उत्तर प्रदेश ग्रीन हाइड्रोजन नीति 2024: पूँजीगत अनुदान, भूमि, बिजली छूट और आवेदन की पूरी जानकारी
उत्तर प्रदेश ग्रीन हाइड्रोजन नीति 2024 का लक्ष्य राज्य में ग्रीन हाइड्रोजन/ग्रीन अमोनिया की 10 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष उत्पादन क्षमता विकसित करना है। इसमें पूँजीगत अनुदान, नेट SGST प्रतिपूर्ति या PLI टॉप-अप में से एक विकल्प, सस्ती लीज़ पर भूमि, स्टांप ड्यूटी और विद्युत शुल्क में छूट तथा स्टार्टअप और शोध के लिए सहायता का प्रावधान है, जिसकी नोडल एजेंसी UPNEDA है।

- राज्य में ग्रीन हाइड्रोजन/ग्रीन अमोनिया की 10 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष उत्पादन क्षमता का लक्ष्य
- पूँजीगत अनुदान, 100% नेट SGST प्रतिपूर्ति या केंद्र के PLI पर 30% टॉप-अप — तीन में से एक विकल्प
- सरकारी भूमि निजी निवेशकों को ₹15,000 और सार्वजनिक उपक्रमों को ₹1 प्रति एकड़ प्रति वर्ष पर 30 वर्ष की लीज़; स्टांप ड्यूटी में 100% छूट
- उत्पादन में प्रयुक्त नवीकरणीय बिजली पर 10 वर्ष तक 100% विद्युत शुल्क छूट
- स्टार्टअप को 5 वर्ष तक अधिकतम ₹25 लाख प्रति वर्ष सहायता का प्रावधान
उत्तर प्रदेश ग्रीन हाइड्रोजन नीति 2024 राज्य में पानी के इलेक्ट्रोलिसिस से नवीकरणीय बिजली के ज़रिये बनने वाले ग्रीन हाइड्रोजन (Green Hydrogen) और उससे बनने वाले ग्रीन अमोनिया (Green Ammonia) के उत्पादन, उपयोग और उससे जुड़ी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई है [1]। नीति बड़ी परियोजनाओं के लिए पूँजीगत अनुदान, सस्ती भूमि, बिजली से जुड़े शुल्कों में छूट और शोध व स्टार्टअप के लिए सहायता का ढाँचा तय करती है [1][2]। इसकी नोडल एजेंसी उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (UPNEDA) है [1]।
एक नज़र में
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| नीति का नाम | उत्तर प्रदेश ग्रीन हाइड्रोजन नीति 2024 [1] |
| नोडल एजेंसी | UPNEDA [1] |
| अवधि | प्रभावी तिथि से 5 वर्ष, या संशोधन/नई नीति आने तक [1] |
| उत्पादन लक्ष्य | 10 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष क्षमता [1][2] |
| पात्र परियोजनाएँ | ₹50 करोड़ या अधिक निवेश वाली लार्ज, मेगा, सुपर मेगा और अल्ट्रा मेगा परियोजनाएँ [1] |
| वित्तीय प्रोत्साहन | पूँजीगत अनुदान / नेट SGST प्रतिपूर्ति / PLI टॉप-अप — इनमें से एक [1] |
| भूमि | निजी: ₹15,000, सार्वजनिक उपक्रम: ₹1 प्रति एकड़ प्रति वर्ष, 30 वर्ष की लीज़ [1][2] |
| स्टांप ड्यूटी | परियोजना की भूमि पर 100% छूट [1] |
| विद्युत शुल्क (Electricity Duty) | 10 वर्ष तक 100% छूट [1][2] |
| पर्यावरण श्रेणी | व्हाइट कैटेगरी [1][2] |
UPNEDA की वेबसाइट पर इस नीति के साथ इसके क्रियान्वयन से जुड़े शासनादेश (GO) सूचीबद्ध हैं, जो 14 मार्च 2024 के हैं [3]। उत्पादन लक्ष्य का वर्ष नीति दस्तावेज़ के खंड 3 में 2029 लिखा है, जबकि Invest UP के सारांश पेज पर 2028 बताया गया है [1][2]; विवरण के लिए नीति का मूल पाठ देखना उपयोगी है।
किसके लिए है
- ग्रीन हाइड्रोजन/ग्रीन अमोनिया उत्पादक: नई इकाई, विस्तार या विविधीकरण के रूप में उत्पादन, प्रोसेसिंग, कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग या जॉब वर्क करने वाली औद्योगिक इकाइयाँ [1]।
- विस्तार (Expansion): मौजूदा इकाई जो नए पूँजी निवेश से अपने ग्रॉस ब्लॉक में कम से कम 25% वृद्धि करे [1]।
- सार्वजनिक उपक्रम और निजी निवेशक: दोनों के लिए सरकारी भूमि लीज़ पर देने का अलग-अलग प्रावधान है [1]।
- शैक्षणिक संस्थान, इनक्यूबेटर और स्टार्टअप: शोध, उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence) और ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़े स्टार्टअप के लिए सहायता [1]।
नीति में "ग्रीन हाइड्रोजन" की परिभाषा में नवीकरणीय ऊर्जा से इलेक्ट्रोलिसिस के अलावा बायोमास/बायोगैस से बनने वाला हाइड्रोजन भी शामिल है [1]। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) इस नीति के बजाय राज्य की MSME नीति के दायरे में आते हैं [1]; उसके लिए देखें MSME प्रोत्साहन नीति 2022।
परियोजनाओं की श्रेणियाँ
| श्रेणी | निवेश | पात्र निवेश अवधि |
|---|---|---|
| लार्ज | ₹50 करोड़ से ₹200 करोड़ से कम | 4 वर्ष |
| मेगा | ₹200 करोड़ से ₹500 करोड़ से कम | 5 वर्ष |
| सुपर मेगा | ₹500 करोड़ से ₹3,000 करोड़ से कम | 7 वर्ष |
| अल्ट्रा मेगा | ₹3,000 करोड़ या अधिक | 9 वर्ष |
स्रोत: नीति की तालिका 1 और 2 [1]। पात्र निवेश अवधि प्रभावी तिथि से वाणिज्यिक संचालन या ऊपर दी गई अवधि, जो पहले हो, तक मानी जाती है [1]।
क्या-क्या प्रोत्साहन / लाभ मिलते हैं
विकल्प 1: पूँजीगत अनुदान (Capital Subsidy)
अनुदान पात्र पूँजी निवेश (Eligible Capital Investment, ECI) के प्रतिशत के रूप में, वार्षिक किश्तों में देने का प्रावधान है [1]:
| क्षेत्र | लार्ज | मेगा | सुपर मेगा | अल्ट्रा मेगा |
|---|---|---|---|---|
| गौतम बुद्ध नगर और गाज़ियाबाद | 10% | 18% | 20% | 22% |
| मध्यांचल और पश्चिमांचल (ऊपर के दो ज़िलों के अलावा) | 12% | 20% | 22% | 25% |
| बुंदेलखंड और पूर्वांचल | 15% | 22% | 25% | 30% |
किश्तों की अवधि लार्ज के लिए 10, मेगा के लिए 12, सुपर मेगा के लिए 15 और अल्ट्रा मेगा के लिए 20 वर्ष है। वार्षिक सीमा लार्ज ₹5 करोड़, मेगा ₹10 करोड़, सुपर मेगा ₹50 करोड़ और अल्ट्रा मेगा ₹150 करोड़ है [1]।
- पहली पाँच परियोजनाओं के लिए विशेष प्रोत्साहन: मेरठ मंडल को छोड़कर, पहली पाँच सुपर मेगा और अल्ट्रा मेगा परियोजनाओं के लिए क्रमशः ECI का 35% और 40%, वार्षिक सीमा ₹100 करोड़ और ₹200 करोड़ (बूस्टर सहित ₹125 करोड़ और ₹225 करोड़) [1]।
- बूस्टर (Booster): मेगा और उससे बड़ी परियोजनाओं के लिए रोज़गार, निर्यात और राज्य से कच्चा माल लेने (इकोसिस्टम) के आधार पर ECI का 2%, 3% या 4% अतिरिक्त [1]।
- क्षमता उपयोग की शर्त: अनुदान "ग्रॉस कैपेसिटी यूटिलाइज़ेशन मल्टीपल" से जुड़ा है; पहले वर्ष में कम से कम 40% और बाद के वर्षों में 75% या अधिक क्षमता उपयोग पर पूरा गुणक 1 माना जाता है [1]।
विकल्प 2: नेट SGST प्रतिपूर्ति
जमा किए गए नेट SGST की 100% प्रतिपूर्ति का प्रावधान है; अवधि लार्ज के लिए 6, मेगा 12, सुपर मेगा 14 और अल्ट्रा मेगा 16 वर्ष है। वार्षिक और कुल सीमाएँ क्षेत्र और श्रेणी के अनुसार ECI के प्रतिशत में तय हैं [1]।
विकल्प 3: PLI टॉप-अप
भारत सरकार की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजना में स्वीकृत राशि का 30% टॉप-अप, केंद्र से वितरण के साथ; राज्य प्रोत्साहन की कुल सीमा ECI का 100% है [1]।
भूमि, पानी और बिजली
- भूमि: सरकारी या ग्राम समाज की भूमि सार्वजनिक उपक्रमों को ₹1 और निजी निवेशकों को ₹15,000 प्रति एकड़ प्रति वर्ष पर 30 वर्ष की लीज़ पर; भूमि हस्तांतरणीय नहीं और 3 वर्ष में काम शुरू न होने पर वापस ली जा सकती है [1]।
- कैप्टिव सौर संयंत्र के लिए भूमि: प्रति किलो टन वार्षिक उत्पादन पर अधिकतम 20 मेगावाट, 5 एकड़ प्रति मेगावाट तक [1][2]।
- पानी: सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग नज़दीकी स्रोत से पानी आवंटित करेगा; साइट तक पाइपलाइन आदि का खर्च डेवलपर उठाएगा [1]।
- व्हीलिंग और ट्रांसमिशन शुल्क (Wheeling Charges): राज्य के भीतर नवीकरणीय बिजली पर व्हीलिंग, ट्रांसमिशन और क्रॉस-सब्सिडी सरचार्ज में 10 वर्ष या परियोजना की आयु (जो पहले हो) तक 100% छूट [1][2]।
- एनर्जी बैंकिंग (Banking): 25 वर्ष या परियोजना की आयु (जो पहले हो) तक मासिक बैंकिंग [1][2]।
- RPO: उत्पादन में लगी नवीकरणीय बिजली डेवलपर के नवीकरणीय खरीद दायित्व (RPO) में गिनी जाएगी [1][2]।
शोध और स्टार्टअप
- सरकारी शैक्षणिक संस्थानों द्वारा उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने पर 100% वित्तीय प्रोत्साहन, अधिकतम ₹50 करोड़ [1]।
- शैक्षणिक संस्थान के इनक्यूबेटर में पंजीकृत स्टार्टअप को 5 वर्ष तक अधिकतम ₹25 लाख प्रति वर्ष; अधिकतम तीन इनक्यूबेटर, प्रत्येक में 10 स्टार्टअप तक [1]।
आवेदन कैसे करें
- नीति के अनुसार UPNEDA में एक नीति क्रियान्वयन इकाई (Policy Implementation Unit) सिंगल विंडो पोर्टल व्यवस्था के ज़रिये आवेदनों की प्रक्रिया में सहायता करेगी [1]।
- प्रोत्साहन का विकल्प (अनुदान, SGST या PLI टॉप-अप) आवेदन के समय ही चुनना होता है; लेटर ऑफ़ कम्फर्ट की स्वीकृति से पहले इसे एक बार बदला जा सकता है [1]।
- आवेदनों का मूल्यांकन UPNEDA निदेशक स्तर की समिति करती है; लार्ज परियोजनाओं की संस्तुति अधिकार प्राप्त समिति (EC) विभागीय मंत्री को करती है, जबकि मेगा व उससे बड़ी परियोजनाओं की संस्तुति मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति (HLEC) कैबिनेट को करती है [1]।
- भूमि और पानी की पहचान तथा स्थानीय समन्वय के लिए ज़िलाधिकारी की अध्यक्षता में ज़िला स्तरीय समिति है, जिसकी बैठकों में निवेशक को बुलाया जाता है [1]।
- नीति दस्तावेज़ और शासनादेश UPNEDA और Invest UP पर उपलब्ध हैं [2][3]। अन्य राज्य स्तरीय स्वीकृतियों के लिए निवेश मित्र 3.0 की जानकारी उपयोगी है।
ध्यान रखने वाली बातें
- तीनों वित्तीय विकल्पों में से केवल एक लिया जा सकता है [1]।
- विस्तार या विविधीकरण में SGST प्रतिपूर्ति केवल अतिरिक्त निवेश और अतिरिक्त टर्नओवर पर लागू होती है [1]।
- यदि पूँजी निवेश प्रभावी तिथि से पहले शुरू हुआ हो, तो उसका कम से कम 80% प्रभावी तिथि के बाद होना चाहिए; पात्र पूँजी निवेश में केवल प्रभावी तिथि के बाद का निवेश गिना जाता है [1]।
- दूसरी राज्य नीतियों से टकराव होने पर इस नीति के प्रोत्साहन प्रावधान लागू होते हैं [1]।
- ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाओं को केंद्र सरकार के प्रोत्साहन भी लागू हैं [1]। सौर ऊर्जा से जुड़े राज्य प्रावधानों के लिए देखें सौर ऊर्जा नीति 2022।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या छोटे उद्यम इस नीति में आवेदन कर सकते हैं?
नीति की श्रेणियाँ ₹50 करोड़ या अधिक निवेश से शुरू होती हैं; MSME इकाइयाँ राज्य की MSME नीति के अंतर्गत आती हैं [1]। स्टार्टअप के लिए अलग से ₹25 लाख प्रति वर्ष तक सहायता का प्रावधान है [1]।
सबसे अधिक पूँजीगत अनुदान किस क्षेत्र में है?
बुंदेलखंड और पूर्वांचल में अनुदान की दर सबसे ऊँची है — अल्ट्रा मेगा परियोजना के लिए ECI का 30% [1]।
क्या ग्रीन हाइड्रोजन परियोजना को प्रदूषण बोर्ड की सहमति लेनी होगी?
नीति के अनुसार परियोजनाओं को पर्यावरण स्वीकृति के लिए व्हाइट कैटेगरी का दर्जा है और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से स्थापना व संचालन की सहमति/NOC से छूट का प्रावधान है [1]।
नीति कितने समय तक लागू है?
प्रभावी तिथि से पाँच वर्ष तक, या राज्य सरकार द्वारा संशोधन/नई नीति अधिसूचित होने तक [1]।
स्टार्टअप को सहायता कैसे मिलती है?
सहायता उन्हीं स्टार्टअप को है जो किसी शैक्षणिक संस्थान के इनक्यूबेटर और राज्य या भारत सरकार में पंजीकृत हों; प्रोत्साहन का 20% इनक्यूबेटर को क्षमता निर्माण और कार्यक्रमों के लिए जाता है [1]। राज्य की स्टार्टअप व्यवस्था के लिए देखें स्टार्टअप नीति 2026।
स्रोत
यह गाइड आधिकारिक दस्तावेज़ों के आधार पर तैयार की गई है; हर तथ्य का स्रोत लेख के अंत में दिया गया है। नीतियाँ समय-समय पर बदलती हैं, इसलिए आवेदन से पहले नवीनतम आधिकारिक अधिसूचना ज़रूर देखें। किसी त्रुटि की सूचना [email protected] पर "सुधार" विषय के साथ दें।