20 अक्टूबर 2026 | लखनऊउत्तर प्रदेश • कॉरपोरेट • निवेश • उद्योग
📘 गाइड 📍 उत्तर प्रदेश MSME और ODOP एक्सपोर्ट

यूपी एमएसएमई प्रोत्साहन नीति 2022: पात्रता, पूँजीगत सब्सिडी, स्टाम्प शुल्क छूट और आवेदन

UP Corporate News डेस्क • • 9 मिनट

उत्तर प्रदेश सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम प्रोत्साहन नीति-2022 नई MSME इकाइयों को क्षेत्र के हिसाब से 10% से 25% तक पूँजीगत सब्सिडी, स्टाम्प शुल्क छूट, ब्याज उपादान और EPF प्रतिपूर्ति जैसे प्रोत्साहन देती है। यह गाइड बताती है कि कौन पात्र है, किस क्षेत्र में कितना लाभ है और आवेदन कैसे होता है।

यूपी एमएसएमई प्रोत्साहन नीति 2022: पात्रता, पूँजीगत सब्सिडी, स्टाम्प शुल्क छूट और आवेदन
मुख्य बिंदु
  • नीति 28 सितंबर 2022 के आदेश से लागू; जारी होने से 5 वर्ष या नई नीति आने तक प्रभावी
  • पूँजीगत सब्सिडी: बुंदेलखंड-पूर्वांचल में 25/20/15%, मध्यांचल-पश्चिमांचल में 20/15/10%; अधिकतम ₹4 करोड़ प्रति इकाई
  • SC/ST और महिला उद्यमियों को पूँजीगत सब्सिडी में 2% अतिरिक्त
  • स्टाम्प शुल्क छूट: बुंदेलखंड-पूर्वांचल में 100%, गौतमबुद्धनगर-गाज़ियाबाद में 50%, महिला उद्यमियों को पूरे प्रदेश में 100%
  • नई सूक्ष्म इकाइयों को 5 वर्ष तक 50% ब्याज उपादान, अधिकतम ₹25 लाख

उत्तर प्रदेश सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम प्रोत्साहन नीति-2022 (UP MSME Promotion Policy 2022) राज्य में नई MSME इकाई लगाने या पुरानी इकाई का विस्तार करने वालों के लिए सरकार की मुख्य प्रोत्साहन नीति है [1]। इसकी सबसे उपयोगी बात यह है कि लाभ इकाई के आकार (सूक्ष्म, लघु, मध्यम) और जगह (क्षेत्र) दोनों से तय होता है: बुंदेलखंड और पूर्वांचल में पूँजीगत सब्सिडी और स्टाम्प शुल्क छूट की दरें सबसे ऊँची रखी गई हैं [1]। अक्टूबर 2026 तक आधिकारिक पोर्टलों पर यही नीति (2022) प्रदर्शित है [2][4]।

एक नज़र में

बिंदुजानकारी
नीति का नामउत्तर प्रदेश सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम प्रोत्साहन नीति-2022 [1]
अधिसूचनाशासन आदेश दिनांक 28.09.2022 [1]
वैधताजारी होने की तिथि से 5 वर्ष या नई नीति लागू होने तक [1]
विभागसूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम एवं निर्यात प्रोत्साहन विभाग, उत्तर प्रदेश [1]
पूँजीगत सब्सिडी10% से 25% (क्षेत्र और श्रेणी के अनुसार), अधिकतम ₹4 करोड़ प्रति इकाई [1]
ब्याज उपादाननई सूक्ष्म इकाइयों को 50% (SC/ST व महिला: 60%), 5 वर्ष, अधिकतम ₹25 लाख [1]
स्टाम्प शुल्क छूट50% से 100% (क्षेत्र के अनुसार); महिला उद्यमियों को पूरे प्रदेश में 100% [1]
EPF प्रतिपूर्तिनियोक्ता अंश का 100%, उत्पादन शुरू होने से 5 वर्ष [1]
आवेदनऑनलाइन, ज़िले के उपायुक्त उद्योग (जिला उद्योग केंद्र) के माध्यम से [1][3]

किसके लिए है

नीति में MSME की परिभाषा केंद्र के MSMED अधिनियम 2006 और उसके तहत जारी 01.06.2020 की अधिसूचना के अनुसार रखी गई है [1]:

श्रेणीसंयंत्र-मशीनरी/उपकरण में निवेशटर्नओवर
सूक्ष्म (Micro)₹1 करोड़ तक₹5 करोड़ तक
लघु (Small)₹10 करोड़ तक₹50 करोड़ तक
मध्यम (Medium)₹50 करोड़ तक₹250 करोड़ तक
  • नई इकाइयाँ: पूँजीगत सब्सिडी और ब्याज उपादान मुख्य रूप से नई इकाइयों के लिए हैं [1]।
  • विस्तार/विविधीकरण (Expansion/Diversification): जो इकाई नए पूँजी निवेश से अपना ग्रॉस ब्लॉक कम से कम 25% और उत्पादन क्षमता 25% बढ़ाए, उसे तय शर्तों के तहत नई इकाई जैसी सुविधाएँ देने का प्रावधान है [1]।
  • कौन आवेदन कर सकता है: MSME 1-Connect पोर्टल के अनुसार 18 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति, स्वयं सहायता समूह, धर्मार्थ ट्रस्ट, पंजीकृत सोसायटी आदि; संयंत्र-मशीनरी नई और विनिर्माण (Manufacturing) में उपयोग होनी चाहिए [4]।
  • समय-सीमा: पात्र निवेश अवधि सूक्ष्म इकाई के लिए 2 वर्ष, लघु के लिए 3 वर्ष और मध्यम के लिए 4 वर्ष है; इसी अवधि में व्यावसायिक उत्पादन (Commercial Production) शुरू होना ज़रूरी है [1]।
  • नकारात्मक सूची (Negative List): तंबाकू उत्पाद, गुटखा, पान मसाला, शराब, एरेटेड/कार्बोनेटेड पेय, आतिशबाज़ी निर्माण और 40 माइक्रॉन से कम की प्लास्टिक कैरी बैग जैसी इकाइयाँ प्रोत्साहन के दायरे से बाहर हैं [1]।

क्या-क्या प्रोत्साहन / लाभ मिलते हैं

पूँजीगत सब्सिडी (Capital Subsidy)

नीति में इसे "निवेश प्रोत्साहन सहायता" कहा गया है। यह संयंत्र, मशीनरी, उपकरण और संबंधित भवन पर किए गए निवेश पर दी जाती है; भूमि की लागत इसमें शामिल नहीं है [1]।

क्षेत्रसूक्ष्मलघुमध्यम
बुंदेलखंड और पूर्वांचल25%20%15%
मध्यांचल और पश्चिमांचल20%15%10%
  • SC/ST और महिला उद्यमियों को 2% अतिरिक्त सब्सिडी का प्रावधान है [1]।
  • अधिकतम सीमा ₹4 करोड़ प्रति इकाई है [1]।
  • भुगतान दो बराबर किस्तों में होता है: पहली किस्त आंशिक प्रगति (जैसे भवन निर्माण पूरा होने) पर और दूसरी, जब इकाई अपनी क्षमता का कम से कम 50% व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दे [1][3]।

पूँजीगत ब्याज उपादान (Capital Interest Subsidy)

नई सूक्ष्म इकाइयों के लिए ऋण पर देय ब्याज का 50% हर साल, 5 वर्ष तक, अधिकतम ₹25 लाख प्रति इकाई देने का प्रावधान है [1]। SC/ST और महिला उद्यमियों (स्वामित्व या कम से कम 51% अंशपूँजी) की इकाइयों के लिए यह दर 60% है [1]। दावा सालाना होता है, और उस वर्ष का पूरा ब्याज चुकाने के बाद ही किया जाता है [1][3]।

स्टाम्प शुल्क छूट (Stamp Duty Exemption)

क्षेत्रछूट
पूर्वांचल और बुंदेलखंड100%
मध्यांचल और पश्चिमांचल (गौतमबुद्धनगर व गाज़ियाबाद छोड़कर)75%
गौतमबुद्धनगर और गाज़ियाबाद50%
महिला उद्यमियों की इकाइयाँ (पूरे प्रदेश में)100%

स्रोत: [1]। छूट के बदले उद्यमी को छूट वाली स्टाम्प शुल्क राशि के बराबर बैंक गारंटी जमा करनी होती है, जो इकाई में उत्पादन शुरू होने के बाद ऑनलाइन आवेदन और ज़िला उद्योग केंद्र के निरीक्षण के बाद जारी (रिलीज़) की जाती है [3][5]।

अन्य प्रमुख प्रोत्साहन

प्रोत्साहनप्रावधान
EPF प्रतिपूर्तिनियोक्ता के EPF अंश का 100%, उत्पादन शुरू होने से 5 वर्ष [1]
क्रेडिट गारंटी शुल्कबैंकों से ₹2 करोड़ तक के कोलैटरल-फ्री ऋण पर CGTMSE की वन टाइम गारंटी फीस राज्य सरकार वहन करेगी [1]
स्टॉक एक्सचेंज से पूँजी जुटानाइक्विटी जुटाने के खर्च का 20%, अधिकतम ₹5 लाख [1]
गुणवत्ता प्रमाणन (ZED, GMP, हॉलमार्क आदि)प्रमाणन लागत का सूक्ष्म इकाई को 75%, लघु को 50% और मध्यम को 25%, अधिकतम ₹5 लाख [1]
पेटेंट और GI टैग75%, अधिकतम ₹10 लाख [2]
ERP / ICT समाधान75%, अधिकतम ₹1 लाख / ₹5 लाख [2]
कॉमन इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP)परियोजना लागत का 50%, अधिकतम ₹10 करोड़ [2]

औद्योगिक पार्क डेवलपर्स के लिए: कम से कम 10 एकड़ के स्वीकृत MSME पार्क, एस्टेट या फ्लैटेड फैक्ट्री कॉम्प्लेक्स (फ्लैटेड फैक्ट्री के लिए न्यूनतम 4,000 वर्ग मीटर क्षेत्र) पर 7 वर्ष तक सालाना ब्याज का 50% तक, अधिकतम ₹2 करोड़ प्रति वर्ष, और भूमि क्रय पर 100% स्टाम्प शुल्क छूट का प्रावधान है [2][6]।

आवेदन कैसे करें

  • पंजीकरण तैयार रखें: उद्यम (Udyam) पंजीकरण, GST पंजीकरण और ज़रूरी NOC (प्रदूषण नियंत्रण, फायर आदि) सब्सिडी दावे के समय माँगे जाते हैं [3]।
  • ऑनलाइन आवेदन: नीति के तहत वित्तीय सहायता के लिए आवेदन ऑनलाइन करना होता है [1]। MSME 1-Connect पोर्टल पर इस नीति का आवेदन लिंक निवेश मित्र पर ले जाता है [4], जबकि स्टाम्प शुल्क छूट के पेज पर DI UP पोर्टल (diupmsme.upsdc.gov.in) का उल्लेख है [5]। निवेश मित्र के बारे में विस्तार से हमारी गाइड निवेश मित्र 3.0 में पढ़ें।
  • DPR और दस्तावेज़: ऑनलाइन आवेदन के साथ विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) जमा करनी होती है, और फिर DPR व दस्तावेज़ों की प्रतियाँ ज़िला उद्योग केंद्र (DIC) में देनी होती हैं [3]।
  • पूँजीगत सब्सिडी के दस्तावेज़: CA द्वारा प्रमाणित DPR और मशीनरी सूची, बैंक का स्वीकृति व वितरण पत्र, स्वीकृत भवन मानचित्र, भूमि के अकृषक (Non-Agricultural) होने का प्रमाणपत्र, प्रदूषण व फायर NOC, GST, फैक्ट्री और उद्यम पंजीकरण [3]।
  • जाँच और स्वीकृति: आवेदन ज़िले के उपायुक्त उद्योग के पास जाता है, जो इसे मंडल के संयुक्त/अपर आयुक्त उद्योग को भेजते हैं; मंडल स्तरीय समिति की संस्तुति के बाद आयुक्त एवं निदेशक उद्योग की अध्यक्षता वाली राज्य स्तरीय समिति दावे का परीक्षण कर स्वीकृति देती है [1][3]।
  • भुगतान: स्वीकृत राशि DBT के ज़रिए सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है [3]।
  • मदद: MSME 1-Connect हेल्पलाइन 155343 है [4]।

ध्यान रखने वाली बातें

  • भूमि की लागत: भूमि की लागत पर पूँजीगत सब्सिडी नहीं मिलती, लेकिन स्थिर पूँजी निवेश में इसे अधिकतम 10% तक गिना जा सकता है [1]।
  • कुल सीमा: नीति के तहत किसी इकाई को मिलने वाली कुल वित्तीय सहायता उसके कुल स्थिर पूँजी निवेश (Fixed Capital Investment) से अधिक नहीं हो सकती [1]।
  • एक मद, एक नीति: अलग-अलग नीतियों से एक ही मद में दोहरा लाभ रोकने के लिए उद्यम को केवल एक नीति के तहत लाभ लेने का प्रावधान है [1]। बड़े निवेश के लिए औद्योगिक निवेश एवं रोज़गार प्रोत्साहन नीति 2022 से तुलना कर लेना उपयोगी रहता है।
  • क्षेत्र की पुष्टि: आपका ज़िला किस क्षेत्र (बुंदेलखंड, पूर्वांचल, मध्यांचल, पश्चिमांचल) में आता है, इसकी पुष्टि ज़िला उद्योग केंद्र से करें, क्योंकि इसी से सब्सिडी और स्टाम्प छूट की दर तय होती है।
  • दूसरी योजनाएँ: छोटे उद्यमी मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान और एक जनपद एक उत्पाद (ODOP) की जानकारी भी देख सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या यह नीति अभी लागू है?

यह नीति 28.09.2022 के आदेश से अधिसूचित हुई और जारी होने से 5 वर्ष या नई नीति लागू होने तक प्रभावी है [1]। अक्टूबर 2026 तक Invest UP और MSME 1-Connect पोर्टल पर यही नीति प्रदर्शित है [2][4]।

क्या ब्याज उपादान लघु और मध्यम इकाइयों को भी मिलता है?

नहीं, नीति में पूँजीगत ब्याज उपादान केवल नई सूक्ष्म इकाइयों के लिए रखा गया है [1]। लघु और मध्यम इकाइयाँ पूँजीगत सब्सिडी, स्टाम्प शुल्क छूट और अन्य प्रोत्साहनों के लिए पात्र हो सकती हैं [1]।

महिला उद्यमियों के लिए क्या अलग प्रावधान हैं?

महिला उद्यमियों को पूँजीगत सब्सिडी में 2% अतिरिक्त, सूक्ष्म इकाई होने पर 50% की जगह 60% ब्याज उपादान, और प्रदेश में कहीं भी इकाई लगाने पर 100% स्टाम्प शुल्क छूट का प्रावधान है [1]।

पूँजीगत सब्सिडी कब मिलती है?

सब्सिडी दो बराबर किस्तों में दी जाती है: पहली भवन निर्माण जैसी आंशिक प्रगति पर और दूसरी क्षमता के कम से कम 50% व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने पर [1][3]।

स्रोत

मुख्य आधिकारिक स्रोत: Uttar Pradesh MSME Promotion Policy-2022 (English translation) — Invest UP — मूल दस्तावेज़ देखें
यह गाइड आधिकारिक दस्तावेज़ों के आधार पर तैयार की गई है; हर तथ्य का स्रोत लेख के अंत में दिया गया है। नीतियाँ समय-समय पर बदलती हैं, इसलिए आवेदन से पहले नवीनतम आधिकारिक अधिसूचना ज़रूर देखें। किसी त्रुटि की सूचना [email protected] पर "सुधार" विषय के साथ दें।

और गाइड