के बदले उतनी ही राशि की बैंक गारंटी जमा करनी होती है, जो तय अवधि में व्यावसायिक संचालन शुरू होने पर वापस हो जाती है [1]। स्टांप छूट वाले विलेख पर ज़िलाधिकारी या उपायुक्त उद्योग की पुष्टि आवश्यक है [3]।
  • लेटर ऑफ कम्फर्ट (LoC): फ्रंट-एंड छूट के लिए शुरुआत में LoC अनिवार्य नहीं है, पर बाद के चरण में इसे लेना होता है। बैक-एंड सब्सिडी केवल उन्हीं परियोजनाओं को मिलती है जिन्हें LoC स्वीकृत हो [1]।
  • स्वीकृति: ₹100 करोड़ तक की परियोजनाएँ अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त की अध्यक्षता वाली एम्पावर्ड कमेटी और ₹100 करोड़ से ऊपर की परियोजनाएँ मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली हाई लेवल एम्पावर्ड कमेटी के पास जाती हैं [1]।
  • क्लियरेंस: परियोजना से जुड़ी अनुमतियाँ सिंगल विंडो पोर्टल निवेश मित्र से मिलती हैं [1][4]। पोर्टल की पूरी प्रक्रिया के लिए हमारी निवेश मित्र 3.0 गाइड देखें।
  • सहायता: Invest UP हेल्पडेस्क +91 522 6923000 (सोमवार से शनिवार, सुबह 9:30 से शाम 6 बजे) [2]।

ध्यान रखने वाली बातें

  • निवेश की समय-सीमा: पात्र निवेश अवधि (Eligible Investment Period) भंडारण सुविधाओं के लिए 3 वर्ष और ड्राई पोर्ट, लॉजिस्टिक्स पार्क, बर्थिंग व कार्गो टर्मिनल के लिए 5 वर्ष (या व्यावसायिक संचालन शुरू होने तक, जो पहले हो) है [1]।
  • भूमि की गणना: भंडारण, ड्राई पोर्ट और लॉजिस्टिक्स पार्क के पात्र पूँजी निवेश में भूमि अधिकतम 40% तक गिनी जाती है; कार्गो और बर्थिंग टर्मिनल में भूमि की लागत शामिल नहीं होती [1]।
  • क्या नहीं गिना जाता: वर्किंग कैपिटल, गुडविल, प्री-ऑपरेटिव खर्च, पूँजीकृत ब्याज, कंसल्टेंसी और रॉयल्टी पात्र निवेश में नहीं जुड़ते [1]।
  • दोहरा लाभ नहीं: इस नीति के प्रोत्साहन लेने वाली परियोजना राज्य सरकार की किसी अन्य नीति के प्रोत्साहन नहीं ले सकती, हालाँकि केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ साथ लिया जा सकता है [1]।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या छोटे गोदाम भी इस नीति में आते हैं? नीति के तहत वेयरहाउस के लिए न्यूनतम 1 लाख वर्ग फुट क्षेत्र और ₹20 करोड़ निवेश तथा कोल्ड चेन के लिए 20,000 वर्ग फुट और ₹15 करोड़ निवेश की शर्त है [1]। इससे छोटी इकाइयाँ राज्य की अन्य उद्योग नीतियों के विकल्प देख सकती हैं।

पूँजीगत सब्सिडी कब मिलती है? भंडारण सुविधाओं को सब्सिडी व्यावसायिक संचालन शुरू होने के बाद एकमुश्त मिलती है, जबकि ड्राई पोर्ट और लॉजिस्टिक्स पार्क को खर्च के आधार पर किस्तों में। बैक-एंड सब्सिडी के लिए LoC स्वीकृत होना ज़रूरी है [1]।

लॉजिस्टिक्स ज़ोन में क्या अतिरिक्त लाभ है? लॉजिस्टिक्स ज़ोन में सब्सिडी की ऊपरी सीमा दोगुनी है — भंडारण सुविधाओं के लिए ₹10 करोड़ और ड्राई पोर्ट व लॉजिस्टिक्स पार्क के लिए ₹50 करोड़। ये ज़ोन राज्य सरकार अलग शासनादेश से घोषित करती है [1]।

नोएडा-गाज़ियाबाद में वेयरहाउस पर कितनी स्टांप ड्यूटी छूट है? गौतमबुद्ध नगर और गाज़ियाबाद में भंडारण सुविधाओं के लिए 50% स्टांप ड्यूटी छूट का प्रावधान है, जबकि ड्राई पोर्ट, लॉजिस्टिक्स पार्क और ट्रकर्स पार्क के लिए पूरे प्रदेश में 100% [1][3]।

यह नीति कब तक लागू है? नीति अधिसूचना की तिथि से 5 वर्ष तक, या नई/संशोधित नीति घोषित होने तक (जो पहले हो), प्रभावी है। संशोधन भविष्य से लागू होते हैं और पहले दिए गए लाभ कम नहीं करते [1]।

स्रोत

मुख्य आधिकारिक स्रोत: Uttar Pradesh Warehousing & Logistics Policy 2022 — Invest UP, उत्तर प्रदेश सरकार — मूल दस्तावेज़ देखें
यह गाइड आधिकारिक दस्तावेज़ों के आधार पर तैयार की गई है; हर तथ्य का स्रोत लेख के अंत में दिया गया है। नीतियाँ समय-समय पर बदलती हैं, इसलिए आवेदन से पहले नवीनतम आधिकारिक अधिसूचना ज़रूर देखें। किसी त्रुटि की सूचना [email protected] पर "सुधार" विषय के साथ दें।

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