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उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग नीति 2025: टॉप-अप, 20% पूँजीगत अनुदान और आवेदन की जानकारी

यूपी कॉरपोरेट न्यूज़ डेस्क • • 9 मिनट

उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग नीति 2025 केंद्र की इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) की पूरक नीति है, जो 1 अप्रैल 2025 से छह वर्ष के लिए लागू है। इसमें ECMS में स्वीकृत इकाइयों को केंद्र के बराबर टॉप-अप, ECMS से बाहर की पात्र इकाइयों को 20% पूँजीगत अनुदान और स्थानीय सोर्सिंग पर अतिरिक्त प्रोत्साहन का प्रावधान है, जिसकी नोडल एजेंसी यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPLC) है।

उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग नीति 2025: टॉप-अप, 20% पूँजीगत अनुदान और आवेदन की जानकारी
मुख्य बिंदु
  • नीति 1 अप्रैल 2025 से छह वर्ष के लिए प्रभावी; शासनादेश 4 सितंबर 2025 को जारी
  • केंद्र की ECMS में स्वीकृत इकाइयों को केंद्र के बराबर राज्य टॉप-अप; केंद्र और राज्य का कुल प्रोत्साहन पात्र निवेश के 100% तक सीमित
  • ECMS से बाहर की पात्र इकाइयों को पात्र पूँजी निवेश का 20% पूँजीगत अनुदान, रोज़गार लक्ष्य से जुड़ा
  • राज्य से कच्चा माल लेने पर Li-ion सेल के लिए 2% और मल्टी-लेयर PCB के लिए 1% अतिरिक्त प्रोत्साहन
  • ₹2,000 करोड़ से अधिक निवेश पर केस-टू-केस विशेष पैकेज; नोडल एजेंसी UPLC

उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग नीति 2025 (UPECMP 2025) राज्य में मोबाइल, आईटी हार्डवेयर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों में लगने वाले पुर्ज़ों — जैसे डिस्प्ले मॉड्यूल, कैमरा मॉड्यूल, प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB) और लिथियम-आयन सेल — के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई है [1][3]। यह भारत सरकार की इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) की पूरक नीति है, यानी केंद्र से मिलने वाले प्रोत्साहन के साथ राज्य अतिरिक्त सहायता का ढाँचा देता है [1][3]। नीति की नोडल एजेंसी यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPLC) है [1][4]।

एक नज़र में

बिंदुजानकारी
नीति का नामउत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग नीति 2025 [1]
विभागआईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग, उत्तर प्रदेश [3]
शासनादेशसंख्या 1186/78-1-2025, दिनांक 4 सितंबर 2025 [3]
प्रभावी तिथि और अवधि1 अप्रैल 2025 से छह वर्ष (एक वर्ष की मैच्योरिटी अवधि सहित) [3]; UPLC के अनुसार 31 मार्च 2031 तक [4]
नोडल एजेंसीयूपी इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPLC) [1][4]
ECMS इकाइयों के लिएकेंद्र के बराबर राज्य टॉप-अप [1][2]
ECMS से बाहर की इकाइयों के लिएपात्र पूँजी निवेश का 20% पूँजीगत अनुदान [1][2]
स्थानीय सोर्सिंग बोनसLi-ion सेल: 2%, मल्टी-लेयर PCB: 1% [1][4]
बड़ी परियोजनाएँ₹2,000 करोड़ से अधिक निवेश पर केस-टू-केस पैकेज [1][2]

Invest UP के पोर्टल पर यह नीति "प्रथम संशोधन" के नाम से सूचीबद्ध है और 7 सितंबर 2026 का हिंदी दस्तावेज़ भी वहाँ उपलब्ध है [2]। UPLC की वेबसाइट पर इसी तारीख का दस्तावेज़ "वित्तीय प्रोत्साहन के दिशा-निर्देश व क्रियान्वयन प्रक्रिया" के रूप में दर्ज है [4]। अंग्रेज़ी पाठ हिंदी नीति का अनुवाद है और किसी अंतर की स्थिति में हिंदी पाठ मान्य होता है [1]; आवेदन से पहले नवीनतम हिंदी दस्तावेज़ देख लेना उपयोगी है।

किसके लिए है

नीति उत्तर प्रदेश में स्थित उन इकाइयों के लिए है जो लक्षित इलेक्ट्रॉनिक पुर्ज़ों का निर्माण करें — चाहे नई इकाई (ग्रीनफ़ील्ड) हो या मौजूदा इकाई का विस्तार, आधुनिकीकरण या विविधीकरण (ब्राउनफ़ील्ड) [1][4]। लक्षित श्रेणियाँ केंद्र की ECMS जैसी ही हैं [1][5]:

श्रेणीउत्पाद
A. सब-असेंबलीडिस्प्ले मॉड्यूल, कैमरा मॉड्यूल [1]
B. बेयर कंपोनेंटनॉन-SMD पैसिव कंपोनेंट, इलेक्ट्रो-मैकेनिकल पुर्ज़े, मल्टी-लेयर PCB, डिजिटल उपयोग के Li-ion सेल, मोबाइल/आईटी हार्डवेयर के एनक्लोज़र [1]
C. चुनिंदा बेयर कंपोनेंटHDI/MSAP/फ़्लेक्सिबल PCB, SMD पैसिव कंपोनेंट [1]
D. इकोसिस्टमऊपर की श्रेणियों के पुर्ज़े और उत्पादन में लगने वाले उपकरण (कैपिटल इक्विपमेंट) [1][2]

हर उत्पाद के लिए अलग आवेदन करना होता है और एक इकाई केवल एक ही श्रेणी में प्रोत्साहन के लिए पात्र है [1]। Li-ion सेल केवल डिजिटल उपयोग के लिए (स्टोरेज और मोबिलिटी को छोड़कर) और 10,000 mAh तक की क्षमता के पात्र हैं [1]।

क्या-क्या प्रोत्साहन / लाभ मिलते हैं

ECMS में स्वीकृत इकाइयों के लिए टॉप-अप

केंद्र की ECMS में स्वीकृत इकाइयों को राज्य की ओर से केंद्र के बराबर टॉप-अप प्रोत्साहन का प्रावधान है [1][2]। केंद्र और राज्य का कुल प्रोत्साहन पात्र पूँजी निवेश के 100% से अधिक नहीं हो सकता [1][3]। ₹50 करोड़ तक का टॉप-अप एक किश्त में और उससे अधिक राशि वार्षिक किश्तों में (प्रति किश्त अधिकतम ₹50 करोड़) देने का प्रावधान है [1]। केंद्र से स्वीकृति या वितरण के तीन महीने के भीतर राज्य को आवेदन करना होता है [1]।

ECMS से बाहर की इकाइयों के लिए 20% पूँजीगत अनुदान

जो पात्र इकाइयाँ ECMS में शामिल या स्वीकृत नहीं हैं, उन्हें पात्र पूँजी निवेश का 20% पूँजीगत अनुदान (Capital Subsidy) देने का प्रावधान है, बशर्ते वाणिज्यिक उत्पादन निवेश के बाद शुरू हो [1][4]। अनुदान का 20% हिस्सा तय रोज़गार लक्ष्य पूरे होने पर ही जारी होता है; लक्ष्य पूरा न होने पर यह हिस्सा घटा दिया जाता है [1]।

  • भूमि और भवन: सामान्यतः पात्र निवेश में नहीं गिने जाते, पर इस अनुदान के लिए पात्र स्थायी पूँजी निवेश के 30% या ₹50 करोड़, जो कम हो, तक इन्हें शामिल किया जा सकता है [1][3]।
  • किश्तें: पहली किश्त ₹30 करोड़ या प्रोत्साहन के 60%, जो कम हो; बाकी राशि अगले वर्षों में, प्रति किश्त अधिकतम ₹25 करोड़। ₹150 करोड़ से अधिक के अनुदान में पहली किश्त ₹50 करोड़ और फिर चार बराबर किश्तें [1]।

स्थानीय सोर्सिंग पर अतिरिक्त प्रोत्साहन

  • Li-ion सेल निर्माता राज्य के भीतर से कैथोड एक्टिव मटीरियल (CAM) लें तो 2% अतिरिक्त [1][4]।
  • मल्टी-लेयर PCB निर्माता राज्य के भीतर से लैमिनेट लें तो 1% अतिरिक्त [1][4]।
  • राज्य के बाहर (देश के भीतर) से सोर्सिंग पर लागू अतिरिक्त दर का 50%, और आंशिक सोर्सिंग पर अनुपात के अनुसार [1]।

बड़ी परियोजनाओं के लिए विशेष पैकेज

₹2,000 करोड़ से अधिक निवेश वाली परियोजनाओं के लिए अधिकार प्राप्त समिति (Empowered Committee) शर्तों में छूट या सीमा बढ़ाने की संस्तुति कैबिनेट को कर सकती है; कैबिनेट केस-टू-केस आधार पर अतिरिक्त पैकेज स्वीकृत कर सकती है [1]। यहाँ भी कुल प्रोत्साहन पात्र स्थायी पूँजी निवेश के 100% तक सीमित है [1]।

अन्य प्रोत्साहन

पात्र इकाइयाँ उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग नीति 2020 (प्रथम संशोधन) के अन्य प्रोत्साहन भी ले सकती हैं — स्टांप ड्यूटी लाभ, विकास प्राधिकरणों/राज्य एजेंसियों से आवंटित भूमि पर 25% छूट (बुंदेलखंड और पूर्वांचल में 50% तक), विद्युत शुल्क (Electricity Duty) में छूट, ब्याज अनुदान, पेटेंट लागत की प्रतिपूर्ति, कौशल विकास, EPF प्रतिपूर्ति, लीज़ रेंटल सहायता, लॉजिस्टिक्स सब्सिडी और शोध एवं विकास (R&D) सहायता [1]। Invest UP के नीति पेज पर स्टांप ड्यूटी और विद्युत शुल्क में 100% छूट का उल्लेख है [2], जबकि 2020 नीति (प्रथम संशोधन 2022) के पाठ में विद्युत शुल्क छूट 10 वर्ष के लिए क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग दरों पर दी गई है [6]; अपनी इकाई पर लागू दर UPLC से पुष्टि कर लेना उपयोगी है।

आवेदन कैसे करें

  • राज्य में संपर्क: UPLC एक प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट के सहयोग से निवेशकों के लिए सिंगल विंडो की भूमिका निभाता है [1]। संपर्क: 0522-2286809, 2286812, 4130303 [4]।
  • केंद्र की ECMS: ECMS के आवेदन केंद्र सरकार के पोर्टल ecms.meity.gov.in पर होते हैं [7]। ECMS इकाइयों को केंद्र और राज्य, दोनों को आवेदन करना होता है [1]।
  • प्रति उत्पाद अलग आवेदन: आवेदन में बदलाव के लिए पुराना आवेदन वापस लेकर नया आवेदन करना होता है [1]।
  • स्वीकृति: प्रस्तावों की जाँच प्रमुख सचिव, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स की अध्यक्षता वाली पॉलिसी इम्प्लीमेंटेशन यूनिट (PIU) करती है [1]। ₹200 करोड़ तक की परियोजनाओं के लिए लेटर ऑफ़ कम्फर्ट विभागीय मंत्री की स्वीकृति से और ₹200 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं के लिए मंत्रिपरिषद की स्वीकृति से जारी करने का प्रावधान है [1][3]।
  • दस्तावेज़: नीति, शासनादेश और क्रियान्वयन दिशा-निर्देश UPLC और Invest UP पर उपलब्ध हैं [2][4]। अन्य राज्य स्वीकृतियों के लिए निवेश मित्र 3.0 की जानकारी उपयोगी है।

ध्यान रखने वाली बातें

  • 1 अप्रैल 2025 या उसके बाद का पूँजी निवेश ही पात्र है [1][3]।
  • जिस निवेश पर राज्य की किसी दूसरी योजना में प्रोत्साहन लिया गया हो, उस पर दोबारा लाभ नहीं; इसके लिए प्रबंधन का शपथ-पत्र देना होता है [1]।
  • डिस्प्ले और कैमरा मॉड्यूल की पूरी सब-असेंबली राज्य में होनी चाहिए; अर्ध-असेंबल उत्पाद की केवल अंतिम असेंबली पात्र नहीं [1]।
  • मल्टी-लेयर PCB और Li-ion सेल इकाइयों को दूसरे वर्ष से हर साल कम से कम एक तय इनपुट का स्थानीयकरण करना होता है [1]।
  • स्वीकृत प्रोत्साहन का 2% प्रशासनिक शुल्क के रूप में नोडल एजेंसी को जाता है, जो वितरण से काटा जाता है [1][3]।
  • सेमीकंडक्टर इकाइयों के लिए राज्य की अलग नीति है; देखें सेमीकंडक्टर नीति 2024।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या यह नीति केंद्र की ECMS के बिना भी काम करती है?

हाँ। जो इकाइयाँ ECMS में स्वीकृत नहीं हैं, वे भी लक्षित उत्पाद बनाने पर 20% पूँजीगत अनुदान के लिए पात्र हो सकती हैं [1][4]।

नीति कब तक लागू है?

नीति 1 अप्रैल 2025 से छह वर्ष के लिए है और ECMS की अवधि से जुड़ी है [1][3]। UPLC ने इसकी अवधि 31 मार्च 2031 तक बताई है [4]।

क्या MSME और स्टार्टअप भी इसमें आ सकते हैं?

नीति के उद्देश्यों में कंपोनेंट डिज़ाइन और निर्माण में स्टार्टअप और MSME की भागीदारी बढ़ाना शामिल है [4]। उद्यम पंजीकरण के लिए देखें उद्यम पंजीकरण गाइड।

केंद्र की ECMS क्या है?

केंद्रीय कैबिनेट ने 28 मार्च 2025 को ₹22,919 करोड़ के परिव्यय वाली ECMS को स्वीकृति दी थी, जिसकी अवधि छह वर्ष और एक वर्ष की गेस्टेशन अवधि है [5]। इसमें टर्नओवर-लिंक्ड, कैपेक्स और हाइब्रिड प्रोत्साहन के प्रावधान हैं [5]।

नीति के बारे में जानकारी कहाँ से लें?

UPLC (फ़ोन 0522-2286809) और Invest UP हेल्पडेस्क (+91 522 6923000) से संपर्क किया जा सकता है [2][4]।

स्रोत

मुख्य आधिकारिक स्रोत: उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग नीति 2025 — आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग, उत्तर प्रदेश (Invest UP) — मूल दस्तावेज़ देखें
यह गाइड आधिकारिक दस्तावेज़ों के आधार पर तैयार की गई है; हर तथ्य का स्रोत लेख के अंत में दिया गया है। नीतियाँ समय-समय पर बदलती हैं, इसलिए आवेदन से पहले नवीनतम आधिकारिक अधिसूचना ज़रूर देखें। किसी त्रुटि की सूचना [email protected] पर "सुधार" विषय के साथ दें।

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