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उत्तर प्रदेश निर्यात प्रोत्साहन नीति 2025-30: पात्रता, भाड़ा सहायता और आवेदन की जानकारी

UP Corporate News डेस्क • • 9 मिनट

उत्तर प्रदेश निर्यात प्रोत्साहन नीति 2025-30 के तहत राज्य के पंजीकृत निर्यातकों के लिए विपणन विकास सहायता, एयर फ्रेट व गेटवे पोर्ट भाड़ा अनुदान, प्रमाणन, ई-कॉमर्स और निर्यात बीमा जैसी योजनाओं का प्रावधान है। इस गाइड में पात्रता, सहायता की सीमाएँ और आवेदन का तरीका सरल भाषा में समझाया गया है।

उत्तर प्रदेश निर्यात प्रोत्साहन नीति 2025-30: पात्रता, भाड़ा सहायता और आवेदन की जानकारी
मुख्य बिंदु
  • नीति का शासनादेश 3 सितंबर 2025 को जारी हुआ; यह वित्तीय वर्ष 2029-30 तक प्रभावी है
  • MSME निर्यातकों के लिए विपणन विकास सहायता की कुल सीमा ₹25 लाख प्रति वर्ष
  • एयर फ्रेट पर 30% या ₹150 प्रति किलो (जो कम हो), अधिकतम ₹10 लाख प्रति वर्ष
  • गेटवे पोर्ट भाड़ा अनुदान अधिकतम ₹30 लाख प्रति इकाई प्रति वित्तीय वर्ष
  • लाभ के लिए निर्यात प्रोत्साहन ब्यूरो, उत्तर प्रदेश में पंजीकरण ज़रूरी

उत्तर प्रदेश निर्यात प्रोत्साहन नीति 2025-30 राज्य के निर्यातकों को विदेशी बाज़ार तक पहुँचाने के लिए मेलों में भागीदारी, माल भाड़े, प्रमाणन, ई-कॉमर्स, डाक निर्यात और निर्यात बीमा पर आर्थिक सहायता देती है। सबसे काम की बात यह है कि इनमें से किसी भी योजना का लाभ लेने के लिए पहले निर्यात प्रोत्साहन ब्यूरो, उत्तर प्रदेश (Export Promotion Bureau, UP) में पंजीकरण कराना होता है [1][2]। यह नीति 2020-25 की निर्यात नीति के बाद आई है और उसी ढाँचे को आगे बढ़ाती है [2]।

एक नज़र में

बिंदुजानकारी
नीति का नामउत्तर प्रदेश निर्यात प्रोत्साहन नीति 2025-30
शासनादेशसंख्या-684/18-4-2025/18-4099/31/2025, दिनांक 3 सितंबर 2025 (MSME अनुभाग-4) [1]
अवधिअधिसूचना की तिथि से वित्तीय वर्ष 2029-30 तक [1]
नोडल एजेंसीनिर्यात प्रोत्साहन ब्यूरो, MSME एवं निर्यात प्रोत्साहन विभाग [4]
लक्ष्यनिर्यात को FY 2024 के 21 अरब डॉलर से FY 2030 तक 50 अरब डॉलर करना [2]
पंजीकृत निर्यातक2030 तक संख्या में 50% वृद्धि का लक्ष्य [2]
कुल अनुमानित व्यय₹882 करोड़ (2025-30) [2]
कौन पात्रब्यूरो में पंजीकृत विनिर्माता और मर्चेंट निर्यातक; सेवा निर्यात के लिए 12 चैंपियन सेवा क्षेत्र [1][2]

किसके लिए है

नीति की वित्तीय योजनाओं का लाभ उन्हीं निर्यातक इकाइयों के लिए है जो निर्यात प्रोत्साहन ब्यूरो, उत्तर प्रदेश में पंजीकृत हैं [2]। नीति में यह स्पष्ट किया गया है कि विनिर्माता निर्यातक (Manufacturer Exporter) के साथ-साथ मर्चेंट निर्यातक (Merchant Exporter) भी सभी योजनाओं के लिए पात्र हैं [2]।

  • विपणन विकास सहायता (Marketing Development Assistance) की मुख्य योजना राज्य के MSME क्षेत्र के निर्यातकों के लिए है [1][2]।
  • सेवा निर्यातक भारत सरकार द्वारा चिह्नित 12 चैंपियन सेवा क्षेत्रों में काम करते हों और ब्यूरो में पंजीकृत हों, तो उनके लिए अलग MDA योजना है [1][2]।
  • छोटे निर्यातकों के लिए, जिनका पिछले तीन वर्षों का औसत वार्षिक निर्यात ₹5 करोड़ या उससे कम है, LCL शिपमेंट पर भाड़ा सहायता का अलग प्रावधान है [1]।
  • नीति के अनुसार योजनावार सहायता राशियाँ हर वर्ष मुद्रास्फीति के अनुसार समायोजित की जाएँगी [2]।

क्या-क्या प्रोत्साहन / लाभ मिलते हैं

विपणन विकास सहायता (MDA) — MSME निर्यातक

इस योजना में कुल सहायता की सीमा ₹25 लाख प्रति निर्यातक प्रति वर्ष है। हर मद में स्वीकृत ख़र्च के 75% की प्रतिपूर्ति का प्रावधान है [1][2]।

मदसहायताअधिकतम सीमा
विदेश में अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला — स्टॉल किराया75%₹3.25 लाख
विदेश में मेला — इकोनॉमी क्लास हवाई किराया75%₹1.25 लाख
भारत में अंतरराष्ट्रीय स्तर का मेला — स्टॉल किराया75%₹75,000
भारत में अंतरराष्ट्रीय स्तर का मेला — हवाई किराया75%₹30,000
वर्चुअल फेयर / बायर-सेलर मीट75%₹25,000 प्रति फेयर
प्रचार — कैटलॉग, वेबसाइट, डिजिटल मार्केटिंग, सोशल मीडिया75%₹1 लाख
विदेशी ख़रीदारों को नमूने (Samples) भेजना75%₹2 लाख प्रति वर्ष
निर्यात से जुड़े प्रमाणन (Certification)75%अलग सीमा नहीं, कुल ₹25 लाख के भीतर

प्रमाणन पर ख़ास राहत यह है कि इसकी अलग ऊपरी सीमा नहीं रखी गई है। यदि किसी वित्तीय वर्ष में अन्य मदों में दावा न किया जाए, तो प्रमाणन के लिए पूरी ₹25 लाख तक की सीमा का उपयोग किया जा सकता है [2]।

निर्यात संवर्धन परिषदों (EPC) और व्यापार संवर्धन संस्थाओं द्वारा आयोजित कार्यक्रमों के लिए भी 75% सहायता का प्रावधान है — विदेश में मेले/बायर-सेलर मीट पर अधिकतम ₹3 करोड़, भारत में अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजन पर ₹1 करोड़ और वर्चुअल मेले पर ₹25 लाख [2]।

सेवा निर्यात के लिए MDA और MICE

उत्तर प्रदेश से दी जाने वाली सेवाओं के प्रचार में लगी पंजीकृत सेवा निर्यातक इकाइयों के लिए हर मद में ख़र्च के 75% का प्रावधान है [2]।

मदसहायताअधिकतम सीमा
विदेशी मेला — स्टॉल किराया75%₹2 लाख
विदेशी मेला — एक व्यक्ति का इकोनॉमी यात्रा व्यय75%₹1 लाख
भारत में अंतरराष्ट्रीय मेला — स्टॉल किराया75%₹50,000
भारत में अंतरराष्ट्रीय मेला — हवाई किराया75%₹25,000

पात्र MICE आयोजकों के लिए ₹7,000 प्रति विदेशी प्रतिभागी या ₹6 लाख प्रति कार्यक्रम, जो भी कम हो, का प्रावधान है [2]।

माल भाड़ा सहायता (Freight Support)

  • वायुयान भाड़ा युक्तिकरण योजना (Air Freight Rationalisation): भाड़े का 30% या ₹150 प्रति किलोग्राम, जो कम हो; अधिकतम ₹10 लाख प्रति इकाई प्रति वर्ष। यह भारत के किसी भी एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स से भेजे गए माल पर लागू है, बशर्ते माल का मूल राज्य उत्तर प्रदेश हो [2]।
  • गेटवे पोर्ट माल भाड़ा अनुदान (Gateway Port Freight Subsidy): राज्य के भीतर स्थित ICD या CFS से भेजे गए माल पर 20 फुट कंटेनर के लिए ₹20,000 और 40 फुट कंटेनर के लिए ₹40,000 या भाड़े का 30%, जो कम हो; अधिकतम ₹30 लाख प्रति इकाई प्रति वित्तीय वर्ष [1][2]।
  • LCL शिपमेंट: छोटे निर्यातकों (औसत वार्षिक निर्यात ₹5 करोड़ तक) को कंटेनर लोड से कम (Less than Container Load) शिपमेंट पर भी वित्तीय सहायता का प्रावधान है [1][2]।

अन्य प्रमुख योजनाएँ

योजनासहायताअधिकतम सीमा
ई-कॉमर्स ऑनबोर्डिंग सहायताअंतरराष्ट्रीय प्लेटफ़ॉर्म पर पहले वर्ष के शुल्क का 75%₹3 लाख प्रति वर्ष
डाक घर निर्यात केंद्र (DNK) सहायतापोस्टेज शुल्क का 75%₹1 लाख प्रति वर्ष
निर्यात प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहननिर्यात में सालाना वृद्धि का 1%₹20 लाख प्रति वर्ष
निर्यात क्रेडिट इंश्योरेंस (ECGC प्रीमियम)वार्षिक प्रीमियम का 30%₹5 लाख प्रति वर्ष
निर्यात-उन्मुख विशिष्ट परियोजना (EOSP)40% पूँजीगत सब्सिडी (Capital Subsidy)₹10 करोड़

ई-कॉमर्स सहायता में रजिस्ट्रेशन, सेलर, रेफ़रल, क्लोज़िंग, शिपिंग, वेयरहाउसिंग और सब्सक्रिप्शन जैसे शुल्क गिने जाते हैं [2]। EOSP कम से कम ₹100 करोड़ की कुल लागत वाली निर्यात-उन्मुख ढाँचागत परियोजनाओं के लिए है, जैसे टेस्टिंग व प्रमाणन एजेंसियाँ, लॉजिस्टिक्स व वेयरहाउसिंग, ई-कॉमर्स फ़ुलफ़िलमेंट सेंटर और कौशल विकास व प्रशिक्षण संस्थान [2]। नीति की कार्ययोजना में ODOP योजना के अंतर्गत साझा सुविधा केंद्रों (CFC) के लिए ₹15 करोड़ तक की सहायता का भी उल्लेख है [2] — ODOP की बाक़ी योजनाओं के लिए देखें उत्तर प्रदेश ODOP योजना गाइड।

आवेदन कैसे करें

  • पंजीकरण: सबसे पहले अपनी इकाई का पंजीकरण निर्यात प्रोत्साहन ब्यूरो, उत्तर प्रदेश में कराएँ; नीति की सभी वित्तीय योजनाओं के लिए यह शर्त है [2]।
  • ऑनलाइन आवेदन: ब्यूरो की वेबसाइट epbupindia.in पर MDA, गेटवे पोर्ट फ्रेट सब्सिडी और एयर फ्रेट सब्सिडी के ऑनलाइन आवेदन की सुविधा दी गई है [4]। राज्य के MSME पोर्टल MSME1Connect पर भी ब्यूरो की योजनाओं के लिए यही लिंक दिया गया है [5]।
  • दस्तावेज़: आवेदन में व्यवसाय और निर्यात का ब्योरा भरकर ज़रूरी दस्तावेज़ अपलोड किए जाते हैं [5]।
  • सहायता और जानकारी: ब्यूरो का कार्यालय 8-कैंट रोड, कैसरबाग, लखनऊ में है [2]। नीति के दस्तावेज़ Invest UP की वेबसाइट पर हिंदी और अंग्रेज़ी में उपलब्ध हैं [3]।

उद्योग लगाने से जुड़ी अन्य मंज़ूरियों के लिए निवेश मित्र पोर्टल गाइड देखें।

ध्यान रखने वाली बातें

  • हिंदी पाठ मान्य: नीति के अंग्रेज़ी अनुवाद में ही लिखा है कि किसी अंतर की स्थिति में स्वीकृत हिंदी संस्करण मान्य होगा [2]।
  • वार्षिक सीमाएँ: लगभग हर योजना में सीमा प्रति वर्ष या प्रति वित्तीय वर्ष तय है, इसलिए मेलों, प्रमाणन और प्रचार के ख़र्च की योजना वित्तीय वर्ष के हिसाब से बनाना उपयोगी रहेगा।
  • बिल और रसीदें सँभालें: प्रतिपूर्ति आधारित योजनाओं में स्टॉल किराया, टिकट, भाड़ा बिल और प्रीमियम रसीद जैसे दस्तावेज़ दावे का आधार होते हैं।
  • पहले से मिली सहायता सुरक्षित: नीति में संशोधन होने पर भी पहले से स्वीकृत प्रोत्साहन वापस न लेने का प्रावधान है [1][2]।
  • बड़े निवेश के लिए: निर्यात इकाई में बड़ा पूँजी निवेश हो रहा है, तो औद्योगिक निवेश एवं रोज़गार प्रोत्साहन नीति 2022 के प्रावधान भी देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या मर्चेंट निर्यातक भी इन योजनाओं का लाभ ले सकते हैं?

हाँ। नीति में स्पष्ट प्रावधान है कि ब्यूरो में पंजीकृत मर्चेंट निर्यातक भी सभी योजनाओं के लिए पात्र हैं [2]।

प्रमाणन (Certification) पर कितनी सहायता का प्रावधान है?

निर्यात से जुड़े प्रमाणन के ख़र्च का 75% दिया जा सकता है। इसकी अलग ऊपरी सीमा नहीं है, यह MDA की कुल ₹25 लाख वार्षिक सीमा के भीतर आता है [2]।

क्या दूसरे राज्य के एयरपोर्ट से भेजे गए माल पर एयर फ्रेट सहायता मिल सकती है?

नीति के अनुसार भारत के किसी भी एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स से निर्यात पर यह योजना लागू है, बशर्ते माल का मूल राज्य उत्तर प्रदेश हो [2]।

यह नीति कब तक लागू है?

शासनादेश 3 सितंबर 2025 को जारी हुआ और नीति अधिसूचना की तिथि से वित्तीय वर्ष 2029-30 तक प्रभावी है। बीच में मध्यावधि समीक्षा का भी प्रावधान है [1][2]।

सेवा क्षेत्र की कंपनियाँ क्या लाभ ले सकती हैं?

12 चैंपियन सेवा क्षेत्रों की ब्यूरो में पंजीकृत इकाइयों के लिए विदेशी और घरेलू अंतरराष्ट्रीय मेलों में भागीदारी पर 75% सहायता का प्रावधान है [2]। IT कंपनियों के लिए GCC नीति गाइड भी उपयोगी हो सकती है।

स्रोत

मुख्य आधिकारिक स्रोत: उत्तर प्रदेश निर्यात प्रोत्साहन नीति 2025-30 — Invest UP / निर्यात प्रोत्साहन ब्यूरो, उत्तर प्रदेश — मूल दस्तावेज़ देखें
यह गाइड आधिकारिक दस्तावेज़ों के आधार पर तैयार की गई है; हर तथ्य का स्रोत लेख के अंत में दिया गया है। नीतियाँ समय-समय पर बदलती हैं, इसलिए आवेदन से पहले नवीनतम आधिकारिक अधिसूचना ज़रूर देखें। किसी त्रुटि की सूचना [email protected] पर "सुधार" विषय के साथ दें।

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